भारत वापसी की निश्चित तारीख नहीं बता सकता...जानें विजय माल्या ने कोर्ट में अपने बयान में ऐसा क्यों कहा

भारत के भगोड़े और धोखेबाज कारोबारी विजय माल्या ने बुधवार को बंबई उच्च न्यायालय में अपने वकील के माध्यम से दलील दी कि वह भारत लौटने की समयसीमा नहीं बता सकते क्योंकि ब्रिटेन की अदालत ने देश छोड़ने पर कानूनी रोक लगाई है. इसके साथ ही उसने बताया कि उसका पासपोर्ट रद्द कर दिया गया है, इस कारण से भी वह भारत लौटने की निश्चित तारीख नहीं बता सकते.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली : भारत में हजारों करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और धनशोधन के आरोपों का सामना कर रहे विजय माल्या की कानूनी मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. बुधवार को बंबई उच्च न्यायालय में हुई सुनवाई के दौरान माल्या ने अपने वकील के जरिए स्पष्ट किया कि वे फिलहाल भारत लौटने की स्थिति में नहीं हैं. उन्होंने इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय कानूनी अड़चनों और पासपोर्ट न होने का हवाला दिया है. अदालत ने अब इस मामले में केंद्र सरकार से अपना रुख स्पष्ट करने को कहा है.

अदलात में माल्या की वकील की दलील  

आपको बता दें कि बंबई उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की पीठ ने पिछले सप्ताह सख्त रुख अपनाया था. पीठ ने स्पष्ट किया था कि जब तक विजय माल्या खुद भारत लौटकर अदालत में पेश नहीं होते, तब तक उन्हें 'भगोड़ा आर्थिक अपराधी' घोषित करने वाले आदेश के खिलाफ दायर उनकी याचिकाओं पर सुनवाई नहीं की जाएगी. इसी आदेश के जवाब में माल्या ने अपने वकील अमित देसाई के माध्यम से अपनी विवशता जाहिर करते हुए वापसी की असमर्थता जताई है.

पासपोर्ट और ब्रिटिश पाबंदी का हवाला

दरअसल, माल्या के वकील ने अदालत को बताया कि 2016 में ही भारत सरकार ने उनका पासपोर्ट रद्द कर दिया था. यात्रा के लिए आवश्यक इस महत्वपूर्ण दस्तावेज के बिना वे चाहकर भी अंतरराष्ट्रीय यात्रा नहीं कर सकते. इसके अतिरिक्त, इंग्लैंड और वेल्स की अदालतों ने उन पर ब्रिटेन छोड़ने को लेकर कानूनी रोक लगाई हुई है. इन्हीं दो बड़े कारणों की वजह से 70 वर्षीय माल्या भारत लौटने की कोई भी निश्चित समयसीमा बताने में वर्तमान में पूरी तरह असमर्थ हैं.

भगोड़ा कानून की वैधता पर सवाल

विजय माल्या ने उच्च न्यायालय में मुख्य रूप से दो याचिकाएं दायर की हैं. पहली याचिका उन्हें 'भगोड़ा आर्थिक अपराधी' घोषित करने के फैसले के विरोध में है. वहीं दूसरी याचिका में उन्होंने पूरे 'भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम' की कानूनी वैधता को ही चुनौती दी है. माल्या का तर्क है कि इस कानून के कुछ प्रावधान भारतीय संविधान के अनुकूल नहीं हैं. हालांकि, अदालत का मानना है कि इन दलीलों पर चर्चा से पहले अपराधी का भौतिक रूप से भारत में मौजूद होना आवश्यक है.

कार्रवाई के लिए मुवक्किल का भारत में होना अनिवार्य 

माल्या के वकील अमित देसाई ने दलील दी कि कानून की वैधता को चुनौती देने के लिए उनके मुवक्किल का भारत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना अनिवार्य नहीं होना चाहिए. उन्होंने तर्क दिया कि यदि माल्या भारत लौट आते हैं, तो ये सभी कानूनी कार्यवाहियां अपने आप अर्थहीन हो जाएंगी. कानून के मुताबिक, जब अपराधी संबंधित अदालत में पेश हो जाता है, तो उसे भगोड़ा घोषित करने वाले आदेश स्वतः रद्द हो जाते हैं. इसलिए मूल याचिका पर सुनवाई की अनुमति मिलनी चाहिए.

HC ने केंद्र सरकार को जारी किया नोटिस 

माल्या के ताजा बयान और कानूनी दलीलों को सुनने के बाद बंबई उच्च न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है. अदालत ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह माल्या द्वारा दिए गए इन नए तर्कों पर अपना औपचारिक जवाब दाखिल करे. अब इस मामले की अगली सुनवाई अगले महीने तय की गई है. तब तक माल्या की याचिकाओं पर कोई फैसला नहीं होगा, जिससे भारत में उनकी प्रत्यर्पण प्रक्रिया और कानूनी जंग और लंबी खिंचती दिख रही है.

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