गूगल-माइक्रोसॉफ्ट का बड़ा दांव, भारत को बनाया एआई और टेक का हब, ट्रंप टैरिफ को किया नजरअंदाज

भारत-अमेरिका शुल्क विवाद के बावजूद गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एप्पल और अमेज़न जैसी अमेरिकी कंपनियां भारत में अरबों डॉलर का निवेश बढ़ा रही हैं. अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों की सकारात्मक रिपोर्ट ने भी भारत पर उनका भरोसा और मजबूत किया है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

भारत और अमेरिका के बीच चल रहे शुल्क विवाद को तीन महीने से अधिक हो चुके हैं. लगातार वार्ता के बावजूद दोनों सरकारें किसी अंतिम समझौते पर नहीं पहुंच पाई हैं. इसके बावजूद अमेरिकी कंपनियों के निवेश फैसलों पर कोई असर दिखाई नहीं देता. गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन और एप्पल जैसी दिग्गज कंपनियों से लेकर अमेरिकी फंड्स तक, सभी भारत में अपनी योजनाओं को तेज़ी से आगे बढ़ा रहे हैं.

उद्योग जगत ने जताया भरोसा

फिक्की और सीआईआई जैसे संगठनों ने कहा है कि अमेरिकी कॉरपोरेट जगत से ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि टैरिफ विवाद से भारत में उनकी भविष्य की योजनाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. अमेरिकी निवेशकों की नज़र में भारत अभी भी एक सुरक्षित और तेज़ी से बढ़ता हुआ बाज़ार है.

गूगल का 10 अरब डॉलर निवेश

भारतीय अर्थव्यवस्था पर भरोसे का बड़ा उदाहरण गूगल का नया फैसला है. कंपनी ने विशाखापत्तनम में डाटा सेंटर हब स्थापित करने के लिए 10 अरब डॉलर (करीब 88,730 करोड़ रुपये) निवेश की घोषणा की है. पहले यह राशि छह अरब डॉलर तय थी, लेकिन अब योजना को विस्तार दिया गया है. इस महीने नई दिल्ली में समझौते पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है.

माइक्रोसॉफ्ट का एआई सेंटर

जनवरी 2025 में भारत दौरे के दौरान माइक्रोसॉफ्ट सीईओ सत्य नडेला ने अगले दो वर्षों में तीन अरब डॉलर निवेश करने का ऐलान किया था. यह निवेश भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेंटर स्थापित करने के लिए होगा. जुलाई में जब शुल्क विवाद अपने चरम पर था, तब भी माइक्रोसॉफ्ट ने इस योजना को मंजूरी दी. सरकार का मानना है कि यह पहल भारत को वैश्विक एआई नेतृत्व की दिशा में आगे ले जाएगी.

संयुक्त उद्यम और मेक इन इंडिया

हाल ही में अमेरिकी कंपनी ऑर्डिनरी थ्योरी ने भारतीय कंपनी ऑप्टीमस इन्फ्राकॉम के साथ संयुक्त उद्यम बनाया है. इसे भारत में विदेशी भरोसे और ‘मेक इन इंडिया’ पहल की सफलता का प्रतीक माना जा रहा है. ऑप्टीमस चेयरमैन अशोक कुमार गुप्ता ने कहा कि यह साझेदारी आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूत करेगी और दूरसंचार हार्डवेयर उत्पादन को बढ़ावा देगी.

एप्पल और अन्य दिग्गज भी सक्रिय

भारत में बने आईफोन का निर्यात 10 अरब डॉलर पार कर गया है. पिछले 10 महीनों में आईफोन निर्यात में 75 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है. एप्पल का लक्ष्य है कि 2027 तक भारत की हिस्सेदारी उसके वैश्विक उत्पादन में 25 प्रतिशत तक पहुंच जाए. बोइंग और अमेजन जैसी कंपनियां भी अपने निवेश को और गति देने की तैयारी में हैं.

भारत की बढ़ती साख

ट्रंप टैरिफ के बावजूद अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों एसएंडपी और जापानी आरएंडआई ने भारत की आर्थिक साख को बेहतर आंका है. यही कारण है कि अमेरिकी कंपनियों का भरोसा डगमगाया नहीं है और वे भारत को भविष्य के बड़े निवेश गंतव्य के रूप में देख रही हैं.

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