Budget 2026 पर सियासी संग्राम: कांग्रेस ने की निर्मला सीतारमण के भाषण की आलोचना, पारदर्शिता पर उठाए सवाल

केंद्रीय बजट 2026-27 पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी. कांग्रेस ने इसे प्रचार के अनुरूप नहीं बताया, जबकि अखिलेश यादव ने इसे सीमित वर्ग के लिए तैयार बजट कहा. सरकार ने इसे विकास और सुधारों का रोडमैप बताया.

Shraddha Mishra

नई दिल्ली: केंद्रीय बजट 2026-27 पेश होने के बाद राजनीतिक माहौल भी गर्म हो गया है. जहां सरकार इसे विकास और सुधारों का रोडमैप बता रही है, वहीं विपक्षी दलों ने बजट की दिशा और प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए हैं. संसद में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के भाषण के कुछ ही घंटों बाद कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य दलों ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इसे उम्मीदों से कमतर बताया.

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बजट प्रस्तुति को लेकर नाराजगी जताई. उनका कहना था कि करीब 90 मिनट के भाषण के बावजूद सरकार प्रमुख योजनाओं के लिए किए गए आवंटन की स्पष्ट जानकारी देने में सफल नहीं रही. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि बजट का प्रचार जितना बड़ा था, प्रस्तुति उतनी प्रभावी नहीं रही.

उनके अनुसार भाषण में कई अहम योजनाओं का जिक्र तो हुआ, लेकिन उनके लिए कितनी राशि तय की गई है, इस पर साफ तस्वीर सामने नहीं आई. उन्होंने बजट को “नीरस” बताते हुए कहा कि दस्तावेजों का विस्तार से अध्ययन करने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट होगी.

विपक्ष का तीखा हमला

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने भी बजट को लेकर अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि उन्हें मौजूदा सरकार से बहुत अधिक उम्मीद नहीं थी. उनका संकेत इस ओर था कि बजट में आम जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने वाला ठोस संदेश नजर नहीं आया.

वहीं, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बजट को लेकर और सख्त टिप्पणी की. उन्होंने आरोप लगाया कि यह बजट केवल एक छोटे वर्ग को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. उनके मुताबिक, सरकार की नीतियां सीमित लोगों को लाभ पहुंचाने वाली हैं. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या सरकार ने अपने चुनावी वादों को पूरा किया है. उनका कहना था कि आम जनता की परेशानियों का समाधान इस बजट में साफ तौर पर दिखाई नहीं देता.

सरकार का पक्ष

इससे पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपना लगातार नौवां बजट पेश करते हुए कहा था कि सरकार का उद्देश्य आर्थिक विकास को मजबूत बनाए रखना और लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना है. उन्होंने गरीबों, वंचितों और पिछड़े वर्गों को प्राथमिकता देने की बात कही. सीतारमण ने यह भी दोहराया कि सरकार केवल घोषणाओं पर नहीं, बल्कि ठोस सुधारों पर विश्वास करती है. उनके अनुसार भारत लगातार “विकसित भारत” बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.

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