हरियाणा सरकार के 12 बैंक खातों से उड़ गए 590 करोड़, अब CBI करेगी मामले की जांच
हरियाणा में सरकारी खातों से 590 करोड़ रुपये गायब होने के मामले की जांच अब CBI करेगी. फर्जी कंपनियों और नकली दस्तावेजों के जरिए पैसा ट्रांसफर किया गया, जबकि अब तक 15 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है.

हरियाणा में सरकारी खातों से करोड़ों रुपये गायब होने का मामला अब और गंभीर हो गया है. करीब 590 करोड़ रुपये के इस बड़े घोटाले ने प्रशासन और राजनीति दोनों में हलचल मचा दी है. अब इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी CBI को सौंप दी गई है, जिससे उम्मीद की जा रही है कि सच जल्द सामने आएगा.
हरियाणा सरकार ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच CBI को देने की सिफारिश की थी, जिसे अब मंजूरी मिल चुकी है. इससे पहले इस केस की जांच राज्य की विजिलेंस टीम और चंडीगढ़ पुलिस कर रही थी. अब CBI इस बात की तह तक जाने की कोशिश करेगी कि आखिर इतने बड़े स्तर पर पैसा कैसे गायब हुआ और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं.
12 सरकारी खातों से गायब हुए करोड़ों
जानकारी के मुताबिक, यह घोटाला राज्य सरकार के करीब 12 बैंक खातों से जुड़ा है. इन खातों में मौजूद रकम में गड़बड़ी पाई गई और करीब 590 करोड़ रुपये कम पाए गए. इनमें से अधिकतर खाते IDFC First बैंक में थे, जबकि कुछ खाते AU स्मॉल फाइनेंस बैंक में खोले गए थे. अब जांच का फोकस इस बात पर है कि पैसा किन खातों में ट्रांसफर किया गया और उसका इस्तेमाल कैसे हुआ.
प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि मुख्य आरोपी ने कई फर्जी कंपनियां बनाई थीं. इन कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खोले गए और सरकारी खातों से पैसे धीरे-धीरे इन खातों में ट्रांसफर किए गए. कुछ फर्जी कंपनियों के नाम भी सामने आए हैं, जिनके जरिए यह लेन-देन किया गया. इनका इस्तेमाल केवल पैसे निकालने और उन्हें छिपाने के लिए किया गया था.
फर्जी दस्तावेजों से हुआ ट्रांसफर, अब तक 15 गिरफ्तार
जांच एजेंसियों को यह भी पता चला है कि इस घोटाले में फर्जी डेबिट मेमो का इस्तेमाल किया गया. इन्हीं नकली दस्तावेजों के आधार पर रकम को अलग-अलग खातों में भेजा गया. यह तरीका इतना सुनियोजित था कि लंबे समय तक किसी को इस गड़बड़ी का पता नहीं चल सका.
इस मामले में अब तक 15 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. हालांकि जांच एजेंसियों का मानना है कि इसमें और भी लोग शामिल हो सकते हैं. कुछ सरकारी अधिकारियों और बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है, जिनकी जांच अभी जारी है.
विधानसभा में भी गूंजा मामला
यह मामला इतना बड़ा है कि इसकी चर्चा हरियाणा विधानसभा में भी हुई. विपक्ष ने सरकार से जवाब मांगा और इसे गंभीर लापरवाही बताया. वहीं सरकार का कहना है कि जैसे ही गड़बड़ी का पता चला, तुरंत कार्रवाई शुरू की गई और जांच के जरिए मामला सामने आया. मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि अगर इस घोटाले में कोई भी सरकारी अधिकारी या बैंक कर्मचारी दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.


