पर्दे के पीछे से सत्ता के केंद्र तक, सुनेत्रा पवार की सियासी एंट्री

सुनेत्रा पवार अब केवल पवार परिवार की 'वहिनी' नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में एक उभरती और प्रभावशाली शक्ति के रूप में देखी जा रही हैं.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

महाराष्ट्र की राजनीति में ‘पवार’ नाम आते ही सत्ता, रणनीति और प्रभाव का पूरा अध्याय सामने आ जाता है. अब तक इस उपनाम से जुड़े चर्चित चेहरों में शरद पवार या अजित पवार जैसे दिग्गज रहे हैं, लेकिन मौजूदा सियासी हालात में पवार परिवार की एक ऐसी सदस्य सुर्खियों में है, जो वर्षों तक पर्दे के पीछे रहकर राजनीति को बेहद करीब से देखती रही हैं. यह नाम है राज्यसभा सांसद सुनेत्रा अजित पवार का. 

उभरती राजनीतिक ताकत के रूप में देखी जा रहीं सुनेत्रा पवार

अजित पवार के इर्द-गिर्द खड़े राजनीतिक संकट और नेतृत्व के संभावित बदलाव के बीच सुनेत्रा पवार अब केवल ‘वहिनी’ नहीं, बल्कि एक उभरती राजनीतिक ताकत के रूप में देखी जा रही हैं. अजित पवार गुट के भीतर उनके नेतृत्व को लेकर स्वीकार्यता बढ़ती नजर आ रही है.

शैक्षणिक रूप से स्नातक सुनेत्रा पवार का अब तक का संसदीय सफर बहुत आक्रामक नहीं रहा है, लेकिन इसे हल्के में भी नहीं लिया जा सकता. उन्होंने सत्ता और प्रशासन के हर उतार-चढ़ाव को पारिवारिक और व्यावहारिक दोनों स्तरों पर देखा है. दशकों तक पवार परिवार के भीतर नीति निर्माण और राजनीतिक फैसलों की प्रक्रिया का हिस्सा रहने का अनुभव उन्हें अलग पहचान देता है. वे केवल संसद सदस्य नहीं हैं, बल्कि उस प्रभावशाली मंच से जुड़ी रही हैं, जहां राज्य और देश की दिशा तय करने वाले निर्णय लिए जाते हैं.

राज्यसभा की आधिकारिक जानकारी और PRS के आंकड़े उनके कामकाज की दिलचस्प तस्वीर पेश करते हैं. अब तक वे 126 प्रश्न पूछ चुकी हैं, जो राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक है. उनके सवाल खेती, रेलवे परियोजनाओं, पश्चिमी घाट के संरक्षण और नासिक कुंभ 2027 जैसे सीधे जनता से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित रहे हैं. हालांकि, बहसों में उनकी भागीदारी सीमित रही है और सदन में उपस्थिति भी औसत मानी जाती है, जिससे यह संकेत मिलता है कि उन्हें अभी अपनी मुखर राजनीतिक छवि और मजबूत करनी होगी. इसके बावजूद फरवरी 2025 में राज्यसभा के उपसभापतियों के पैनल में उनका नाम शामिल होना उनके बढ़ते राजनीतिक कद को दर्शाता है.

सुनेत्रा पवार की शिक्षा

1963 में उस्मानाबाद (अब धाराशिव) में जन्मीं सुनेत्रा पवार का पालन-पोषण राजनीति से जुड़े परिवार में हुआ. उनके पिता बाजीराव पाटिल स्थानीय राजनीति में सक्रिय रहे और भाई पद्मसिंह पाटिल ने जिले की राजनीति में खास पहचान बनाई. उन्होंने औरंगाबाद के एस.बी. कॉलेज से बी.कॉम किया और आगे चलकर उद्योग, शिक्षा और सामाजिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई. बारामती हाई-टेक टेक्सटाइल पार्क की अगुवाई करते हुए उन्होंने हजारों महिलाओं को रोजगार दिया. विद्या प्रतिष्ठान की ट्रस्टी के रूप में शिक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाली.

सामाजिक मोर्चे पर भी उनकी छवि अपेक्षाकृत साफ रही है. पर्यावरण संरक्षण, जल प्रबंधन और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों पर उनका काम उन्हें अलग पहचान देता है. अब बड़ा सवाल यह है कि क्या सुनेत्रा पवार भविष्य में अपने पति की राजनीतिक विरासत को संभाल पाएंगी. उनके पास संगठन का भरोसा, पारिवारिक पृष्ठभूमि और सामाजिक अनुभव है, लेकिन इस नई भूमिका में उन्हें नीतिगत समझ के साथ-साथ राजनीतिक आक्रामकता और नेतृत्व क्षमता भी साबित करनी होगी. यही आने वाले समय में उनके सियासी भविष्य की असली परीक्षा होगी.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो

close alt tag