पाकिस्तान से रिश्ते बढ़ाकर बड़ी गलती कर रहा अमेरिका, लंबी नहीं चल पाएगी दोस्ती...भारत के पूर्व डिप्लोमेट का बड़ा दावा

पूर्व भारतीय राजनयिक विकास स्वरूप ने अमेरिका की पाकिस्तान के साथ बढ़ती नजदीकी को रणनीतिक गलती करार दिया, क्योंकि पाकिस्तान चीन के करीबी संबंधों में है. उन्होंने भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और अमेरिका की टैरिफ़ नीतियों पर भी टिप्पणी की. स्वरूप ने ट्रम्प की शांति-स्थापक छवि को आलोचना करते हुए कहा कि उनका लक्ष्य नोबेल शांति पुरस्कार प्राप्त करना है. पाकिस्तान की न्यूक्लियर ब्लैकमेलिंग की रणनीति पर भी उन्होंने विचार व्यक्त किए.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

Vikas Swarup statement on US-Pakistan : भारत के पूर्व राजनयिक विकास स्वरूप ने कहा कि अमेरिका ने पाकिस्तान के साथ संबंधों में नज़दीकी बढ़ाकर एक बड़ी रणनीतिक गलती की है, क्योंकि पाकिस्तान चीन के करीबी रिश्तों में है और चीन अमेरिका का रणनीतिक प्रतिस्पर्धी है. स्वरूप का मानना है कि यह कदम अमेरिका के लिए फायदेमंद नहीं हो सकता, खासकर जब चीन जैसे शक्तिशाली प्रतिद्वंद्वी से संबंधों को ध्यान में रखा जाए. उन्होंने यह बात एक मीडिया चैनल से बातचीत करते हुए कही.

भारत का सिद्धांत 1950 के दशक से कायम रहा...

बता दें कि विकास स्वरूप ने भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को उसकी विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि भारत का यह सिद्धांत 1950 के दशक से कायम रहा है. उनका मानना है कि कोई भी सरकार दिल्ली में इस स्वायत्तता को कमजोर नहीं कर सकती, चाहे परिस्थिति कैसी भी हो. स्वरूप ने यह बयान भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव को लेकर दिया, विशेष रूप से जब अमेरिका ने भारत पर उच्चतम शुल्क लगाए हैं.

ट्रम्प और उनकी शांति-स्थापक छवि पर टिप्पणी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा की गई सीजफायर संबंधी दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वरूप ने कहा कि ट्रम्प अब शांति-स्थापक की छवि बनाने में जुटे हुए हैं. उनका मानना है कि ट्रम्प ने कई संघर्षों में मध्यस्थता की है, जैसे थाईलैंड और कंबोडिया, रवांडा और कांगो, और आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच. ट्रम्प को लगता है कि भारत-पाकिस्तान के बीच शांति स्थापित करना उनके सबसे बड़े हस्तक्षेपों में से एक है, क्योंकि दोनों देश परमाणु शक्ति संपन्न हैं. स्वरूप ने यह भी कहा कि ट्रम्प को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए इस मध्यस्थता का श्रेय मिलने की उम्मीद है.

अमेरिका के टैरिफ नीति पर आलोचना
स्वरूप ने अमेरिका की टैरिफ़ नीति पर भी टिप्पणी की और कहा कि अमेरिका अब टैरिफ किंग बन गया है, क्योंकि उसकी औसत टैरिफ़ दर 18.4 प्रतिशत हो गई है. इससे पहले अमेरिका ने भारत को 'टैरिफ किंग' कहा था, लेकिन अब खुद अमेरिका इस स्थिति में है. उनका कहना था कि टैरिफ़ से अमेरिकी सरकार को अरबों डॉलर की आय हो सकती है, लेकिन अंत में यह बोझ अमेरिकी उपभोक्ताओं पर पड़ेगा, जिससे महंगाई बढ़ेगी और उत्पाद महंगे होंगे.

इंडस वाटर ट्रीटी पर भारत के निर्णय पर PAK की चिंता
भारत द्वारा इंडस वाटर ट्रीटी को निलंबित करने के फैसले पर स्वरूप ने कहा कि पाकिस्तान इस निर्णय से काफी विचलित हो गया है, क्योंकि वह इन नदियों के पानी पर भारी निर्भर है. स्वरूप ने पाकिस्तान के आंतरिक राजनीतिक वातावरण पर भी टिप्पणी की और कहा कि पाकिस्तान हमेशा भारत और पाकिस्तान के बीच न्यूक्लियर युद्ध का भय उत्पन्न करने की कोशिश करता है, ताकि अंतर्राष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया जा सके. पाकिस्तान जानबूझकर न्यूक्लियर ब्लैकमेल कर रहा है, जिससे दुनिया का ध्यान उसकी ओर जाए.

विकास स्वरूप ने अमेरिकी नीतियों, भारत के दृष्टिकोण और पाकिस्तान के रणनीतिक खेल पर एक महत्वपूर्ण चर्चा की. उनका मानना है कि भारत को अपनी स्वायत्तता बनाए रखने और अपनी विदेश नीति को मजबूती से आगे बढ़ाने की जरूरत है, ताकि उसे वैश्विक स्तर पर सम्मान और अधिकार मिल सके.

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