सरकार का बड़ा फैसला, 23 मार्च से हटेगी हवाई किरायों की सीमा, अब बाजार तय करेगा दाम

सरकार ने दिसंबर 2025 में लगाए गए घरेलू हवाई किरायों पर अस्थायी कैप को 23 मार्च 2026 से हटाने का फैसला किया, क्योंकि अब विमानन क्षेत्र में स्थिति सामान्य हो गई है. इस फैसले से एयरलाइंस को राहत मिलेगी, लेकिन अब किराए बाजार के हिसाब से तय होंगे, जिससे यात्रियों को उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

केंद्र सरकार ने दिसंबर 2025 में उत्पन्न उड़ान व्यवधान के बाद घरेलू हवाई किरायों पर लगाई गई अस्थायी सीमा को हटाने का फैसला किया है. यह कदम विमानन क्षेत्र में हालात सामान्य होने और परिचालन स्थिरता लौटने के बाद उठाया गया है, जिससे अब किराए फिर से बाजार के आधार पर तय किए जा सकेंगे.

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने क्या कहा?

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने जारी आदेश में स्पष्ट किया कि 6 दिसंबर 2025 को लागू की गई किराया सीमा का उद्देश्य उस समय टिकटों की कीमतों में हो रही असामान्य बढ़ोतरी को नियंत्रित करना और सीमित उड़ान क्षमता के बीच यात्रियों के हितों की रक्षा करना था. उस दौरान बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द होने से स्थिति बिगड़ गई थी और यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा था.

मंत्रालय के अनुसार अब स्थिति में सुधार हो चुका है. उड़ानों की संख्या पहले की तरह बहाल हो गई है और पूरे विमानन क्षेत्र में कामकाज सामान्य रूप से चल रहा है. इसी के मद्देनज़र समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया गया कि 23 मार्च 2026 से किराया सीमा को समाप्त कर दिया जाएगा.

दरअसल, दिसंबर 2025 में इंडिगो की कई उड़ानें रद्द होने के कारण पूरे देश में हवाई यात्रा प्रभावित हुई थी. इस अव्यवस्था के चलते टिकटों की कीमतों में अचानक भारी उछाल देखा गया था. इसे नियंत्रित करने के लिए सरकार ने दूरी के आधार पर किराए की अधिकतम सीमा तय की थी, जिसमें एकतरफा यात्रा के लिए ऊपरी सीमा 18,000 रुपये रखी गई थी.

जेट ईंधन की कीमतों में तेजी

हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के चलते जेट ईंधन की कीमतों में भी तेजी आई है. इस वजह से इंडिगो, एयर इंडिया और स्पाइसजेट जैसी प्रमुख एयरलाइनों के प्रतिनिधियों ने सरकार से अनुरोध किया था कि किराया सीमा को जल्द हटाया जाए. उनका कहना था कि यदि यह प्रतिबंध जारी रहा, तो उन्हें कुछ मार्ग बंद करने पड़ सकते हैं और अपने बेड़े तथा नेटवर्क विस्तार की योजनाओं को टालना पड़ सकता है.

हालांकि अब परिचालन संबंधी संकट काफी हद तक समाप्त हो चुका है, लेकिन एयरलाइनों का तर्क था कि बिना स्पष्ट समयसीमा के लगाए गए ये प्रतिबंध उनके राजस्व पर नकारात्मक असर डाल रहे थे. ऐसे में सरकार का यह फैसला विमानन कंपनियों के लिए राहत भरा माना जा रहा है, जबकि यात्रियों के लिए इसका असर आने वाले समय में किरायों के उतार-चढ़ाव के रूप में देखने को मिल सकता है.

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