अमेरिका के प्रस्ताव पर भारत कर रहा समीक्षा, 19 फरवरी की बैठक पर सस्पेंस बरकरार

भारत ने गाजा के लिए प्रस्तावित अमेरिकी शांति बोर्ड में शामिल होने के निमंत्रण पर फिलहाल कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है. विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि वाशिंगटन से औपचारिक सूचना मिली है और प्रस्ताव की समीक्षा जारी है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: भारत ने गाजा पट्टी के लिए प्रस्तावित अमेरिकी शांति बोर्ड में शामिल होने के निमंत्रण पर सावधानीपूर्वक रुख अपनाया है. सरकार ने पुष्टि की है कि संयुक्त राज्य अमेरिका की ओर से औपचारिक निमंत्रण प्राप्त हुआ है और इस प्रस्ताव की फिलहाल समीक्षा की जा रही है. हालांकि, भारत ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह 19 फरवरी को प्रस्तावित पहली बैठक में भाग लेगा या नहीं.

नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस के दौरान विदेश मंत्रालय ने बताया कि वाशिंगटन से शांति बोर्ड में भागीदारी को लेकर आधिकारिक सूचना मिली है. लेकिन भारत ने इस पर अंतिम निर्णय लेने से पहले सभी पहलुओं पर विचार करने की बात कही है.

भारत को मिला औपचारिक निमंत्रण

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पुष्टि की कि भारत को अमेरिका की ओर से शांति बोर्ड में शामिल होने का औपचारिक आमंत्रण प्राप्त हुआ है. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार ने अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है.

उन्होंने कहा, "शांति बोर्ड के संबंध में, हमें अमेरिकी सरकार से शांति बोर्ड में शामिल होने का निमंत्रण मिला है. हम वर्तमान में इस प्रस्ताव पर विचार कर रहे हैं और इसकी समीक्षा कर रहे हैं," जायसवाल ने कहा.

शांति और स्थिरता पर भारत का रुख

प्रवक्ता ने पश्चिम एशिया में शांति और संवाद को लेकर भारत की प्रतिबद्धता दोहराई. उन्होंने कहा कि भारत हमेशा से ऐसे प्रयासों का समर्थन करता रहा है जो क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता की दिशा में आगे बढ़ते हैं.

उन्होंने कहा, "जैसा कि आप जानते हैं, भारत ने पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और संवाद को बढ़ावा देने वाले प्रयासों का लगातार समर्थन किया है. हमारे प्रधानमंत्री ने भी गाजा सहित पूरे क्षेत्र में दीर्घकालिक और स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त करने वाली ऐसी सभी पहलों का स्वागत किया है."

संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव के तहत गठन

गाजा शांति बोर्ड का गठन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2803 के तहत किया गया है. इस प्रस्ताव के अनुसार, बोर्ड को गाजा में शासन व्यवस्था, पुनर्निर्माण और स्थिरता को समर्थन देने के लिए एक अंतरिम प्राधिकरण के रूप में स्थापित किया गया है.

यह पहल एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल की योजना से भी जुड़ी है, जिसका उद्देश्य युद्धविराम को बनाए रखना और विसैन्यीकरण के साथ-साथ पुनर्निर्माण प्रक्रिया में सहयोग करना है.

शांति बोर्ड की संरचना

बोर्ड की अध्यक्षता संयुक्त राज्य अमेरिका कर रहा है. इसके संस्थापक कार्यकारी बोर्ड में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा, जेरेड कुशनर और मार्क रोवन जैसे वरिष्ठ नाम शामिल हैं. जमीनी स्तर पर शासन संबंधी कार्यों के लिए गाजा कार्यकारी बोर्ड सहयोग कर रहा है.

किन देशों ने दिखाई सहमति

कई देशों ने इस पहल में शामिल होने या भाग लेने के निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है. सऊदी अरब, मिस्र, कतर, तुर्की, जॉर्डन, पाकिस्तान, इंडोनेशिया और संयुक्त अरब अमीरात सहित कई प्रमुख अरब और मुस्लिम देशों ने इस पहल को गाजा में युद्धविराम को सुदृढ़ करने और पुनर्निर्माण में सहायता करने के तंत्र के रूप में देखा है.

इसके अलावा मोरक्को, बहरीन और इज़राइल भी इसमें भाग लेने के लिए सहमत हो गए हैं.

रिपोर्ट्स के अनुसार, लगभग 60 देशों को निमंत्रण भेजा गया है, जिनमें से 27 से अधिक देशों ने भाग लेने की सहमति दी है. सदस्य देशों में अर्जेंटीना, आर्मेनिया, अजरबैजान, बेलारूस, हंगरी, कजाकिस्तान, कोसोवो, पैराग्वे, उज्बेकिस्तान और वियतनाम जैसे देश भी शामिल हैं.

पश्चिमी देशों की सतर्कता

लेकिन, कई पारंपरिक पश्चिमी लोकतंत्रों ने इस पहल से खुद को दूर कर लिया है. फ्रांस, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम और स्पेन जैसी बड़ी ताकतों ने या तो इसमें हिस्सा लेने से मना कर दिया है, फैसले टाल दिए हैं, या सावधानी भरा रवैया अपनाया है.

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