ज्ञानेश कुमार होंगे नए मुख्य चुनाव आयुक्त, 19 फरवरी को संभालेंगे पदभार
भारत के नए मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के रूप में ज्ञानेश कुमार को नियुक्त किया गया है. वे राजीव कुमार की जगह लेंगे, जो 18 फरवरी को सेवानिवृत्त हो रहे हैं. ज्ञानेश कुमार का कार्यकाल 26 जनवरी 2029 तक रहेगा. उनकी नियुक्ति को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं, लेकिन सरकार अपने फैसले पर अडिग है.

चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को देश का अगला मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) नियुक्त किया गया है. वे राजीव कुमार की जगह लेंगे, जो 18 फरवरी को सेवानिवृत्त हो रहे हैं. इस नियुक्ति को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपनी असहमति जाहिर की है और इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई का हवाला दिया है. वहीं, इस फैसले के बाद विपक्ष ने सरकार पर जल्दबाजी में निर्णय लेने का आरोप लगाया है.
सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, ज्ञानेश कुमार का कार्यकाल 26 जनवरी 2029 तक होगा. वहीं, उनकी जगह डॉ. विवेक जोशी को चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी में चयन समिति की बैठक के बाद यह फैसला लिया गया.
कौन हैं ज्ञानेश कुमार?
ज्ञानेश कुमार 1988 बैच के केरल कैडर के आईएएस अधिकारी हैं. उन्हें पिछले साल मार्च में चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया था. इससे पहले, वे गृह मंत्रालय में सचिव के पद पर भी काम कर चुके हैं. उनकी गिनती एक अनुभवी और कुशल प्रशासनिक अधिकारी के रूप में होती है.
राहुल गांधी ने जताई असहमति, विपक्ष ने उठाए सवाल
इस नियुक्ति को लेकर राहुल गांधी ने असहमति नोट भेजा और सरकार पर जल्दबाजी में निर्णय लेने का आरोप लगाया. उन्होंने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट में इस मसले पर 19 फरवरी को सुनवाई होनी है, ऐसे में सरकार को बैठक स्थगित करनी चाहिए थी. कांग्रेस का कहना है कि सरकार ने जानबूझकर इस प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया, ताकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार न करना पड़े.
कांग्रेस नेता अजय माकन, अभिषेक मनु सिंघवी और गुरदीप सप्पल ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लंघन?
कांग्रेस का आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट ने 2 मार्च 2023 को दिए गए अपने आदेश में कहा था कि मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों के चयन के लिए प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और मुख्य न्यायाधीश की समिति होनी चाहिए. लेकिन, नए कानून में मुख्य न्यायाधीश को इस प्रक्रिया से बाहर रखा गया, जिससे सरकार को बहुमत मिल गया.
अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, "अगर केवल कार्यपालिका (सरकार) द्वारा नियुक्ति की प्रक्रिया होगी, तो यह आयोग को पक्षपाती बना देगा और चुनाव प्रणाली की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होंगे."
क्या चुनाव आयोग की स्वतंत्रता खतरे में?
विपक्ष का दावा है कि सरकार ने ऐसा चुनाव आयुक्त नियुक्त किया है, जो कभी सरकार के खिलाफ नहीं जाएगा. उनका कहना है कि अगर यह चयन प्रक्रिया इसी तरह जारी रही, तो इससे चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर दीर्घकालिक असर पड़ेगा.
क्या सुप्रीम कोर्ट पलटेगा सरकार का फैसला?
अब सवाल उठता है कि क्या 19 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट सरकार के इस फैसले पर रोक लगाएगा? क्या मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की प्रक्रिया दोबारा शुरू होगी? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में सामने आएंगे. फिलहाल, सरकार अपने फैसले पर अडिग है और 19 फरवरी को ज्ञानेश कुमार के पदभार ग्रहण करने की पूरी तैयारी हो चुकी है.


