Budget 2026: बजट आने के बाद पहाड़ों में घूमना और सफर होगा आसान! हिमाचल-उत्तराखंड और कश्मीर में दौड़ेंगी नई ट्रेनें
रविवार को संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश किया गया. इस दौरान पर्यटन को लेकर कई बड़े ऐलान किए गए हैं. अब पहाड़ों में घूमना और भी आसान होने वाला है.

Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026 को संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश किया. बजट में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई बड़े ऐलान किए गए हैं. खास तौर पर पहाड़ी इलाकों में पर्यावरण के अनुकूल पर्वतीय रेलगाड़ियां शुरू करने की योजना है. इससे हिल स्टेशनों तक पहुंच आसान होगी और पर्यटन को नई रफ्तार मिलेगी.
पर्यावरण अनुकूल माउंटेन ट्रेनों की योजना
बजट भाषण में वित्त मंत्री ने कहा कि भारत में ट्रेकिंग और हाइकिंग के लिए विश्व स्तर की संभावनाएं हैं. सरकार पहाड़ी इलाकों में इकोलॉजिकल रूप से टिकाऊ ट्रेल्स और ट्रेन सेवाएं विकसित करेगी. हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में पर्वतीय रेलगाड़ियां शुरू होंगी.
इसके अलावा पूर्वी घाट में अराकु वैली (आंध्र प्रदेश) और पश्चिमी घाट में पोधिगाई मलै (तमिलनाडु-केरल क्षेत्र) में भी ऐसी ट्रेनें चलेंगी. ये ट्रेनें पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना सुंदर पहाड़ी नजारों का मजा लेंगी. स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा और पर्यटन बढ़ेगा.
प्रकृति पर्यटन को मिला बढ़ावा
बजट में सिर्फ पहाड़ ही नहीं, अन्य जगहों पर भी प्रकृति आधारित पर्यटन पर जोर दिया गया है. ओडिशा, कर्नाटक और केरल के तटों पर कछुआ ट्रेल्स बनाए जाएंगे, जहां कछुओं के अंडे देने के स्थलों को देखा जा सकेगा. आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में पुलिकट झील के आसपास बर्ड वॉचिंग ट्रेल्स विकसित होंगी. इससे पक्षी प्रेमियों को नया अनुभव मिलेगा.
7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनेंगे
बजट में पर्यावरण अनुकूल यात्रा पर बड़ा फोकस है. सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाए जाएंगे, जैसे मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु आदि. ये रूट समय बचाएंगे और प्रदूषण कम करेंगे. साथ ही नए फ्रेट कॉरिडोर और 20 नेशनल वाटरवेज को अगले पांच साल में चालू किया जाएगा.
पर्यटन से अर्थव्यवस्था होगा मजबूत
वित्त मंत्री ने कहा कि पर्यटन क्षेत्र रोजगार, विदेशी मुद्रा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकता है. इन योजनाओं से पहाड़ी इलाकों में पर्यटक बढ़ेंगे, होटल-ट्रांसपोर्ट बिजनेस चमकेगा और स्थानीय लोग फायदा उठाएंगे.


