अब सफर होगा आसान! गुजरात में शुरू हुआ देश का पहला बिना बैरियर वाला टोल प्लाजा

भारत का पहला बैरियर-फ्री मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोलिंग सिस्टम गुजरात के सूरत में NH-48 पर चोर्यासी टोल प्लाजा पर ऑफिशियली लागू कर दिया गया है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

भारत अब बिना रुकावट वाले हाईवे सफर के एक नए दौर की शुरुआत करने के लिए तैयार है. भारत का पहला बैरियर-फ्री मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोलिंग सिस्टम गुजरात के सूरत में NH-48 पर चोर्यासी टोल प्लाजा पर ऑफिशियली लागू कर दिया गया है. इसका मकसद टोल प्लाजा पर लंबी लाइनों को खत्म करना और एडवांस्ड डिजिटल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके ट्रैफिक फ्लो को बेहतर बनाना है.

क्या है बैरियर-फ्री टोलिंग?
बैरियर-फ्री टोलिंग मल्टी-लेन फ्री फ्लो टेक्नोलॉजी पर आधारित है. यह गाड़ियों को बिना रुके टोल पॉइंट से गुजरने देता है. फिजिकल बैरियर वाले पारंपरिक टोल प्लाजा के उलट यह सिस्टम सेंसर और कैमरों से लैस एक ओवरहेड फ्रेम का इस्तेमाल करता है ताकि गाड़ियों की ऑटोमैटिक पहचान हो सके और रियल टाइम में टोल फीस काट सके.

गुजरात में देश का पहला बैरियरलेस टोल प्लाजा खुला
इसके लॉन्च की घोषणा लॉजिस्टिक्स शक्ति समिट और अवार्ड्स 2026 में की गई जहां केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने भारत के हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर को मॉडर्न बनाने और लॉजिस्टिक्स लागत कम करने में इसकी भूमिका पर जोर दिया.

FASTag और AI कैमरों की भूमिका
यह सिस्टम FASTag को ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) टेक्नोलॉजी के साथ जोड़ता है. हाई-परफॉर्मेंस AI कैमरे गाड़ी की नंबर प्लेट पढ़ते हैं, जबकि RFID रीडर FASTag स्टिकर को स्कैन करते हैं. फिर टोल की रकम सीधे लिंक किए गए अकाउंट से काट ली जाती है. यह डबल-वेरिफिकेशन सिस्टम सटीकता सुनिश्चित करता है और गलतियों को कम करता है. ऐसे मामलों में भी जहां FASTag इनएक्टिव है या गायब है, गाड़ी की पहचान उसकी नंबर प्लेट से की जा सकती है, जिससे लगातार एनफोर्समेंट सुनिश्चित होता है.

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