भारत में LPG की स्थिति को लेकर सरकार ने दिया अपडेट

पश्चिम एशिया के युद्ध के चलते वैश्विक ऊर्जा संकट बढ़ा है, जिससे भारत में एलपीजी को लेकर चिंता बनी हुई है, हालांकि सप्लाई फिलहाल सामान्य है. सरकार ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए पीएनजी-सीएनजी की ओर शिफ्ट बढ़ाने और वैकल्पिक इंतजामों पर काम तेज किया है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को लगभग तीन सप्ताह हो चुके हैं और इसका असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है. इस संघर्ष के चलते तेल और गैस आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है, जिससे ऊर्जा संकट की आशंका गहराने लगी है. भारत भी इस स्थिति से प्रभावित हुआ है. हालांकि, केंद्र सरकार लगातार लोगों से शांति बनाए रखने की अपील कर रही है और भरोसा दिला रही है कि फिलहाल देश में ऊर्जा आपूर्ति सामान्य बनी हुई है.

एलपीजी को लेकर चिंता 

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, युद्ध के कारण एलपीजी को लेकर चिंता जरूर बनी हुई है, लेकिन देश में इसकी उपलब्धता पर्याप्त है. किसी भी गैस एजेंसी या डिस्ट्रीब्यूटर के स्तर पर कमी की स्थिति सामने नहीं आई है. साथ ही कच्चे तेल का भंडार भी संतोषजनक है, जिससे रिफाइनरी संचालन सुचारू रूप से जारी है. पेट्रोल पंपों पर भी ईंधन की कोई कमी नहीं है और घरेलू पीएनजी तथा वाहनों में इस्तेमाल होने वाली सीएनजी की सप्लाई नियमित रूप से जारी है.

मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने जानकारी दी कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और हर जरूरी कदम उठा रही है. उन्होंने बताया कि लोगों में घबराहट कम करने के लिए लगातार जागरूकता बढ़ाई जा रही है. साथ ही व्यापारिक एलपीजी उपभोक्ताओं से अपील की जा रही है कि वे जहां संभव हो, एलपीजी के बजाय सीएनजी या पीएनजी का उपयोग करें.

पीएनजी नेटवर्क के विस्तार पर जोर 

सरकार ने एलपीजी पर दबाव कम करने के लिए पीएनजी नेटवर्क के विस्तार पर भी जोर दिया है. इस दिशा में राज्यों के साथ मिलकर तेजी से काम किया जा रहा है. हाल के दिनों में बड़ी संख्या में नए घरेलू, वाणिज्यिक और औद्योगिक कनेक्शन जारी किए गए हैं. पिछले कुछ दिनों में हजारों उपभोक्ता एलपीजी से पीएनजी की ओर स्थानांतरित हुए हैं, जिससे गैस आपूर्ति का संतुलन बनाए रखने में मदद मिल रही है.

इस बीच, पश्चिम एशिया में तेल रिफाइनरियों और भंडारण केंद्रों पर हो रहे हमलों ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है. होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम समुद्री मार्ग में किसी भी बाधा का सीधा असर वैश्विक आपूर्ति पर पड़ सकता है. भारत की एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा कतर से आता है. ऐसे में वहां की स्थिति भारत के लिए महत्वपूर्ण है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भी माना कि यह संकट केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के कई देश इससे प्रभावित हो रहे हैं. हालांकि सरकार ने भरोसा जताया है कि वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों की तलाश जारी है और स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो