3 लाख रुपये किलो हुई चांदी, निवेशकों को 9 महीने में 200% से ज्यादा का फायदा
चांदी की कीमत MCX पर 3 लाख रुपये प्रति किलो पार कर गई, पिछले नौ महीनों में 200% से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज हुई. इस तेजी के पीछे अमेरिका और यूरोप के बीच बढ़ता आर्थिक तनाव और निवेशकों का सुरक्षित संपत्ति की ओर रुझान मुख्य कारण हैं.

भारतीय वायदा बाजार (MCX) पर चांदी की कीमत ने ऐतिहासिक उछाल दिखाते हुए 3 लाख रुपये प्रति किलो के पार कर लिया है. अप्रैल 2025 में जब चांदी लगभग 95-96 हजार रुपये प्रति किलो पर थी, तब से अब यह मूल्य लगभग तीन गुना बढ़ गया है और 3,00,532 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुका है. इस तेज बढ़त का कारण केवल घरेलू मांग नहीं है, बल्कि अमेरिका और यूरोप के बीच बढ़ते आर्थिक तनाव और संभावित व्यापार युद्ध को माना जा रहा है.
चांदी में निवेश करने पर शानदार रिटर्न
पिछले नौ महीनों में चांदी में निवेश करने वाले लोगों को शानदार रिटर्न मिला है. अप्रैल 2025 से अब तक यह 200 प्रतिशत से अधिक बढ़ चुकी है, जबकि जनवरी 2026 में ही कीमतों में लगभग 25 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया. विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा समय में चांदी निवेश के लिहाज से शेयर या रियल एस्टेट जैसे अन्य एसेट क्लास से बेहतर प्रदर्शन कर रही है.
इस उछाल के पीछे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की महत्वाकांक्षी योजनाएं भी हैं. ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जा करना चाहते हैं और जिन यूरोपीय देशों ने उनका विरोध किया, उन पर अब अमेरिका 10% से शुरू होकर जून तक 25% तक टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है. ट्रेड युद्ध की संभावना निवेशकों को सुरक्षित संपत्ति की ओर धकेल रही है और सोने-चांदी जैसी धातुओं में भारी मांग बढ़ रही है.
यूरोपीय यूनियन भी खामोश नहीं बैठ रही है. फ्रांस, जर्मनी और अन्य यूरोपीय देश अमेरिका के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की योजना बना रहे हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार यूरोप अमेरिकी माल पर करीब 93 अरब यूरो (108 अरब डॉलर) का जवाबी टैक्स लगाने की तैयारी कर रहा है.
ग्लोबल मार्केट पर इसका असर भी दिखाई दे रहा है. सिंगापुर में स्पॉट गोल्ड 1.6% बढ़कर 4,668 डॉलर प्रति औंस और चांदी 93 डॉलर के पार पहुंच गई है. प्लैटिनम और पैलेडियम जैसी धातुओं में भी तेजी देखी जा रही है.
विशेषज्ञों का क्या मानना है?
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी विदेश नीति और फेडरल रिजर्व पर ट्रंप प्रशासन के हमलों ने डॉलर पर निवेशकों का भरोसा कमजोर किया है. इसे ‘डिबेसमेंट ट्रेड’ कहा जा रहा है, जिसमें निवेशक सरकारी बॉन्ड और करेंसी से दूर होकर कीमती धातुओं में पैसा लगा रहे हैं. ग्रीनलैंड विवाद और भू-राजनीतिक तनाव के चलते आने वाले दिनों में चांदी और सोने के भाव और भी नए रिकॉर्ड छू सकते हैं.


