इजरायली हमले के बाद ईरान का पलटवार शुरू... जानें ईरान-इजरायल युद्ध के ये बड़े अपडेट
इजरायल ने ‘शील्ड ऑफ जूदा’ ऑपरेशन के तहत ईरान पर मिसाइल हमला किया, जिसके बाद तेहरान में धमाके गूंजे. दोनों देशों ने एयरस्पेस बंद कर दिया है. खामेनेई को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है और क्षेत्र में तनाव चरम पर है.

नई दिल्ली: तेहरान की सड़कों पर गूंजते धमाके और इजरायल में बजते सायरन ने मध्य पूर्व को एक बार फिर युद्ध के मुहाने पर ला खड़ा किया है. कई दिनों से बढ़ रहा तनाव आखिरकार खुली सैन्य कार्रवाई में बदल गया है. इजरायल ने ईरान पर जवाबी मिसाइल हमला किया, जिसके बाद तेहरान के अलग-अलग हिस्सों से तेज धमाकों और धुएं के उठने की खबरें आने लगीं.
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राजधानी तेहरान के यूनिवर्सिटी स्ट्रीट और जोम्हूरी इलाके में मिसाइलें गिरने की बात कही जा रही है. डाउनटाउन इलाके की पाश्चर स्ट्रीट के आसपास घना धुआं देखा गया. हमलों के बाद शहर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और कई इलाकों में मोबाइल सेवाएं भी बंद हो गईं. वहीं, अब ईरान ने भी इजरायल पर जवाबी हमले शुरू कर दिये हैं. उत्तरी इजराइल में धमाकों की आवाजें गूंज रही हैं. ईरान से आने वाली मिसाइलों को रोकने के प्रयास किए जा रहे है.
खामेनेई को पहुंचाया गया सुरक्षित स्थान पर
सूत्रों के मुताबिक, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को एहतियात के तौर पर एक सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया है. हालांकि उनके सटीक ठिकाने की जानकारी साझा नहीं की गई है. माना जा रहा है कि इजरायल के निशाने पर ईरान के बड़े सैन्य ठिकाने और शीर्ष नेता हो सकते हैं.
दोनों देशों ने बंद किया एयरस्पेस
हमलों के बाद ईरान और इजरायल ने अपने-अपने हवाई क्षेत्र बंद कर दिए हैं. इससे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर असर पड़ सकता है और नागरिक विमानों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मिसाइलों का आदान-प्रदान जारी रहा तो स्थिति और गंभीर हो सकती है.
इजरायल में हाई अलर्ट और आपातकाल
इजरायल के रक्षा मंत्री ने पुष्टि की है कि देश ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई की है और राष्ट्रीय आपातकाल लागू कर दिया गया है. इजरायली सेना ने नागरिकों को सुरक्षित स्थानों के पास रहने की सलाह दी है. पूरे देश में सायरन बजाकर लोगों को संभावित मिसाइल हमलों के लिए सतर्क किया गया. सेना का कहना है कि यह अभियान कई दिनों तक चल सकता है और इसकी तैयारी पहले से की जा रही थी.
अमेरिका की भूमिका पर चर्चा तेज
इस संघर्ष के बीच अमेरिका की भूमिका को लेकर भी अटकलें तेज हो गई हैं. हाल के दिनों में इजरायल के बेन गुरियन एयरपोर्ट पर अमेरिकी रिफ्यूलिंग टैंकर और सैन्य विमान देखे गए थे. रिपोर्ट्स में बताया गया कि कई एफ-22 स्टील्थ फाइटर जेट दक्षिणी इजरायल के ओवडा एयरबेस पर उतरे हैं.
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स का दावा है कि अमेरिका ने इस अभियान में इजरायल का समर्थन किया है. उत्तरी तट की ओर बढ़ रहे अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड का भी जिक्र किया जा रहा है, जो क्षेत्र में सैन्य मौजूदगी को मजबूत करता है.
‘शील्ड ऑफ जूदा’ नाम से चल रहा ऑपरेशन
इजरायल ने अपने इस अभियान को ‘शील्ड ऑफ जूदा’ नाम दिया है. खबरों के मुताबिक, ईरान में करीब 30 जगहों को निशाना बनाया गया. शुरुआती हमलों में खुफिया एजेंसियों की इमारतों, एयरपोर्ट, राष्ट्रपति भवन और कुछ रिहायशी इलाकों को भी नुकसान पहुंचने की सूचना है.


