खामेनेई की मौत पर कांग्रेस का शोक, पवन खेड़ा ने कहा- इस कुर्बानी से दुनिया को सीख लेनी चाहिए
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन पर कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने शोक व्यक्त किया है. इस प्रतिनिधिमंडल में पार्टी के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद और पवन खेड़ा शामिल थे.

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन पर कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने शोक व्यक्त किया है. इस प्रतिनिधिमंडल में पार्टी के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद और पवन खेड़ा शामिल थे. पवन खेड़ा ने बताया कि उन्होंने और सलमान खुर्शीद ने कांग्रेस पार्टी की ओर से ईरान की जनता के नाम एक शोक संदेश तैयार किया, जिसमें खामेनेई की मौत पर दुख व्यक्त करते हुए उनके बलिदान को याद रखने की बात कही गई.
पवन खेड़ा ने क्या कहा?
खेड़ा ने कहा कि इस शोक संदेश में यह जिक्र किया गया कि ऐसी घटनाओं से दुनिया को सीख लेने की जरूरत होती है. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं है, बल्कि एक ऐसा क्षण है जिसे आने वाली पीढ़ियां भी याद रखेंगी. पवन खेड़ा के अनुसार, यह घटना रमजान के पवित्र महीने के दौरान हुई, जब खामेनेई रोजा रखे हुए थे. उन्होंने कहा कि रमजान के दसवें रोजे के दिन एक ऐसे नेता की हत्या हुई, जो अपने देश में एक महत्वपूर्ण धार्मिक और राजनीतिक व्यक्तित्व के रूप में जाने जाते थे. उनका मानना है कि इस घटना को इतिहास में लंबे समय तक याद किया जाएगा.
दरअसल, ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत 28 फरवरी को हुए एक बड़े सैन्य हमले में हुई. यह हमला तेहरान में किया गया था, जिसमें अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई बताई जा रही है. उस समय 86 वर्षीय खामेनेई तेहरान स्थित अपने आवासीय परिसर में मौजूद थे. हमले के दौरान उनके कार्यालय और आसपास के कई हिस्सों को निशाना बनाया गया.
ईरान की सरकारी मीडिया ने की मौत की पुष्टि
ईरान की सरकारी मीडिया ने 1 मार्च को उनकी मौत की आधिकारिक पुष्टि की और उन्हें 'शहीद' बताया. इस घटना की जानकारी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी हमले के तुरंत बाद दी थी. रिपोर्टों के अनुसार, इस हमले में खामेनेई के परिवार के कुछ सदस्य भी मारे गए, जिससे पूरे ईरान में गहरा शोक फैल गया. सरकार ने उनके निधन के बाद देश में 40 दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया और कई शहरों में श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की गईं.
अयातुल्ला अली खामेनेई वर्ष 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता थे और लगभग चार दशकों तक उन्होंने देश की राजनीति और शासन व्यवस्था पर मजबूत प्रभाव बनाए रखा. उनकी मृत्यु के बाद ईरान की राजनीतिक स्थिति को लेकर नई बहस शुरू हो गई है, क्योंकि सुप्रीम लीडर का पद देश की सत्ता का सबसे शक्तिशाली पद माना जाता है.
हमले के बाद तेहरान में मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं. कुछ लोगों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किए, जबकि उनके समर्थक और शिया समुदाय के लोग गहरे शोक में डूबे दिखाई दिए. बगदाद सहित कई शहरों में भी उनके समर्थकों ने प्रदर्शन किए.
खामेनेई के निधन के बाद उत्तराधिकारी को लेकर चर्चाएं तेज
खामेनेई के निधन के बाद अब ईरान में उनके उत्तराधिकारी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. कुछ रिपोर्टों में उनके बेटे को संभावित उत्तराधिकारी बताया जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव ईरान की आंतरिक राजनीति और मध्य पूर्व की क्षेत्रीय स्थिति पर व्यापक असर डाल सकता है.
विश्लेषकों का कहना है कि इस घटना ने पहले से ही तनावपूर्ण मध्य पूर्व क्षेत्र में अस्थिरता को और बढ़ा दिया है. इजरायल और अमेरिका की कार्रवाई को ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्र में उसके प्रभाव के खिलाफ उठाया गया कदम बताया जा रहा है. वहीं दुनिया भर में इस घटना को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं. कुछ देशों ने शोक व्यक्त किया है, जबकि कई जगह इसे क्षेत्रीय राजनीति में एक बड़े मोड़ के रूप में देखा जा रहा है. अब ईरान के सामने सबसे बड़ी चुनौती नए नेतृत्व का चयन करना और मौजूदा क्षेत्रीय तनाव के बीच संतुलन बनाए रखना है.


