AAP को दिल्ली में मिली हार, अब क्या होगा केजरीवाल का सियासी भविष्य?
दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को करारी हार झेलनी पड़ी है. सत्ताधारी दल को 70 में से केवल 22 सीटों पर जीत मिली है. चुनाव में बीजेपी आम आदमी पार्टी को सत्ता से हटाने में सफल हो गई है. बीजेपी को 48 सीटों पर जीत मिली है. चुनाव में केजरीवाल समेत आम आदमी पार्टी के कई बड़े चेहरों को हार का सामना करना पड़ा है. इस हार के साथ ही अब अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के भविष्य पर सवाल खड़े होने लगे हैं.

दिल्ली के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) को बड़ी हार का सामना करना पड़ा है. न केवल पार्टी ने सत्ता गंवाई, बल्कि पार्टी के प्रमुख नेता अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया भी अपनी-अपनी सीटें हार गए हैं. अरविंद केजरीवाल ने अन्ना आंदोलन से सियासत में कदम रखा था और अपनी पार्टी के साथ पहले ही चुनावी मुकाबले में बड़ी सफलता हासिल की थी. लेकिन इस बार दिल्ली की सियासत में वे अपनी पकड़ बनाए रखने में नाकाम रहे हैं.
आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की सत्ता में 11 साल तक राज किया, लेकिन इस बार पार्टी केवल 22 सीटों पर सिमट गई. वहीं बीजेपी ने 48 सीटें जीतकर 27 साल बाद सत्ता में वापसी की है. इस हार ने केजरीवाल के दिल्ली विकास मॉडल पर सवाल खड़े कर दिए हैं, और पार्टी के राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार की योजनाओं को भी झटका लगा है.
AAP को दिल्ली की सियासत में मिली हार
अब, आम आदमी पार्टी विपक्ष में बैठने वाली है. 27 साल बाद बीजेपी सत्ता में आ गई है और आम आदमी पार्टी को विपक्ष में बैठने का अनुभव पहली बार होगा. विधानसभा में केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और सौरभ भारद्वाज जैसे दिग्गज नेता हार गए हैं, और अब यह देखना होगा कि पार्टी के भीतर विपक्षी नेता कौन बनेगा और पार्टी किस तरह से सरकार के खिलाफ आवाज उठाएगी.
अब क्या होगा केजरीवाल का सियासी भविष्य?
आम आदमी पार्टी के लिए अब चुनौती यह है कि वह कैसे विपक्ष में रहते हुए अपना संगठन और राजनीति बचाए रखेगी. पार्टी का गठन अन्ना आंदोलन से हुआ था, और इसके नेता भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने के लिए सियासत में आए थे. लेकिन अब भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना करते हुए पार्टी को खुद अपनी छवि सुधारने की जरूरत होगी.
क्या फिर से उभर पाएगी पार्टी?
अरविंद केजरीवाल का खुद चुनाव हारना एक बड़ा झटका है और इससे उनके सियासी भविष्य पर भी सवाल उठ रहे हैं. दिल्ली के चुनाव परिणामों का असर पंजाब और अन्य राज्यों में पार्टी के विस्तार पर भी पड़ेगा. पार्टी के नेतृत्व पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं, और शराब नीति मामले में उनके खिलाफ कानूनी चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं.
क्या केजरीवाल और AAP का राष्ट्रीय विस्तार थमेगा?
अब देखना यह होगा कि आम आदमी पार्टी सत्ता से बाहर रहते हुए अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं को पार्टी से जुड़े रखेगी या नहीं. दिल्ली में हारने के बाद पार्टी को राष्ट्रीय राजनीति में अपनी स्थिति बनाए रखने में कठिनाइयां आ सकती हैं.


