नहीं रहीं पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा की पत्नी चेन्नम्मा, 85 साल की उम्र में ली अंतिम सांस
पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा की पत्नी चेन्नम्मा का शनिवार को 85 वर्ष की आयु में निधन हो गया. आज शाम 4 बजे उन्हें जबरदस्त कार्डियक अरेस्ट हुआ और तमाम प्रयासों के बावजूद उनकी तबीयत में सुधार नहीं हो सका, जिस दौरान उन्होंने दुनिया से अलविदा कह दिया.

नई दिल्ली: कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और देश के पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा की पत्नी चेन्नम्मा का शनिवार को 85 वर्ष की आयु में निधन हो गया. जानकारी के अनुसार, वह पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ थीं और बेंगलुरु के मणिपाल अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था. सांस लेने में दिक्कत बढ़ने के बाद उन्हें 15 जुलाई को अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया था, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार जारी था. हालांकि आज शाम 4 बजे उन्हें जबरदस्त कार्डियक अरेस्ट हुआ और तमाम प्रयासों के बावजूद उनकी तबीयत में सुधार नहीं हो सका और उनका निधन हो गया.
अस्पताल पहुंच रहे कार्यकर्ता
चेन्नम्मा के निधन की खबर सामने आते ही राजनीतिक और सामाजिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई. उनके अंतिम दर्शन के लिए परिजन, करीबी रिश्तेदार, जनता दल (सेक्युलर) के नेता और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता अस्पताल पहुंचने लगे हैं. भीड़ को देखते हुए अस्पताल परिसर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई. वहीं बेंगलुरु के पुलिस आयुक्त सीमांत कुमार सिंह ने स्वयं मौके पर पहुंचकर सुरक्षा इंतजामों का जायजा लिया जा रहा है.
कब और कहां हुआ था जन्म
हासन जिले के हीरेहल्ली गांव की रहने वाली चेन्नम्मा का विवाह 25 मई 1954 को एचडी देवेगौड़ा से हुआ था. दोनों ने लंबे वैवाहिक जीवन में साथ मिलकर परिवार और सार्वजनिक जीवन की जिम्मेदारियां निभाई। वहीं उनके छह बच्चे हैं, जिनमें एचडी कुमारस्वामी, एचडी रेवन्ना, एचडी बालकृष्ण, एचडी रमेश गौड़ा, शैलजा और अनुसूया शामिल हैं.
परिवार की संभाली पूरी जिम्मेदारी
देवेगौड़ा के लंबे राजनीतिक सफर में चेन्नम्मा हमेशा उनके मजबूत सहारे के रूप में रही हैं, कहा जाता है कि जब देवेगौड़ा सार्वजनिक जीवन और राजनीति में व्यस्त रहते थे, तब परिवार की पूरी जिम्मेदारी चेन्नम्मा ने संभाली। उन्होंने बच्चों की परवरिश, उनकी शिक्षा और घर की व्यवस्था को पूरी निष्ठा के साथ निभाया। परिवार के सदस्य उन्हें एक सादगीपूर्ण, शांत स्वभाव और मजबूत व्यक्तित्व वाली महिला के रूप में याद करते हैं.
2001 में जीवन में आया था कठिन दौर
चेन्नम्मा के जीवन में एक कठिन दौर फरवरी 2001 में भी आया था, जब हरदनहल्ली के एक मंदिर से लौटते समय उन पर तेजाब से हमला किया गया था. इस हमले में वह गंभीर रूप से घायल हुई थीं, लेकिन लंबे इलाज के बाद स्वस्थ हो गई थी. विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने परिवार का हौसला बनाए रखा और हमेशा मजबूती के साथ जीवन का सामना किया। वहीं अब उनके निधन से देवेगौड़ा परिवार के साथ-साथ कर्नाटक की राजनीति में भी शोक का माहौल है.


