बजट भाषण में चुप्पी, लेकिन सीमा पर सख्ती: पाकिस्तान-चीन चुनौती के बीच रक्षा क्षेत्र को जबरदस्त मजबूती
बजट भाषण में रक्षा नीति पर कोई सीधी घोषणा नहीं हुई, लेकिन आंकड़ों ने साफ कर दिया कि सरकार सीमा सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क है. पाकिस्तान और चीन से बढ़ते खतरे के बीच रक्षा बजट में रिकॉर्ड बढ़ोतरी कर सैन्य ताकत को नई धार दी गई है.

नई दिल्ली: केंद्रीय बजट 2026 में भले ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने भाषण के दौरान रक्षा नीति को लेकर कोई सीधी घोषणा नहीं की, लेकिन बजट के आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि सरकार सैन्य ताकत को लेकर कोई समझौता करने के मूड में नहीं है. पाकिस्तान और चीन से उत्पन्न दोहरे सुरक्षा खतरों के बीच रक्षा क्षेत्र को अब तक की सबसे बड़ी मजबूती दी गई है.
केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए रक्षा बजट में करीब 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी करते हुए इसे 6.81 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 7.85 लाख करोड़ रुपये कर दिया है. खासतौर पर पिछले वर्ष इस्लामाबाद के साथ हुए सीमित संघर्ष के बाद यह बढ़ोतरी सैन्य तैयारियों और आधुनिकीकरण पर मोदी सरकार के निरंतर फोकस को दर्शाती है.
रक्षा पूंजीगत व्यय में 28% की ऐतिहासिक बढ़ोतरी
इस बजट की सबसे बड़ी उपलब्धियों में रक्षा पूंजीगत व्यय में हुई तेज बढ़ोतरी शामिल है. पिछले वर्ष के 1.80 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले इसमें 28 प्रतिशत का इजाफा करते हुए इसे 2.31 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है. यह बढ़ा हुआ निवेश उन्नत हथियार प्रणालियों की खरीद और स्वदेशी रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा देने की सरकार की रणनीति को दर्शाता है.
उन्नत हथियारों और घरेलू निर्माण पर फोकस
बढ़ी हुई पूंजीगत लागत साफ संकेत देती है कि सरकार आधुनिक हथियार प्रणालियों के अधिग्रहण के साथ-साथ घरेलू रक्षा उद्योग को मजबूत करने पर जोर दे रही है. हाल ही में भारत ने फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए 32 लाख करोड़ रुपये के सौदे को मंजूरी दी, जो देश के अब तक के सबसे बड़े फाइटर जेट सौदों में से एक है.
रक्षा रखरखाव को बढ़ावा देने के लिए सीमा शुल्क में राहत
सरकार ने रक्षा इकाइयों के रखरखाव, मरम्मत और जीर्णोद्धार में उपयोग होने वाले पुर्जों के निर्माण के लिए आयातित कच्चे माल पर मूल सीमा शुल्क से छूट देने का भी फैसला किया है. इससे घरेलू रक्षा सप्लाई चेन को मजबूती मिलने की उम्मीद है.
रक्षा बजट बढ़ा, लेकिन जीडीपी में हिस्सेदारी स्थिर
पिछले एक दशक में भारत का रक्षा बजट लगातार बढ़ा है, हालांकि जीडीपी के अनुपात में रक्षा व्यय या तो स्थिर रहा है या उसमें गिरावट आई है. 2025-26 में रक्षा के लिए आवंटित 6.81 लाख करोड़ रुपये जीडीपी का करीब 1.9 प्रतिशत था, जबकि इसी अवधि में पाकिस्तान का रक्षा बजट उसके जीडीपी का लगभग 2.3 प्रतिशत रहा.
एक दशक में तीन गुना से अधिक हुआ रक्षा खर्च
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2015-16 में जहां कुल रक्षा व्यय 2.94 लाख करोड़ रुपये था, वहीं 2025-26 तक यह बढ़कर 7.85 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है. आधुनिकीकरण के लिए अहम माने जाने वाले रक्षा पूंजीगत व्यय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो 2015-16 में 83,614 करोड़ रुपये से बढ़कर अब 2.31 लाख करोड़ रुपये हो गया है.
'मेक इन इंडिया' और आत्मनिर्भर रक्षा नीति को बढ़ावा
इस वर्ष का रक्षा बजट 'मेक इन इंडिया' और रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता पर सरकार के निरंतर जोर को दर्शाता है. पिछले वर्ष के ऑपरेशन सिंदूर के बाद इसकी आवश्यकता और भी स्पष्ट हो गई थी, जिसमें सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमताओं के साथ-साथ आकाश वायु रक्षा प्रणाली और नागास्त्र लोइटरिंग मुनिशन जैसे स्वदेशी हथियारों की प्रभावशीलता सामने आई थी.
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा रक्षा उत्पादन और निर्यात
भारी पूंजी निवेश ऐसे समय में किया गया है जब भारत का रक्षा विनिर्माण रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है. वित्त वर्ष 2024-25 में रक्षा उत्पादन 1.54 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया. वहीं, स्वदेशी रक्षा उत्पादन 2023-24 में रिकॉर्ड 1.27 लाख करोड़ रुपये रहा, जो 2014-15 के 46,429 करोड़ रुपये की तुलना में 174 प्रतिशत अधिक है.
रक्षा निर्यात ने भी छुआ नया शिखर
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का रक्षा निर्यात 23,600 करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया. प्रमुख निर्यातों में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, आकाश एसएएम प्रणाली और पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर शामिल हैं, जिनकी आपूर्ति फ्रांस और आर्मेनिया जैसे देशों को की गई है.


