असम में एनडीए उम्मीदवार का समर्थन करने पर एआईयूडीएफ ने 2 विधायकों को किया निलंबित

ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में अपने दो विधायकों सहित तीन नेताओं को छह साल के लिए निलंबित कर दिया है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

असम की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले हलचल तेज हो गई है. इसी बीच ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में अपने दो विधायकों सहित तीन नेताओं को छह साल के लिए निलंबित कर दिया है. इन नेताओं पर आरोप है कि वे असम गण परिषद में शामिल होने की तैयारी कर रहे थे. 

किन नेताओं पर हुई कार्रवाई?

जिन नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की गई है उनमें अब्दुल अजीज, सहबुल इस्लाम चौधरी और करीम उद्दीन बरभुइया शामिल हैं. करीम उद्दीन बरभुइया पार्टी के उपाध्यक्ष भी थे और श्रीभूमि विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं, जबकि अब्दुल अजीज बदरपुर से विधायक हैं. 

पार्टी नेतृत्व का कहना है कि इन नेताओं की गतिविधियां संगठन के हितों के खिलाफ थीं और उन्हें दूसरी पार्टी में जाने की तैयारी करते हुए पाया गया, जिसके चलते अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें छह साल के लिए निलंबित कर दिया गया.

इस घटनाक्रम के साथ ही राज्यसभा चुनाव को लेकर भी असम की राजनीति गरमा गई है. आरोप है कि एआईयूडीएफ के कुछ नेताओं ने एनडीए समर्थित उम्मीदवार और यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल के प्रमुख प्रमोद बोरो के समर्थन में नामांकन पत्रों पर हस्ताक्षर किए. इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने एआईयूडीएफ पर सवाल उठाए हैं.

असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई का दावा 

असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने दावा किया कि राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने राज्यसभा चुनाव के लिए एआईयूडीएफ से समर्थन मांगा है. गोगोई का कहना है कि यह कदम भाजपा की सत्ता-केंद्रित राजनीति को दर्शाता है. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर भाजपा एआईयूडीएफ को राज्य के लिए खतरा बताती रही है तो फिर अपने उम्मीदवार की जीत के लिए उसी पार्टी का समर्थन क्यों मांगा जा रहा है.

इस पूरे मामले को लेकर एआईयूडीएफ और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है. एआईयूडीएफ का कहना है कि कई मौकों पर उसने कांग्रेस का साथ दिया, लेकिन बदले में कांग्रेस ने समय आने पर सहयोग नहीं किया.

एआईयूडीएफ विधायक रफीकुल इस्लाम ने कहा कि राज्यसभा की तीन सीटें खाली थीं और दोनों दल मिलकर तीसरी सीट के लिए साझा उम्मीदवार उतार सकते थे. उन्होंने बताया कि इस संबंध में कांग्रेस नेताओं को पत्र लिखकर समर्थन भी मांगा गया था, लेकिन पार्टी की ओर से कोई जवाब नहीं मिला. उनके अनुसार, एआईयूडीएफ ने हमेशा कांग्रेस का समर्थन किया, लेकिन कांग्रेस ने वादा निभाने में दिलचस्पी नहीं दिखाई.

इस घटनाक्रम के बाद असम की राजनीति में नए समीकरण बनने की चर्चा तेज हो गई है. खासकर तब जब राज्य में विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं.

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