स्वतंत्रता दिवस की सुबह बर्द्धमान में मौत का तांडव, बस-ट्रक टक्कर में 10 की मौत, 25 घायल

पश्चिम बंगाल के बर्द्धमान में स्वतंत्रता दिवस की सुबह दर्दनाक हादसा हुआ। गंगासागर से लौट रही बस तेज़ रफ़्तार में खड़े डंपर से टकरा गई, जिसमें 10 श्रद्धालुओं की मौत और 25 लोग घायल हो गए।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

National News:  स्वतंत्रता दिवस की सुबह बर्द्धमान ज़िले के फागुपुर में 19 नंबर नेशनल हाईवे पर ज़िंदगी और मौत का मंजर देखने को मिला। श्रद्धालुओं से भरी बस खड़े डंपर से इतनी ज़ोर से टकराई कि चीख़-पुकार मच गई। हादसे में दो महिलाओं और आठ पुरुषों की जान चली गई, जबकि कई गंभीर रूप से घायल हो गए। यह टक्कर इतनी तेज़ थी कि बस का अगला हिस्सा लोहे के ढेर में बदल गया। सड़क पर खून और टूटे सामान बिखर गए थे। दूर से आने वाले वाहन चालक भी रुक गए और मदद के लिए उतर पड़े। बस में सवार सभी यात्री गंगासागर में पवित्र स्नान कर वापस लौट रहे थे।

बस दुर्गापुर की ओर तेज़ रफ़्तार में बढ़ रही थी और ड्राइवर को आगे खड़ा डंपर नज़र ही नहीं आया। चंद सेकंड में पूरी बस मौत के जाल में फंस गई। कुछ यात्री हादसे के वक्त सो रहे थे, जो अचानक झटके से अपनी सीट से गिर पड़े। कई लोग टक्कर की वजह से बस के अंदर फंस गए और बाहर निकलना मुश्किल हो गया। पीछे बैठे यात्रियों ने तुरंत खिड़कियों से बाहर निकलने की कोशिश की।

भोर में गूंजा मौत का धमाका

सुबह करीब सात बजे टक्कर इतनी भयानक थी कि आसपास के गाँवों में लोगों ने धमाके जैसी आवाज़ सुनी। लोग दौड़कर घटनास्थल पर पहुंचे तो बस का अगला हिस्सा पूरी तरह पिचक चुका था और यात्री उसमें फंसे कराह रहे थे। हादसे का मंजर देखकर कई लोग सन्न रह गए। कुछ महिलाएं ज़ख़्मियों को पानी पिला रही थीं, तो कुछ मलबा हटाने में मदद कर रहे थे। कई मोबाइल से वीडियो बना रहे थे, जो बाद में सोशल मीडिया पर फैल गए।

पुलिस और स्थानीय लोग सक्रिय

ख़बर मिलते ही बर्द्धमान ज़िला पुलिस के अधिकारी और भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा। स्थानीय लोगों ने बिना समय गँवाए बस के शीशे तोड़कर घायलों को बाहर निकालना शुरू किया। मदद का यह जज़्बा लोगों के दिल को छू गया।

कई लोग अपने घरों से पानी, कपड़े और प्राथमिक इलाज का सामान लेकर आए। किसी ने घायल के हाथ थामे रखा तो किसी ने खून रोकने के लिए कपड़ा बांधा। पुलिस ने तुरंत एम्बुलेंस की व्यवस्था कर घायलों को अस्पताल भेजना शुरू किया। पूरा इलाका एक इंसानी मददगारी के मंजर में बदल गया।

अस्पताल में दर्द का माहौल

घायलों को तुरंत बर्द्धमान मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने 10 लोगों को मृत घोषित कर दिया। बाकी घायलों का इलाज जारी है, जिनमें से तीन से चार की हालत नाज़ुक है और उन्हें आईसीयू में रखा गया है।

अस्पताल के गलियारों में चीख़-पुकार और रोने की आवाज़ें गूंज रही थीं। परिजन बेहोश हो रहे थे, जिन्हें संभालने के लिए अस्पताल स्टाफ और स्थानीय लोग आगे आए। कई घायलों को खून की ज़रूरत थी, जिसके लिए लोगों ने तुरंत रक्तदान किया। यह दृश्य हर किसी की आंखें नम कर देने वाला था।

हादसे की वजह पर सवाल

पुलिस का कहना है कि हादसे के असली कारण की जांच चल रही है। क्या यह ड्राइवर की लापरवाही थी या सड़क पर खड़े डंपर की गलती-इसका जवाब अभी बाकी है। स्थानीय लोग सड़क सुरक्षा में लापरवाही को बड़ी वजह मान रहे हैं।

कई लोगों ने बताया कि इस हाईवे पर ट्रकों का बिना संकेत खड़े रहना आम बात है। प्रशासन को पहले भी शिकायतें दी गई थीं, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। हादसे के बाद इलाके के लोग अब स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं, ताकि आगे ऐसी त्रासदी दोबारा न हो।

ज़िंदगियों का मोल

यह हादसा एक बार फिर सवाल खड़ा करता है कि हमारी सड़कों पर लोगों की जान की कीमत कब समझी जाएगी। हादसों के आंकड़े सिर्फ़ नंबर नहीं, बल्कि टूटी हुई परिवारों की कहानियां हैं। हर साल हज़ारों लोग इसी तरह बेवजह मौत का शिकार हो जाते हैं। सड़क सुरक्षा के लिए कड़े क़ानून और उनका सख़्ती से पालन ज़रूरी है। प्रशासन और जनता दोनों को अपनी ज़िम्मेदारी समझनी होगी। वरना अगला हादसा कब और कहां होगा, यह कोई नहीं जानता-और तब तक एक और परिवार हमेशा के लिए बिखर जाएगा।

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