EPFO Scheme: सरकार ने लॉन्च की नई योजना, किन कर्मचारियों को मिलेगा फायदा? करना होगा ये काम

केंद्र सरकार ने ईपीएफओ के 73वें स्थापना दिवस पर कर्मचारी नामांकन योजना 2025 लॉन्च की. यह योजना 1 नवंबर 2025 से लागू होगी और उन कर्मचारियों को पीएफ सिस्टम में जोड़ने का लक्ष्य रखती है जो अब तक इससे बाहर थे. कंपनियों को नामांकन पर सिर्फ 100 रुपये जुर्माना देना होगा.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

नई दिल्लीः कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के 73वें स्थापना दिवस के मौके पर केंद्र सरकार ने कर्मचारियों और नियोक्ताओं के लिए एक नई पहल की शुरुआत की है. केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने शनिवार को कर्मचारी नामांकन योजना 2025 (Employee Enrollment Scheme 2025) लॉन्च की. इस योजना का उद्देश्य उन कर्मचारियों को पीएफ (Provident Fund) सिस्टम में शामिल करना है, जो अब तक किसी कारणवश इसके दायरे से बाहर रह गए हैं.

योजना का उद्देश्य

डॉ. मांडविया ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि ईपीएफओ ने भारत में सामाजिक सुरक्षा को सशक्त बनाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है. उन्होंने कहा कि ईपीएफओ केवल एक फंड नहीं है, बल्कि यह भारत के करोड़ों कर्मचारियों और श्रमिकों के भरोसे का प्रतीक है. इस योजना का मकसद न केवल कर्मचारियों को वित्तीय सुरक्षा देना है, बल्कि नियोक्ताओं को भी प्रोत्साहित करना है कि वे पात्र कर्मचारियों को स्वेच्छा से पीएफ प्रणाली में शामिल करें.

कब से लागू होगी योजना और कौन होंगे लाभार्थी?

कर्मचारी नामांकन योजना 2025 को केंद्र सरकार ने 1 नवंबर 2025 से लागू करने का फैसला किया है. यह योजना पूरी तरह स्वैच्छिक (voluntary) होगी. यानी कंपनियों को अपने कर्मचारियों का नामांकन खुद करना होगा. इस योजना का लाभ उन कर्मचारियों को मिलेगा जो 1 जुलाई 2017 से 31 अक्टूबर 2025 के बीच किसी संस्था से जुड़े थे, लेकिन किसी वजह से पीएफ खाते में शामिल नहीं हो पाए.

यह योजना उन कंपनियों पर भी लागू होगी जिन पर ईपीएफ अधिनियम की धारा 7A, स्कीम की धारा 26B या पेंशन स्कीम की धारा 8 के तहत जांच चल रही है. हालांकि, जो कर्मचारी पहले ही कंपनी छोड़ चुके हैं, उनके मामलों में कोई स्वतः कार्रवाई नहीं की जाएगी.

जुर्माने और योगदान से जुड़ी शर्तें

इस स्कीम में सरकार ने कंपनियों को बड़ी राहत दी है. यदि किसी कर्मचारी की सैलरी से पहले पीएफ नहीं काटा गया था, तो उस पर कोई दंड नहीं लगेगा. कंपनियों को केवल अपना हिस्सा (employer’s contribution) जमा करना होगा और इसके साथ सिर्फ 100 रुपये का नाममात्र जुर्माना देना होगा. कर्मचारियों पर पुराने बकाए या ब्याज का बोझ नहीं डाला जाएगा. इससे लाखों कर्मचारियों को औपचारिक श्रम प्रणाली का हिस्सा बनने में मदद मिलेगी.

केंद्रीय मंत्री का संदेश

डॉ. मांडविया ने कहा कि ईपीएफओ को सेवा वितरण में निष्पक्षता, गति और संवेदनशीलता सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि नागरिकों का भरोसा और मजबूत हो. उन्होंने यह भी कहा कि भारत को “विकसित भारत 2047” की दिशा में ले जाने के लिए सामाजिक सुरक्षा में वैश्विक मानक स्थापित करना जरूरी है. उन्होंने एक्स (X) पर लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ईपीएफओ ने देश में सामाजिक सुरक्षा का दायरा व्यापक किया है. सदस्य संतुष्टि ही ईपीएफओ की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए.”

‘जन-केंद्रित संस्था’ के रूप में ईपीएफओ

कार्यक्रम में श्रम एवं रोजगार सचिव वंदना गुरनानी ने ईपीएफओ के विकास की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्था अब केवल अनुपालन तक सीमित नहीं, बल्कि नागरिक-केंद्रित हो चुकी है. उन्होंने कहा कि हर फाइल के पीछे एक समर्पित कर्मचारी, एक परिवार और एक सपना छिपा होता है. सामाजिक सुरक्षा केवल प्रणाली नहीं, बल्कि यह लोगों की गरिमा और विश्वास से जुड़ी हुई है.

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