'अगर बांग्लादेश के हिंदू खड़े हुए, तो दुनिया साथ देगी', RSS प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान

बांग्लादेश में हिंदुओं पर बढ़ती हिंसा के बीच आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि अगर वहां के हिंदू अपने अधिकारों के लिए खड़े होते हैं, तो पूरी दुनिया का हिंदू समाज उनके साथ होगा.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

मुंबई: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर रविवार को बेहद स्पष्ट और कड़ा संदेश दिया. उन्होंने कहा कि यदि बांग्लादेश में रह रहे हिंदू अपने अधिकारों की रक्षा के लिए स्वयं खड़े होने और संघर्ष करने का निर्णय लेते हैं, तो दुनिया भर के हिंदू उनके साथ मजबूती से खड़े होंगे.

मुंबई में आयोजित आरएसएस की व्याख्यान श्रृंखला के दूसरे दिन अपने संबोधन में भागवत ने कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं की संख्या कोई छोटी नहीं है और उनकी एकजुटता वैश्विक समर्थन का आधार बन सकती है. उनके इस बयान को बांग्लादेश में बढ़ती हिंसा और अस्थिरता के संदर्भ में अहम माना जा रहा है.

अगर वे लड़ने का फैसला करते हैं, तो पूरा हिंदू समाज साथ देगा

वर्ली स्थित नेहरू सेंटर में 'संघ की 100 साल की यात्रा: नए क्षितिज' विषय पर आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए आरएसएस प्रमुख ने कहा,"बांग्लादेश में लगभग 1.25 करोड़ हिंदू हैं. अगर वे वहां रहकर लड़ने का फैसला करते हैं, तो दुनिया भर के सभी हिंदू उनकी मदद करेंगे."

उन्होंने संकेत दिया कि किसी भी समुदाय की सुरक्षा का पहला आधार उसकी अपनी इच्छाशक्ति और साहस होता है.

बांग्लादेश में हिंसा की पृष्ठभूमि

बांग्लादेश में भारत-विरोधी कट्टरपंथी छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद हालात तेजी से बिगड़े हैं. पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटाए जाने के बाद देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू हुए, जो 5 अगस्त 2024 को छात्रों के नेतृत्व में हुए 'जुलाई विद्रोह’ के बाद और उग्र हो गए.

इस अशांति के बीच अल्पसंख्यक समुदायों, खासकर हिंदुओं को निशाना बनाए जाने की घटनाएं सामने आईं. हिंसक भीड़ों ने व्यापारियों, मजदूरों और छात्रों पर हमले किए, जिनमें कई लोगों की जान चली गई.

भारत में जनसंख्या परिवर्तन पर भी जताई चिंता

घरेलू मुद्दों पर बोलते हुए मोहन भागवत ने कहा कि भारत में जनसंख्या संरचना में हो रहे बदलावों को लेकर पिछली सरकारों ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए.

उन्होंने कहा,"सरकार ने पहले जनसंख्या परिवर्तन पर पर्याप्त कदम नहीं उठाए. जन्म दर और अवैध अप्रवासन इसके कारण हैं. अब जब सरकार ने कार्रवाई शुरू कर दी है, तो वह सफल होगी."

भारत को अब तोड़ा नहीं जा सकता

आरएसएस प्रमुख ने भारत की आंतरिक मजबूती पर जोर देते हुए कहा, "भारत को अब तोड़ा नहीं जा सकता. जो भी भारत को तोड़ने की कोशिश करेगा, वह खुद टूट जाएगा." उन्होंने इसे भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक एकता की शक्ति बताया.

आरएसएस के फंडिंग मॉडल पर सफाई

संघ के वित्तपोषण को लेकर उठते सवालों पर भगवत ने स्पष्ट किया कि आरएसएस किसी भी कॉरपोरेट या संस्थागत फंड पर निर्भर नहीं है.

उन्होंने कहा,"लोग आरएसएस के फंड के बारे में जानने को उत्सुक रहते हैं. हम अपने कार्यकर्ताओं से ही फंड जुटाते हैं. जब हम यात्रा करते हैं, तो खाना खरीदने के बजाय टिफिन मंगवाते हैं. हम कार्यकर्ताओं के घरों में ठहरते हैं, होटलों में नहीं."

जाति और नेतृत्व पर संघ का रुख

नेतृत्व और जातिगत भेदभाव के सवाल पर भागवत ने कहा कि संघ में किसी भी जाति का व्यक्ति शीर्ष पद तक पहुंच सकता है.
उन्होंने कहा,"अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति कोई अयोग्यता नहीं है और ब्राह्मण होना कोई योग्यता नहीं है."

मुस्लिम बहुल इलाकों में संघ की रणनीति

मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में आरएसएस की कार्यप्रणाली पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि संघ टकराव की राजनीति नहीं करता.भागवत के शब्दों में,"मुस्लिम क्षेत्रों में चुनौतियों का सामना हम प्रतिक्रिया न देकर करते हैं. वे अपशब्दों का प्रयोग कर सकते हैं, लेकिन हम जवाब नहीं देते. इस तरह संघर्ष नहीं बढ़ता."

"संघ सत्ता नहीं, समाज की एकता चाहता है"

यह बयान शनिवार को दिए गए उनके पहले दिन के संबोधन की कड़ी में आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि आरएसएस किसी के खिलाफ नहीं है और न ही सत्ता की चाह रखता है. उन्होंने कहा,"संघ किसी के खिलाफ नहीं है. इसे सत्ता नहीं चाहिए. इसका उद्देश्य केवल समाज को एकजुट करना है."

उन्होंने याद दिलाया कि 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने समाज में बिखराव को देखते हुए आरएसएस की स्थापना की थी.

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