किला रायपुर में गरजा देसी जोश, बैलगाड़ी दौड़ की वापसी ने भरा जनसैलाब
किला रायपुर ग्रामीण ओलंपिक के दूसरे दिन ऐसा माहौल दिखा, जैसे पूरा पंजाब मैदान में उतर आया हो। बैलगाड़ी दौड़ की वापसी ने युवाओं, किसानों और परिवारों को एक साथ जोड़ दिया।

दूसरे दिन सुबह से ही स्टेडियम के बाहर भीड़ दिखने लगी। गांवों से ट्रैक्टर-ट्रॉली भरकर लोग पहुंचे। युवाओं में खास उत्साह नजर आया। परिवार बच्चों को लेकर मैदान में आए। हर तरफ ढोल और जयकारे सुनाई दे रहे थे। स्टेडियम खचाखच भर गया। माहौल मेले जैसा था।
क्या बैलगाड़ी दौड़ ने दिल जीत लिया?
बारह साल बाद बैलगाड़ी दौड़ फिर शुरू हुई। जैसे ही गाड़ियां मैदान में उतरीं, तालियां गूंज उठीं। दर्शक खड़े होकर चीयर करने लगे। मिट्टी उड़ी, बैलों की रफ्तार ने सबको रोमांचित कर दिया। बुजुर्गों की आंखों में चमक दिखी। युवाओं ने मोबाइल से वीडियो बनाए। यह सिर्फ खेल नहीं, परंपरा की वापसी थी।
क्या पारंपरिक खेलों ने रंग जमा दिया?
मैदान में सिर्फ बैलगाड़ी दौड़ नहीं थी। हॉकी मुकाबले हुए। कबड्डी के दांव चले। सौ मीटर दौड़ में युवाओं ने दम दिखाया। गोला फेंक और लंबी कूद भी हुई। रस्साकशी ने भीड़ को जोड़े रखा। बाजीगर शो ने बच्चों को खुश कर दिया। हर कोना खेल से भरा था।
क्या नेताओं ने परंपरा की बात की?
पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां मंच पर पहुंचे। उन्होंने बैलगाड़ी दौड़ की वापसी को ऐतिहासिक बताया। कहा कि कानून में बदलाव और पशु सुरक्षा के इंतजाम से यह संभव हुआ। उन्होंने युवाओं से अपील की कि मैदानों में लौटें। मोबाइल और नशे से दूर रहें। परंपरा से जुड़ना ही असली ताकत है।
क्या यह नशे के खिलाफ संदेश था?
स्पीकर ने साफ कहा कि गांव के खेल युवाओं को सही रास्ता दिखाते हैं। मैदान में पसीना बहाने से शरीर और मन दोनों मजबूत होते हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल दुनिया ने बच्चों को स्क्रीन से बांध दिया है। ऐसे आयोजन उन्हें असली पंजाब से जोड़ते हैं। गांव का खेल गांव की पहचान है। इसे बचाना सबकी जिम्मेदारी है।
क्या सरकार ने आयोजन को नई दिशा दी?
राज्य मीडिया प्रमुख बलतेज सिंह पन्नू ने आयोजकों की तारीफ की। उन्होंने कहा कि यह आयोजन सिर्फ खेल नहीं, पहचान है। मुख्यमंत्री के विजन के तहत इस आयोजन को फिर से मजबूती मिली है। सुरक्षा के नियमों का पूरा ध्यान रखा गया है। लोगों के चेहरों की खुशी बताती है कि मेहनत सफल रही।
क्या ग्रामीण ओलंपिक फिर बनेगा पंजाब की शान?
डीसी हिमांशु जैन समेत कई अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासन ने व्यवस्था संभाली। भीड़ के बावजूद अनुशासन बना रहा। लोगों ने उम्मीद जताई कि यह परंपरा अब नहीं रुकेगी। किला रायपुर का नाम फिर से चर्चा में है। खेल, संस्कृति और गांव की ताकत एक साथ दिखी। यही असली पंजाब है।


