जहरीली हवा से सावधान, इन देशों ने दिल्ली जाने वाले नागरिकों के लिए जारी की ट्रैवल एडवाइजरी
इस सर्दी में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण का स्तर एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है, जिससे न सिर्फ स्थानीय लोगों की सेहत पर असर पड़ रहा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भी चिंता पैदा हो गई है.

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और उसके आस-पास के इलाकों में वायु प्रदूषण का स्तर इस सर्दी में एक बार फिर भयावह रूप ले लिया है, जिससे न केवल स्थानीय लोगों की सेहत प्रभावित हो रही है बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी चिंता में है। इस सप्ताह राजधानी का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) ‘गंभीर’ श्रेणी के करीब या उससे ऊपर दर्ज किया गया, जिससे कई प्रमुख देशों ने अपने नागरिकों के लिए यात्रा सलाह (ट्रैवल एडवाइजरी) जारी की है.
ब्रिटेन, सिंगापुर और कनाडा सहित कई देशों की सरकारों ने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में आने वाले यात्रियों को सतर्क रहने, स्वास्थ्य संबंधी सावधानियाँ अपनाने और यदि संभव हो तो यात्रा को स्थगित करने की सलाह दी है। इन चेतावनियों के तहत विशेष रूप से बाहर लंबे समय तक रहने, बिना मास्क के घूमने और संवेदनशील समूहों (बच्चों, बुजुर्ग और श्वास रोगियों) को अतिरिक्त सावधानी बरतने पर जोर दिया गया है.
AQI की गंभीरता
वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) जब 400 से 500 के बीच होता है तो उसे ‘गंभीर’ श्रेणी माना जाता है, जिसका अर्थ है कि हवा सांस लेने के लिए बेहद हानिकारक है। इस स्तर पर लोगों को खांसी, गले में खराश, आंखों में जलन और लंबे समय क लिए फेफड़ों की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय हवा में सूक्ष्म कणों (PM2.5 और PM10) की मात्रा बहुत अधिक है, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत जोखिम भरा है.
गर्मियों की तुलना में सर्दियों में प्रदूषण का स्तर अक्सर बढ़ जाता है, क्योंकि ठंडी हवा ज़मीन के पास जमा हो जाती है और धूल-धुएँ के कण ऊपर नहीं उठ पाते। इस तरह स्मॉग की एक घनी परत बन जाती है, जिससे दृश्यता घटती है और सांस लेने में कठिनाइयाँ बढ़ती हैं। पिछले कई दिनों से दिल्ली-एनसीआर को घने कोहरे और स्मॉग की चादर ने घेर रखा है, जिससे AQI लगातार उच्च स्तर पर बना हुआ है.
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और स्थानीय प्रभाव
सिंगापुर दूतावास ने तो अपने नागरिकों को घर के अंदर रहने पर भी जोर देते हुए सख्त सलाह जारी की है, क्योंकि खराब वायु गुणवत्ता एयरपोर्ट जैसे खुले स्थानों पर भी स्वास्थ्य जोखिम बढ़ा देती है। ब्रिटेन और कनाडा ने भी अपने नागरिकों को मास्क पहनने, स्वास्थ्य अनुकूल गतिविधियाँ चुनने और अत्यावश्यक न होने पर यात्रा टालने की सलाह दी है.
दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में यह प्रदूषण संकट केवल स्थानीय समस्या नहीं रह गया है, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य चिंता का विषय बन चुका है। स्थानीय प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण एजेंसियों द्वारा कदम उठाए जा रहें हैं, लेकिन मौसम और पर्यावरणीय कारकों के कारण तत्काल सुधार कठिन दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि दीर्घकालिक और ठोस नीतियाँ ही प्रदूषण से स्थायी राहत प्रदान कर सकती हैं.


