ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना के आधुनीकरण पर फोकस, रक्षा बजट में 11 फीसदी तक की बढ़ोतरी
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रक्षा मंत्रालय को कुल 7.85 लाख करोड़ रुपये का बजट दिया गया है. बजट में सबसे ज्यादा ध्यान आधुनिकीकरण पर दिया गया है. यह कदम सेना को नई तकनीक, हथियार और उपकरण देने में मदद करेगा.

नई दिल्लीः वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार दोपहर संसद में पेश किए गए केंद्रीय बजट में भारतीय सेना की ताकत बढ़ाने के लिए बड़ा ऐलान किया. वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रक्षा मंत्रालय को कुल 7.85 लाख करोड़ रुपये का बजट दिया गया है. यह पिछले साल के 6.81 लाख करोड़ रुपये से करीब 15 प्रतिशत ज्यादा है. इस बार रक्षा खर्च जीडीपी का लगभग 11 प्रतिशत हो गया है, जबकि पिछले साल यह 8 प्रतिशत के आसपास था.
सेना के आधुनिकीकरण पर खास फोकस
बजट में सबसे ज्यादा ध्यान आधुनिकीकरण पर दिया गया है. इसके लिए पूंजीगत खर्च के तहत 2.19 लाख करोड़ रुपये अलग रखे गए हैं, जो पिछले साल के मुकाबले 21.84 प्रतिशत की बड़ी छलांग है. पिछले साल यह राशि 1.8 लाख करोड़ रुपये थी. इस पूंजीगत बजट में विमान और एयरो इंजन के लिए 63,733 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. नौसेना के बेड़े के लिए भी अच्छी राशि दी गई है. यह कदम सेना को नई तकनीक, हथियार और उपकरण देने में मदद करेगा.
रक्षा सेवाओं के रोजमर्रा के खर्च में भी इजाफा
रक्षा बजट का एक बड़ा हिस्सा राजस्व खर्च पर जाता है, जिसमें सैनिकों का वेतन, गोला-बारूद, ईंधन, मरम्मत और अन्य दिन-प्रतिदिन के काम शामिल होते हैं. इस बार इसमें 17.24 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है. पेंशन के लिए आवंटन 6.53 प्रतिशत बढ़ाकर 1.71 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है. इससे हमारे जवान और उनके परिवारों को बेहतर सुविधा मिलेगी.आत्मनिर्भरता और निर्यात पर जोर
बजट भाषण में वित्त मंत्री ने रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने की बात कही. रक्षा इकाइयों द्वारा रखरखाव, मरम्मत या ओवरहॉल के लिए इस्तेमाल होने वाले विमान पार्ट्स बनाने में लगने वाले आयातित कच्चे माल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी माफ करने का प्रस्ताव रखा गया है. इससे देश में ही पार्ट्स बनाना सस्ता होगा और आयात पर निर्भरता कम होगी. सरकार रक्षा निर्यात से कमाई बढ़ाने पर भी फोकस कर रही है, ताकि आत्मनिर्भर भारत का सपना सच हो.
पाकिस्तान के साथ तनाव के बाद यह बढ़ोतरी
पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान के साथ हुई सैन्य झड़प ने सुरक्षा चुनौतियों को और बढ़ा दिया है. चीन से भी लगातार खतरा बना हुआ है. ऐसे में रक्षा बजट में यह उछाल स्वाभाविक है. सूत्रों के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय ने 20 प्रतिशत बढ़ोतरी की मांग की थी, और बजट में यह उससे भी ज्यादा मिली है. पिछले 26 सालों में रक्षा खर्च 40 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ा है, और पूंजीगत खर्च इसमें अहम भूमिका निभा रहा है.


