नेशनल अवॉर्ड विजेता सलीम कुमार का निधन, 56 की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा
मलयालम सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता सलीम कुमार का 56 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. सलीम कुमार पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे. शनिवार को उनकी तबीयत ज्यादा खराब होने के चलते उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था.

नई दिल्ली: मलयालम सिनेमा से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है. अपने शानदार अभिनय और बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाने वाले अभिनेता सलीम कुमार अब इस दुनिया में नहीं रहे. 56 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया, जिससे फिल्म जगत और उनके लाखों प्रशंसकों के बीच शोक की लहर दौड़ गई है. उनके जाने को मलयालम फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है.
जानकारी के अनुसार, सलीम कुमार पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे. शनिवार को उनकी तबीयत अचानक ज्यादा खराब हो गई, जिसके बाद उन्हें कोच्चि के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया. डॉक्टरों ने उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा था, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका.
राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेता थे सलीम कुमार
सलीम कुमार ने अपने करियर में कई यादगार किरदार निभाए, लेकिन साल 2010 में आई फिल्म ‘अदमिंते मकान अबू’ ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान दिलाई. इस फिल्म में उनके दमदार अभिनय के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था. इसके अलावा उन्हें चार बार केरल राज्य फिल्म पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया. अभिनय के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और विविध भूमिकाओं को निभाने की क्षमता ने उन्हें मलयालम सिनेमा के सबसे सम्मानित कलाकारों में शामिल कर दिया था. उनके परिवार की बात करें तो उनके बेटे चंदू सलीम कुमार भी अभिनय की दुनिया से जुड़े हुए हैं और फिल्मों में सक्रिय हैं.
कॉमेडी के जरिए बनाई खास पहचान
सलीम कुमार को सबसे ज्यादा लोकप्रियता उनके कॉमेडी किरदारों से मिली. उन्होंने मलयालम सिनेमा की कई सुपरहिट कॉमेडी फिल्मों में काम किया और अपनी अनोखी शैली से दर्शकों को खूब हंसाया. उनके संवाद और कॉमिक सीन इतने लोकप्रिय हुए कि आज भी मलयाली समाज में रोजमर्रा की बातचीत में उनके डायलॉग्स का इस्तेमाल किया जाता है. उनकी कॉमेडी का अंदाज बिल्कुल अलग था, जिसने उन्हें दर्शकों के बीच बेहद खास बना दिया.
थिएटर और मिमिक्री से शुरू हुआ सफर
फिल्मों में आने से पहले सलीम कुमार थिएटर और मिमिक्री की दुनिया से जुड़े रहे. मंच पर उनके प्रदर्शन ने उन्हें पहचान दिलाई और यहीं से उनके अभिनय करियर की मजबूत नींव रखी गई. साल 1997 में उन्होंने फिल्मी दुनिया में कदम रखा और इसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. उन्होंने सिर्फ हास्य भूमिकाएं ही नहीं निभाईं, बल्कि कई गंभीर और भावनात्मक किरदारों में भी अपनी प्रतिभा साबित की.
कई यादगार फिल्मों का रहे हिस्सा
सलीम कुमार ने अपने लंबे करियर में 300 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया. उनकी लोकप्रिय फिल्मों में ‘सी.आई.डी. मूसा’ और ‘पुलिवाल कल्याणम’ जैसी फिल्में शामिल हैं, जिन्हें दर्शकों ने खूब पसंद किया. इन फिल्मों की लोकप्रियता सिर्फ केरल तक सीमित नहीं रही. हिंदी डबिंग, टेलीविजन प्रसारण और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए उत्तर भारत के दर्शकों ने भी उनके काम को सराहा. फिल्म ‘अचनुरंगथा वीडू’ में उन्होंने अपनी कॉमेडियन वाली छवि से अलग हटकर गंभीर अभिनय किया था, जिसे समीक्षकों और दर्शकों दोनों ने काफी पसंद किया.
निर्देशन में भी आजमाया हाथ
अभिनय के साथ-साथ सलीम कुमार ने निर्देशन के क्षेत्र में भी कदम रखा. उन्होंने कई परियोजनाओं का निर्देशन किया और रचनात्मक रूप से फिल्म निर्माण में भी अपनी भूमिका निभाई. उनका बहुआयामी व्यक्तित्व ही उन्हें अपने दौर के अन्य कलाकारों से अलग बनाता था. अभिनय, हास्य, निर्देशन और मंचीय प्रस्तुति- हर क्षेत्र में उन्होंने अपनी अलग छाप छोड़ी.
राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर भी रखते थे राय
सलीम कुमार सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं थे. वे सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर भी खुलकर अपनी राय रखते थे. उन्हें कांग्रेस पार्टी का समर्थक माना जाता था. स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बावजूद उन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ के समर्थन में सक्रिय प्रचार किया था. वे कई मौकों पर पार्टी नेताओं के साथ भी दिखाई दिए और राज्य की राजनीति पर अपनी स्पष्ट राय रखते थे.


