अकबर-टीपू से ‘ग्रेट’ हटाने पर सियासत गरम, हिमंत सरमा ने दिया उकसाने वाला बयान
हिमंत बिस्वा सरमा ने शनिवार को NCERT द्वारा इतिहास की पाठ्यपुस्तकों में से मुगल बादशाह अकबर और मैसूर शासक टीपू सुल्तान के नामों से “ग्रेट” शब्द हटाने की कथित पहल का समर्थन किया.

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शनिवार को NCERT द्वारा इतिहास की पाठ्यपुस्तकों में से मुगल बादशाह अकबर और मैसूर शासक टीपू सुल्तान के नामों से “ग्रेट” शब्द हटाने की कथित पहल का समर्थन किया. बोंगाईगांव में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि टीपू-इपू को हटाओ एकदम, जहां भेजना है भेज दो, समुद्र में फेंक दो.
RSS नेता सुनील अम्बेकर ने क्या दावा किया?
सरमा ने स्वीकार किया कि उन्होंने संशोधित किताबें अभी तक खुद नहीं देखी हैं, लेकिन यदि NCERT ने ऐसे बदलाव किए हैं, तो वे उसे सही कदम मानते हैं. एक दिन पहले, RSS नेता सुनील अम्बेकर ने दावा किया था कि इतिहास की पुस्तकें अब अकबर द ग्रेट और टीपू सुल्तान द ग्रेट जैसे शीर्षकों का इस्तेमाल नहीं करेंगी, हालांकि किसी ऐतिहासिक व्यक्तित्व को किताबों से हटाया नहीं गया है. इस कथित बदलाव के बाद राजनीतिक हलकों में तुरंत प्रतिक्रिया शुरू हो गई.
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इस कदम को इतिहास से छेड़छाड़ बताते हुए कहा कि उन शासकों के योगदान को नज़रअंदाज करना अनुचित है, जिन्होंने सदियों तक उपमहाद्वीप की राजनीति और संस्कृति को प्रभावित किया. उनका कहना था कि नाम या उपाधि हटाने से इतिहास नहीं बदलता. उन्होंने यह भी कहा कि मुगल शासन के दौरान भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया में मजबूत थी और देश को सोन की चिड़िया कहा जाता था.
इमरान मसूद ने क्या कहा?
मसूद ने आगे कहा कि वे 700 वर्षों तक इस देश पर शासन करते रहे. नाम हटाने से क्या बदल जाएगा? ब्रिटिश शासन के विरोध में कई शासकों ने अपनी जान दी, लेकिन आज सत्ता में वे लोग हैं जिनके पूर्वज अंग्रेज़ों के आगे झुके थे. उन्होंने सवाल उठाया कि झांसी की रानी लक्ष्मीबाई को धोखा देने वालों के वंशज कैसे मंत्री पदों पर बैठे हैं.
कांग्रेस के एक अन्य नेता के. मुरलीधरन ने भी कहा कि अकबर और टीपू सुल्तान के नाम से “ग्रेट” हटाना इतिहास के साथ अन्याय है. उन्होंने कहा कि अकबर ने धार्मिक सौहार्द बढ़ाया, हिंदुओं को स्वतंत्रता दी और टीपू सुल्तान ने ब्रिटिशों के खिलाफ लड़ते हुए प्राण गंवाए.
वहीं, दूसरी ओर विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता विनोद बंसल ने इस संशोधन का स्वागत किया. उन्होंने आरोप लगाया कि पुरानी किताबों में इतिहास को तोड़ा-मरोड़ा गया था. बंसल के अनुसार, मुगल शासकों को महिमामंडित करना सही नहीं है. उनका कहना था कि अकबर को महान कैसे कहा जा सकता है, जब महाराणा प्रताप महान हैं? बाबर से औरंगज़ेब तक किसी का महिमामंडन स्वीकार नहीं किया जा सकता. उन्होंने NCERT का धन्यवाद करते हुए कहा कि यह सुधार आवश्यक था.


