Som Pradosh Vrat 2026: सोम प्रदोष व्रत पर ऐसे करें पूजा, जानें भगवान शिव को प्रसन्न करने के आसान उपाय

सोमवार को पड़ने वाला सोम प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित माना जाता है. इस दिन शिव-पार्वती की पूजा करने से जीवन की परेशानियां दूर होने की मान्यता है. शाम 6:48 से 9:12 बजे तक पूजा का शुभ समय बताया गया है.

Shraddha Mishra

सनातन धर्म में भगवान शिव की आराधना के लिए कई व्रत और त्योहार बताए गए हैं, जिनमें प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और घर में सुख-शांति आती है. जब यह व्रत सोमवार के दिन पड़ता है तो इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाता है, जिसका महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है. सोमवार स्वयं भगवान शिव को समर्पित दिन माना जाता है, इसलिए इस दिन किया गया व्रत और पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है.

हर महीने दो बार आता है प्रदोष व्रत

प्रदोष व्रत हर महीने दो बार रखा जाता है. यह व्रत हिंदू पंचांग के अनुसार शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है. इस दिन भगवान शिव की पूजा संध्या के समय करना सबसे शुभ माना जाता है. श्रद्धालु इस व्रत को रखकर भगवान शिव से सुख, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं.

आज बन रहे कई शुभ योग

इस बार का सोम प्रदोष व्रत कई शुभ योगों के साथ आया है, जिससे इसका महत्व और बढ़ गया है. पंचांग के अनुसार आज शिव योग, सिद्ध योग और शुक्रादित्य योग बन रहे हैं. धार्मिक मान्यता है कि इन शुभ योगों में की गई पूजा और साधना का विशेष लाभ मिलता है. इन योगों के कारण भगवान शिव की कृपा जल्दी प्राप्त होने की संभावना मानी जाती है.

पूजा का शुभ समय

प्रदोष व्रत में शाम का समय पूजा के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है. इस दिन प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करने से अधिक फल मिलता है. आज पूजा का शुभ समय शाम 6 बजकर 48 मिनट से रात 9 बजकर 12 मिनट तक बताया गया है. इसी अवधि में शिव पूजा करना सबसे अच्छा माना जाता है.

त्रयोदशी तिथि का समय

इस बार सोम प्रदोष व्रत पर द्वादशी और त्रयोदशी तिथि का विशेष संयोग बन रहा है. पंचांग के अनुसार त्रयोदशी तिथि की शुरुआत आज सुबह 9 बजकर 40 मिनट से हुई है और यह तिथि अगले दिन यानी 17 मार्च सुबह 9 बजकर 23 मिनट तक रहेगी. इस दौरान प्रदोष व्रत का पालन किया जा सकता है.

प्रदोष व्रत की आसान पूजा विधि

प्रदोष व्रत की पूजा सरल तरीके से भी की जा सकती है. श्रद्धालु पूरे दिन व्रत रखकर शाम के समय भगवान शिव की आराधना करते हैं.

  1.  सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें. इसके बाद व्रत रखने का संकल्प लें.
  2. शाम के शुभ समय में पूजा स्थान को साफ करें और चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान शिव की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें.
  3. दीपक और धूप जलाकर पूजा की शुरुआत करें.
  4. शिवलिंग का जलाभिषेक करें और गंगाजल, दूध, दही, घी और शहद से अभिषेक करें. साथ ही बेलपत्र और धतूरा अर्पित करें.
  5. भगवान शिव को भोग लगाने के बाद शिव चालीसा का पाठ करें और प्रदोष व्रत की कथा सुनें या पढ़ें.
  6. अंत में “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें. भगवान शिव के 108 नामों का स्मरण भी शुभ माना जाता है.

भगवान शिव के 108 नाम

ॐ महाकाल नमः

ॐ रुद्रनाथ नमः

ॐ भीमशंकर नमः

ॐ नटराज नमः

ॐ प्रलेयन्कार नमः

ॐ भीमेश्वर नमः

ॐ विषधारी नमः

ॐ बम भोले नमः

ॐ ओंकार स्वामी नमः

ॐ ओंकारेश्वर नमः

ॐ शंकर त्रिशूलधारी नमः

ॐ भोले बाबा नमः

ॐ शिवजी नमः

ॐ चंद्रमोली नमः

ॐ डमरूधारी नमः

ॐ चंद्रधारी नमः

ॐ दक्षेश्वर नमः

ॐ घ्रेनश्वर नमः

ॐ मणिमहेश नमः

ॐ अनादी नमः

ॐ अमर नमः

ॐ आशुतोष महाराज नमः

ॐ विश्वनाथ नमः

ॐ अनादिदेव नमः

ॐ उमापति नमः

ॐ गोरापति नमः

ॐ गणपिता नमः

ॐ विलवकेश्वर नमः

ॐ भोलेनाथ नमः

ॐ कैलाश पति नमः

ॐ भूतनाथ नमः

ॐ नंदराज नमः

ॐ नन्दी की सवारी नमः

ॐ ज्योतिलिंग नमः

ॐ मलिकार्जुन नमः

ॐ शम्भु नमः

ॐ नीलकंठ नमः

ॐ महाकालेश्वर नमः

ॐ त्रिपुरारी नमः

ॐ त्रिलोकनाथ नमः

ॐ त्रिनेत्रधारी नमः

ॐ बर्फानी बाबा नमः

ॐ लंकेश्वर नमः

ॐ अमरनाथ नमः

ॐ केदारनाथ नमः

ॐ मंगलेश्वर नमः

ॐ अर्धनारीश्वर नमः

ॐ नागार्जुन नमः

ॐ जटाधारी नमः

ॐ नीलेश्वर नमः

ॐ जगतपिता नमः

ॐ मृत्युन्जन नमः

ॐ नागधारी नमः

ॐ रामेश्वर नमः

ॐ गलसर्पमाला नमः

ॐ दीनानाथ नमः

ॐ सोमनाथ नमः

ॐ जोगी नमः

ॐ भंडारी बाबा नमः

ॐ बमलेहरी नमः

ॐ गोरीशंकर नमः

ॐ शिवाकांत नमः

ॐ महेश्वराए नमः

ॐ महेश नमः

ॐ संकटहारी नमः

ॐ महेश्वर नमः

ॐ रुंडमालाधारी नमः

ॐ जगपालनकर्ता नमः

ॐ पशुपति नमः

ॐ संगमेश्वर नमः

ॐ अचलेश्वर नमः

ॐ ओलोकानाथ नमः

ॐ आदिनाथ न

ॐ देवदेवेश्वर नमः

ॐ प्राणनाथ नमः

ॐ शिवम् नमः

ॐ महादानी नमः

ॐ शिवदानी नमः

ॐ अभयंकर नमः

ॐ पातालेश्वर नमः

ॐ धूधेश्वर नमः

ॐ सर्पधारी नमः

ॐ त्रिलोकिनरेश नमः

ॐ हठ योगी नमः

ॐ विश्लेश्वर नमः

ॐ नागाधिराज नमः

ॐ सर्वेश्वर नमः

ॐ उमाकांत नमः

ॐ बाबा चंद्रेश्वर नमः

ॐ त्रिकालदर्शी नमः

ॐ त्रिलोकी स्वामी नमः

ॐ गिरजापति नमः

ॐ भद्रेश्वर नमः

ॐ त्रिपुनाशक नमः

ॐ निर्जेश्वर नमः

ॐ किरातेश्वर नमः

ॐ जागेश्वर नमः

ॐ अबधूतपति नमः

ॐ भीलपति नमः

ॐ जितनाथ नमः

ॐ वृषेश्वर नमः

ॐ भूतेश्वर नमः

ॐ बैजूनाथ नमः

ॐ नागेश्वर नम

ॐ महादेव नमः

ॐ गढ़शंकर नमः

ॐ मुक्तेश्वर नमः

ॐ नटेषर नमः

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