"नैरेटिव छीनने से बौखलाए"..., जगदीप धनखड़ के इस्तीफे पर अभिषेक मनु सिंघवी ने किया बड़ा खुलासा

अभिषेक मनु सिंघवी ने बीजेपी के दोहरे चरित्र को बेनकाब करते हुए न्यायपालिका पर उनके रवैये की पोल खोली. उन्होंने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे पर तीखे सवाल उठाए, जिसने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

Congress leader Abhishek Manu Singhvi: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि बीजेपी न्यायपालिका के मुद्दों पर दोहरा रवैया अपना रही है, जो हालिया घटनाक्रमों से साफ जाहिर होता है. सिंघवी ने खासतौर पर उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे पर सवाल उठाए हैं और इसे बीजेपी की छवि निर्माण की राजनीति से जोड़कर देखा है. सिंघवी ने आरोप लगाया कि BJP केवल अपनी राजनीतिक Narrative को बनाए रखने के लिए कार्य कर रही है, और जब उसका नैरेटिव कमजोर पड़ता है, तो पार्टी बौखला जाती है. उनका मानना है कि बीजेपी लगातार संसद और अन्य संवैधानिक संस्थाओं को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है, और यह इस्तीफा उसी कड़ी का हिस्सा है.

धनखड़ के इस्तीफे पर उठाए सवाल

अभिषेक मनु सिंघवी ने उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे का जिक्र करते हुए कहा कि उनका अचानक पद छोड़ना कई सवाल खड़े करता है. सिंघवी ने कहा, 'धनखड़ साहब कुछ समय पहले तक संसद में न्यायपालिका के मुद्दे पर मुखर थे. उन्होंने यह तक कहा था कि अगर लोकसभा और राज्यसभा में कोई समान प्रस्ताव आता है, तो दोनों सदनों के चेयरमैन एक संयुक्त कमिटी बना सकते हैं और इस पर मिलकर काम कर सकते हैं.'

लेकिन इसके कुछ ही समय बाद, धनखड़ का इस्तीफा सामने आ गया. सिंघवी का कहना है कि यह चुप्पी अपने आप में बहुत कुछ कहती है, क्योंकि उन्होंने न तो कोई स्पष्ट स्पष्टीकरण दिया और न ही किसी राजनीतिक या संवैधानिक वजह का हवाला दिया.

BJP की दोहरी नीति का पर्दाफाश

सिंघवी ने बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा, 'यह वही पार्टी है जो केवल नैरेटिव चाहती है. अगर उनसे नैरेटिव छिन जाए, तो ये बौखला जाते हैं. इस पार्टी की कभी यह सोच ही नहीं रही कि देश को साथ लेकर कैसे चला जाए.' उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी संसद और अन्य संवैधानिक संस्थाओं को नियंत्रित करने की हरसंभव कोशिश कर रही है. धनखड़ का इस्तीफा उसी दबाव और छवि निर्माण की एक कड़ी है.

राज्यसभा में उठे मुद्दे और जवाब में चुप्पी

सिंघवी ने राज्यसभा में सरकार द्वारा उठाए गए मुद्दों पर भी अपनी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि जब कानून मंत्री से राज्यसभा में न्यायपालिका की स्वायत्तता और सम्मान के बारे में सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया. सिंघवी का कहना था, "जब उनसे पूछा गया कि राज्यसभा में न्यायपालिका की स्वायत्तता और उसके सम्मान के साथ जो कुछ हो रहा है, उस पर सरकार की राय क्या है, तो चुप्पी या गोलमोल जवाब ही मिला."

BJP पर विपक्ष का हमला

अभिषेक मनु सिंघवी ने बीजेपी पर यह भी आरोप लगाया कि एक ओर तो बीजेपी न्यायपालिका को स्वतंत्र बताती है, लेकिन जब वही न्यायपालिका सरकार की नीतियों या फैसलों की आलोचना करती है, तो उसे "लोकतंत्र के खिलाफ" करार दे दिया जाता है. सिंघवी ने यह कहा कि बीजेपी का यह दोहरा रवैया अब जनता से छिपा नहीं रह सकता है.

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