LAC पर भारत की बड़ी तैयारी, अगले साल बनकर तैयार होगी यह सड़क, सेना की आवाजाही होगी आसान
भारत एलएसी पर चीन की निगरानी से मुक्त वैकल्पिक मार्ग बना रहा है, जिससे सासोमा से DBO की दूरी 79 किमी घटेगी और यात्रा समय 12 घंटे रह जाएगा. सामरिक दृष्टि से अहम यह मार्ग सैन्य और रसद संचालन को सशक्त बनाएगा. 130 किमी लंबी सड़क पर सुरंग व 70 टन लोड क्षमता वाले पुल शामिल हैं.

भारत ने चीन के साथ जारी सीमा तनाव और 2020 की गलवान घाटी की झड़प के बाद वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर अपने बुनियादी ढांचे को मज़बूत करने के लिए एक नई रणनीतिक पहल की है. लद्दाख के दौलत बेग ओल्डी (DBO) सेक्टर तक एक वैकल्पिक मार्ग 2025 तक तैयार हो जाएगा, जो पूरी तरह से चीनी निगरानी से मुक्त रहेगा.
सासोमा से डीबीओ तक नई कनेक्टिविटी
यह नया मार्ग सासोमा-सासेर ला-सासेर ब्रांगसा-गपशान-डीबीओ होकर लगभग 130 किलोमीटर लंबा होगा और यह मौजूदा दारबुक-श्योक-डीबीओ (DSDBO) रोड का विकल्प बनेगा. वर्तमान मार्ग जहां चीनी चौकियों के काफी करीब से गुजरता है, वहीं नया रास्ता पूरी तरह सुरक्षित माना जा रहा है.
समय की होगी बचत
सीमा सड़क संगठन (BRO) इस सड़क का निर्माण कर रहा है, जो लेह से DBO तक की दूरी को 79 किलोमीटर कम कर देगा. इससे यात्रा का समय मौजूदा दो दिन से घटकर मात्र 11-12 घंटे हो जाएगा. यह न केवल सैन्य गतिशीलता बढ़ाएगा, बल्कि रसद आपूर्ति भी अधिक कुशल तरीके से की जा सकेगी.
सामरिक दृष्टिकोण से अहम है DBO
DBO क्षेत्र सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह 16,614 फीट की ऊंचाई पर स्थित दुनिया की सबसे ऊंची एयरस्ट्रिप का घर है. यह काराकोरम दर्रे और विवादास्पद देपसांग मैदानी क्षेत्र के करीब है, जहां अक्सर चीनी सैनिकों की घुसपैठ और भारतीय दावों को चुनौती मिलती रही है.
पुलों की क्षमता और हथियार परीक्षण
नए मार्ग पर 9 पुलों का निर्माण किया गया है, जिनकी लोड कैपेसिटी को 40 टन से बढ़ाकर 70 टन कर दिया गया है. इससे भारी सैन्य उपकरणों जैसे बोफोर्स तोप और अन्य हथियार प्रणालियों की निर्बाध आवाजाही संभव हो सकेगी. इनका परीक्षण पहले ही सफलतापूर्वक किया जा चुका है.
निर्माण से जुड़ी कठिन चुनौतियां
यह इलाका 17,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर स्थित है, जहां ऑक्सीजन की कमी और बर्फबारी के चलते काम साल में सिर्फ 5-6 महीने ही संभव होता है. BRO ने कामगारों की सुरक्षा और कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए ऑक्सीजन कैफे की व्यवस्था की है.
सुरंग निर्माण की योजना भी जारी
सासेर ला दर्रे (17,660 फीट) पर 8 किलोमीटर लंबी सुरंग की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट पर भी काम चल रहा है, जिससे यह मार्ग हर मौसम में खुला रह सकेगा. यह परियोजना इस पूरी सड़क की रणनीतिक उपयोगिता को कई गुना बढ़ा देगी.
BRO के दो प्रोजेक्ट कर रहे निर्माण
इस परियोजना को दो भागों में विभाजित किया गया है, ‘प्रोजेक्ट विजयक’ सासोमा से सासेर ब्रांगसा तक निर्माण कार्य संभाल रहा है, जबकि ‘प्रोजेक्ट हिमांक’ DBO क्षेत्र की जिम्मेदारी निभा रहा है. इस पूरी सड़क के निर्माण पर करीब 500 करोड़ रुपये का खर्च अनुमानित है.


