चीन की मनमानी अब नहीं चलेगी, भारत बनेगा रेयर अर्थ हब, बजट में वित्त मंत्री का धमाकेदार ऐलान

केंद्रीय बजट 2026 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बड़ा ऐलान किया है. भारत में 'रेयर अर्थ कॉरिडोर' बनाया जाएगा. यह खास पहल दुर्लभ खनिजों के क्षेत्र में भारत को ताकत देगी और चीन की मनमानी को चुनौती देगी. ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश व तमिलनाडु जैसे खनिज-समृद्ध राज्यों को खास मदद मिलेगी, जिससे देश में रेयर अर्थ एलिमेंट्स का उत्पादन जबरदस्त बढ़ेगा.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यूनियन बजट 2026-27 पेश करते हुए दुर्लभ पृथ्वी तत्वों (रेयर अर्थ एलिमेंट्स) के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की बड़ी घोषणा की है. उन्होंने ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे खनिज संपन्न राज्यों में समर्पित रेयर अर्थ कॉरिडोर स्थापित करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से सहायता देने का प्रस्ताव रखा. यह कदम चीन पर भारत की निर्भरता कम करने और रक्षा, एयरोस्पेस, इलेक्ट्रॉनिक्स तथा स्वच्छ ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में मजबूत घरेलू क्षमता विकसित करने की दिशा में अहम है.

बजट भाषण में वित्त मंत्री ने कहा कि नवंबर 2025 में शुरू की गई दुर्लभ पृथ्वी स्थायी मैग्नेट योजना के आगे बढ़ते हुए अब इन राज्यों को खनन, प्रोसेसिंग, रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए समर्थन मिलेगा. रिसर्च एनालिस्ट जितेंद्र कुमार गुप्ता ने इसे डिफेंस और एयरोस्पेस में इस्तेमाल होने वाले हाई-वैल्यू मिनरल्स के लिए समर्पित लॉजिस्टिक्स और प्रोसेसिंग पुश का संकेत बताया है.

रेयर अर्थ कॉरिडोर का ऐलान

निर्मला सीतारमण ने ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में महत्वपूर्ण खनिज कॉरिडोर स्थापित करने में सहायता देने का प्रस्ताव रखा. अब हम खनिज समृद्ध राज्यों ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु को समर्पित दुर्लभ पृथ्वी कॉरिडोर स्थापित करने में सहायता देने का प्रस्ताव यह कॉरिडोर खनन, प्रोसेसिंग, रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देंगे, जिससे भारत की रेयर अर्थ मेटल पर विदेशी निर्भरता कम होगी. चीन के पास दुनिया का सबसे बड़ा रेयर अर्थ भंडार और प्रोसेसिंग क्षमता है, ऐसे में यह कदम वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की स्थिति मजबूत करेगा.

दुर्लभ पृथ्वी स्थायी मैग्नेट योजना का विस्तार 

2025 में शुरू की गई दुर्लभ पृथ्वी परमानेंट मैग्नेट स्कीम के तहत आगे बढ़ते हुए खनिज संपन्न राज्यों को सहायता दी जाएगी. यह योजना इंटीग्रेटेड प्रोडक्शन क्षमता विकसित करने पर केंद्रित है, जो ईवी, विंड टरबाइन, इलेक्ट्रॉनिक्स और डिफेंस उपकरणों के लिए जरूरी है.

सेमीकंडक्टर मिशन 2.0: नई शुरुआत 

वित्त मंत्री ने कहा कि भारत के सेमीकंडक्टर मिशन 1.0 ने देश की सेमीकंडक्टर क्षमताओं का विस्तार किया है. इसी आधार पर अब ISM 2.0 लॉन्च किया जाएगा, जिसमें उपकरण और सामग्री बनाने, फुल-स्टैक इंडियन IP विकसित करने और सप्लाई चेन को मजबूत करने पर फोकस रहेगा.

विकास को गति देने के छह प्रमुख क्षेत्र 

निर्मला सीतारमण ने विकास को तेज करने के लिए छह क्षेत्रों में हस्तक्षेप का प्रस्ताव रखा. कई स्ट्रेटेजिक और फ्रंटियर सेक्टर में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाना. पुराने इंडस्ट्रियल सेक्टर को फिर से जिंदा करना. चैंपियन MSME बनाना. इंफ्रास्ट्रक्चर को जोरदार बढ़ावा देना. लंबे समय तक सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करना. शहरी आर्थिक क्षेत्रों का विकास करना.

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