Gold Silver Live: चार दिन की तेजी पर लगा ब्रेक, सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट
सोने और चांदी की कीमतों में चार दिनों से जारी तेजी पर 24 फरवरी को ब्रेक लग गया. घरेलू वायदा बाजार और अंतरराष्ट्रीय स्पॉट मार्केट में गिरावट दर्ज की गई, जिसकी मुख्य वजह मुनाफावसूली, अमेरिकी टैरिफ संकेत और महंगाई से जुड़े ताजा आंकड़े माने जा रहे हैं.

नई दिल्ली: सोने और चांदी की कीमतों में लगातार चार सत्रों से जारी तेजी पर मंगलवार, 24 फरवरी को विराम लग गया. घरेलू वायदा बाजार से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्पॉट मार्केट तक दोनों कीमती धातुओं में गिरावट दर्ज की गई. पिछले सत्र की मजबूत बढ़त के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिससे कीमतों पर दबाव देखने को मिला.
वैश्विक स्तर पर अमेरिकी व्यापार नीति को लेकर अनिश्चितता, मध्य पूर्व में तनाव और अमेरिका में बढ़ती महंगाई के आंकड़ों ने बाजार की दिशा प्रभावित की है. इन कारकों के चलते निवेशकों की रणनीति में बदलाव आया और सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने-चांदी में भी अस्थायी कमजोरी देखने को मिली.
घरेलू वायदा बाजार में गिरावट
एमसीएक्स पर अप्रैल गोल्ड वायदा 0.50% से अधिक गिरकर ₹1,60,750 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया. वहीं एमसीएक्स सिल्वर अप्रैल वायदा 0.20% फिसलकर ₹2,64,972 प्रति किलोग्राम पर आ गया.
गौरतलब है कि पिछले कारोबारी सत्र में एमसीएक्स गोल्ड अप्रैल वायदा 3% उछलकर ₹1,61,598 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था, जबकि एमसीएक्स सिल्वर मार्च वायदा 5% की तेजी के साथ ₹2,65,333 प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया था.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्या हाल?
एशियाई कारोबार के दौरान स्पॉट गोल्ड में 0.71% की गिरावट दर्ज की गई और यह 5,187 डॉलर प्रति औंस पर आ गया. वहीं स्पॉट सिल्वर 0.32% फिसलकर 86.36 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता नजर आया.
गिरावट की बड़ी वजह क्या?
बाजार में अस्थिरता की प्रमुख वजह अमेरिकी नीति संकेत माने जा रहे हैं. डोनाल्ड ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद टैरिफ बढ़ाकर 15% करने की बात कही है. यह बयान उनके प्रस्तावित पारस्परिक टैरिफ उपायों के खिलाफ आए फैसले के बाद सामने आया.
इसके अलावा मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है. अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता दोबारा शुरू होने की तैयारी की खबरों ने भी बाजार की चाल पर असर डाला है. रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप ने उन आशंकाओं को खारिज किया है जिनमें पेंटागन को लंबे सैन्य अभियान की चुनौतियों को लेकर चिंता जताई गई थी. उन्होंने कूटनीतिक समझौते को प्राथमिकता देने की बात दोहराई है.
महंगाई के आंकड़ों से बढ़ी चिंता
पिछले शुक्रवार जारी आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर में अमेरिका में अंतर्निहित मुद्रास्फीति उम्मीद से ज्यादा बढ़ी है. जनवरी में भी इसके और बढ़ने के संकेत मिले हैं.
ऐसे में फेडरल रिजर्व निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती से बच सकता है. ब्याज दरों का ऊंचा या स्थिर रहना सोने जैसी नॉन-यील्ड संपत्तियों को निवेश के लिहाज से कम आकर्षक बना देता है.
एक्सपर्ट्स की राय और आगे का अनुमान
ब्लूमबर्ग ने लेमन मार्केट्स डेस्क के रिसर्च एनालिस्ट गौरव गर्ग के हवाले से बताया कि सोना-चांदी करेंसी में उतार-चढ़ाव और नीतिगत उम्मीदों जैसे वैश्विक संकेतों के प्रति संवेदनशील बने रहेंगे. उनका कहना है कि फरवरी की शुरुआत में आई तेज उछाल के बावजूद, अभी कीमतों में जो हलचल दिख रही है, वह ट्रेंड में कोई बुनियादी बदलाव नहीं, बल्कि बड़ी आर्थिक खबरों पर निवेशकों की प्रतिक्रिया है. उन्होंने ट्रेडर्स को सलाह दी है कि बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहेगा, इसलिए जोखिम प्रबंधन पर ध्यान देना जरूरी है.
एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर का कहना है कि सोने की कीमतों का तकनीकी नजरिया अभी भी मजबूत है. हालांकि हाल में कुछ गिरावट आई है, लेकिन इसे मुनाफावसूली और कीमतों के सामान्य समायोजन के तौर पर देखा जा रहा है. कीमतें अहम मूविंग एवरेज से ऊपर बनी हुई हैं, जो मजबूती का संकेत है. 4,650-4,800 डॉलर के बीच मजबूत खरीदारी देखी जा रही है. अगर यह जारी रहती है और कीमतें 5,200-5,300 डॉलर के स्तर को पार कर जाती हैं, तो नई तेजी आ सकती है और रिकॉर्ड ऊंचाइ को छूना संभव होगा.
चांदी पर क्या रणनीति अपनाएं?
पोनमुडी के अनुसार, बड़ी टाइमफ्रेम पर चांदी की संरचना मजबूत बनी हुई है. कीमतें प्रमुख मूविंग एवरेज से ऊपर निकल चुकी हैं, जो पिछले सुधार चरण से बाहर आकर नए तेजी वाले ढांचे की ओर संकेत करती हैं.
70-75 डॉलर के दायरे में मजबूत खरीदारी देखी जा रही है. यदि कीमतें 92-96 डॉलर के स्तर को पार कर बंद होती हैं, तो यह 100-105 डॉलर और पुराने रिकॉर्ड हाई तक पहुंचने का रास्ता खोल सकती हैं. मिड से लॉन्ग टर्म परिदृश्य सकारात्मक बना हुआ है, जिसे मजबूत औद्योगिक मांग और आपूर्ति की कमी का समर्थन मिल रहा है.


