बीएमडब्ल्यू, मर्सिडीज से लेकर लेम्बोर्गिनी, पोर्श तक...भारत-ईयू ट्रेड डील के बाद इन प्रीमियम कारों के घट जाएंगे दाम

भारत और यूरोपीय संघ का द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौता अगले साल लागू होगा, जिससे बीएमडब्ल्यू, मर्सिडीज-बेंज और लेम्बोर्गिनी जैसी प्रीमियम कारें भारत में सस्ती होंगी. कोटा-आधारित शुल्क रियायत और स्थानीय उत्पादन से रोजगार व तकनीक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

नई दिल्लीः भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हाल ही में पूर्णता पर पहुंचा द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौता (FTA) अगले साल लागू होने के बाद, बीएमडब्ल्यू, मर्सिडीज-बेंज, लेम्बोर्गिनी, पोर्श और ऑडी जैसी प्रीमियम यूरोपीय कारें भारत में अधिक किफायती हो सकती हैं. अधिकारियों के अनुसार, इस समझौते के तहत भारत आयात शुल्क में कोटा-आधारित रियायत देगा, जबकि यूरोपीय संघ भारतीय कारों पर अपने शुल्क को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करेगा.

लग्जरी कारों को बड़ी राहत

इटली की सुपरकार निर्माता कंपनी लेम्बोर्गिनी, जिसकी भारतीय कीमत लगभग 3.8 करोड़ रुपये से शुरू होती है, इस FTA से सबसे ज्यादा लाभान्वित होने की उम्मीद रखती है. लेम्बोर्गिनी अपने सभी मॉडल आयात करती है और नए समझौते के तहत इन वाहनों पर आयात शुल्क कम होने से कीमतों में महत्वपूर्ण गिरावट आ सकती है.

भारत और यूरोपीय संघ ने मंगलवार को मुक्त व्यापार समझौते की बातचीत पूरी होने की घोषणा की. उम्मीद है कि इस साल के अंत तक समझौते पर हस्ताक्षर हो जाएंगे और यह अगले साल की शुरुआत से लागू हो सकता है.

एक दशक बाद व्यापार वार्ता फिर से शुरू

यूरोपीय ऑटो निर्माता और भारतीय उपभोक्ता दोनों इस समझौते की प्रगति पर करीब से नजर रख रहे हैं. इस बातचीत की शुरुआत 2007 में हुई थी, लेकिन ऑटोमोबाइल शुल्क पर असहमति के कारण 2013 में इसे रोक दिया गया था. अब भारत के ऑटो उद्योग के मजबूत होने और मुक्त व्यापार समझौतों के प्रति खुलापन बढ़ने के कारण वार्ता फिर से सफल हुई.

कोटा-आधारित शुल्क रियायत

वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि भारत और यूरोपीय संघ ने कोटा-आधारित शुल्क रियायत मॉडल पर सहमति बनाई है. इसके तहत उच्च मूल्य वाली कारों के लिए सीमित संख्या में आयात पर ही छूट दी जाएगी. अधिकारी ने कहा, “यह व्यवस्था दोनों पक्षों की संवेदनशीलताओं को संतुलित करती है और यूरोपीय कंपनियों को भारत में स्थानीय उत्पादन का अवसर भी देती है.”

25 लाख रुपये से कम कीमत वाली कारें सुरक्षित

भारत के ऑटो बाजार में मुख्य रूप से 10 लाख से 25 लाख रुपये तक की कारें हैं. यूरोपीय निर्माता इस सेगमेंट में रुचि नहीं रखते और इसलिए ये कारें भारत में शुल्क-रियायत से अप्रभावित रहेंगी. उच्च मूल्य वाली कारों के लिए कोटा धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा.

स्थानीय उत्पादन और रोजगार सृजन

कोटा से अधिक आयात पर शुल्क कटौती नहीं होगी, ताकि यूरोपीय निर्माता भारत में उत्पादन का विकल्प अपनाएं. इससे स्थानीय उद्योग को लाभ मिलेगा और रोजगार सृजन में भी मदद होगी. समझौते से भारत में उन्नत विनिर्माण प्रौद्योगिकी और आपूर्ति श्रृंखलाओं का विकास भी संभव होगा.

भारतीय कारों को यूरोपीय बाजार में अवसर

भारत द्वारा दिए गए कोटे के बदले में यूरोपीय बाजार में भारत को पांच गुना कोटा मिलेगा. उदाहरण के लिए, अगर भारत 1 लाख कारों का कोटा देगा, तो उसे यूरोप में 25 लाख कारों की पहुंच प्राप्त होगी. यह कदम भारतीय वाहनों के वैश्विक विस्तार को प्रोत्साहित करेगा.

इलेक्ट्रिक वाहनों पर भी छूट

इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के लिए कोटा-आधारित शुल्क रियायत पांचवें वर्ष से लागू होगी. प्रारंभ में आयात शुल्क 30-35 प्रतिशत होगा और समय के साथ घटकर 10-15 प्रतिशत तक आएगा. वर्तमान में 40,000 अमेरिकी डॉलर से कम कीमत वाले EV पर 70 प्रतिशत और 40,000 अमेरिकी डॉलर से अधिक कीमत वाले वाहन पर 110 प्रतिशत शुल्क लगता है.

घरेलू ऑटो उद्योग को समर्थन

सरकार ने ऑटोमोटिव मिशन प्लान 2047 (AMP 2047) जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से घरेलू उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार किया है. FTA के बाद, यह पहल और प्रभावी हो जाएगी और भारत के ऑटो उद्योग को वैश्विक मंच पर मजबूत स्थिति दिलाएगी.

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