पूरी फौज के बराबर है अमेरिका का एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन, जिससे US-इजरायल ने किया ईरान पर अटैक
अमेरिका ने अपने शक्तिशाली एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन को मध्य-पूर्व में तैनात कर ईरान के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है. इजरायल के समर्थन और बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच इस सैन्य तैनाती ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है.

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने अपना शक्तिशाली एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन तैनात कर दिया है. जानकारी के मुताबिक, इसी कैरियर से ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की गई है. यह जहाज कुछ हफ्ते पहले दक्षिण चीन सागर से पश्चिम एशिया पहुंचा था.
अमेरिका का कहना है कि ईरान के साथ हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं, इसलिए क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति को मजबूत किया गया है. इजरायल के समर्थन और ईरान की गतिविधियों को रोकने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया ऐसा बताया जा रहा है.
क्या अमेरिका ने ईरान पर हमला शुरू कर दिया है?
रिपोर्ट्स के अनुसार, USS अब्राहम लिंकन से ईरान के खिलाफ ऑपरेशन शुरू किया गया है. यह कार्रवाई इजरायल की मदद और क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन बनाए रखने के लिए की जा रही है.
क्या है USS अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप?
यह अमेरिकी नौसेना का एक शक्तिशाली युद्ध समूह है, जिसे Carrier Strike Group 3 (CSG-3) के नाम से जाना जाता है. इस समूह का नेतृत्व न्यूक्लियर पावर से चलने वाला एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन करता है. विशेषज्ञों के अनुसार, यह समूह अकेले ही एक बड़ी सैन्य ताकत के बराबर क्षमता रखता है.
कितने जहाज और पनडुब्बियां शामिल?
इस स्ट्राइक ग्रुप में आमतौर पर शामिल होते हैं
- 1 न्यूक्लियर एयरक्राफ्ट कैरियर (1 लाख टन से अधिक वजन)
- 3-4 गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर (Arleigh Burke क्लास)
- 1 क्रूजर (कभी-कभी)
- 1-2 न्यूक्लियर अटैक पनडुब्बियां
- 1-2 सपोर्ट जहाज (ईंधन और हथियार आपूर्ति के लिए)
- कुल मिलाकर 7 से 10 जहाज और पनडुब्बियां इस ग्रुप का हिस्सा हो सकती हैं.
कितनी सैन्य ताकत मौजूद?
- इस समूह में लगभग 7000-8000 सैनिक और मरीन तैनात रहते हैं.
- करीब 65-70 लड़ाकू विमान शामिल होते हैं, जिनमें:
- F/A-18 Super Hornet
- F-35C स्टील्थ फाइटर
- E-2D Hawkeye
- MH-60 हेलीकॉप्टर
- EA-18G Growler
हथियारों की क्षमता कितनी?
- सैकड़ों टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें
- हवा से हवा और हवा से जमीन मार करने वाली मिसाइलें
- भारी बम और गोला-बारूद
- समुद्री हमलों से रक्षा करने वाली डिफेंस मिसाइलें
- कैरियर न्यूक्लियर पावर से संचालित होता है, जबकि इसके हथियार पारंपरिक हैं.
संभावित असर और आगे की स्थिति
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह की तैनाती से ईरान को भारी नुकसान हो सकता है. रोजाना 100-150 हवाई हमले संभव बताए जाते हैं. हालांकि, ईरान के पास भी बैलिस्टिक मिसाइलें, ड्रोन और सहयोगी गुट मौजूद हैं, जो जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं.
यदि हालात और बिगड़ते हैं, तो पूरे मिडिल ईस्ट में व्यापक संघर्ष की आशंका है, जिसका असर वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पड़ सकता है.


