RBI ने किया वित्तीय साक्षरता सप्ताह 2026 का आयोजन, मुख्य विषय रहा 'KYC-सुरक्षित बैंकिंग की ओर पहला कदम'

भारतीय रिजर्व बैंक 9 से 13 फरवरी तक वित्तीय साक्षरता सप्ताह 2026 मना रहा है. 'केवाईसी- सुरक्षित बैंकिंग की ओर पहला कदम' थीम वाले इस अभियान का मुख्य लक्ष्य सुरक्षित बैंकिंग और धोखाधड़ी के प्रति लोगों को जागरूक करना है.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली : भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वर्ष 2016 से निरंतर चली आ रही अपनी महत्वपूर्ण परंपरा को जारी रखते हुए वित्तीय साक्षरता सप्ताह 2026 का आयोजन किया है. इस वर्ष 9 से 13 फरवरी तक चलने वाले इस राष्ट्रव्यापी अभियान का मुख्य विषय 'केवाईसी- सुरक्षित बैंकिंग की ओर पहला कदम' रखा गया है. इस पहल का प्राथमिक उद्देश्य आम जनता के बीच सुरक्षित बैंकिंग की नींव के रूप में 'अपने ग्राहक को जानें' यानी केवाईसी के महत्व को उजागर करना और एक सुदृढ़ वित्तीय तंत्र बनाना है.

नई दिल्ली में विशेष कार्यशाला का शुभारंभ

आपको बता दें कि इस उत्सव के एक महत्वपूर्ण भाग के रूप में 10 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट्स और स्वयं सहायता समूहों के लिए एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया. इस कार्यशाला का उद्घाटन आरबीआई के क्षेत्रीय निदेशक रोहित पी. दास ने वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में किया. इस दौरान नाबार्ड और राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे. कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य जमीनी स्तर पर काम करने वाले समूहों को केवाईसी के तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराना था.

ग्राम पंचायत स्तर पर वित्तीय समावेशन

पिछले वर्ष आरबीआई ने ग्राम पंचायत स्तर पर वित्तीय समावेशन योजनाओं को शत-प्रतिशत लागू करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी अभियान चलाया था. इस पहल के तहत बैंक खातों के 'री-केवाईसी' का कार्य प्राथमिकता पर किया गया ताकि ग्राहकों के खातों का संचालन बिना किसी बाधा के जारी रह सके. दिल्ली एनसीटी क्षेत्र में भी आरबीआई ने बैंकों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित किया कि प्रत्येक पात्र खाताधारक अपनी केवाईसी प्रक्रिया को सुगमता से पूरा कर सके. इससे ग्रामीण बैंकिंग व्यवस्था को काफी मजबूती मिली है.

सरल और सुलभ केवाईसी प्रक्रिया की जानकारी

वित्तीय साक्षरता सप्ताह 2026 के माध्यम से जनता को यह समझाया जा रहा है कि केवाईसी केवल एक नियामक औपचारिकता नहीं है बल्कि यह सुरक्षित बैंकिंग का आधार है. आरबीआई स्पष्ट कर रहा है कि केवाईसी प्रक्रिया का अनुपालन करना अब बेहद सरल है क्योंकि इसके लिए कई सुविधाजनक और सुरक्षित माध्यम उपलब्ध हैं. इसके साथ ही 'सेंट्रल केवाईसी' (सीकेवाईसी) जैसी आधुनिक सुविधाओं के बारे में भी जागरूकता फैलाई जा रही है. इससे ग्राहकों को भविष्य में बार-बार एक ही प्रक्रिया से गुजरने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी.

फर्जी संदेशों और लिंक से सुरक्षा की अपील

डिजिटल युग में बढ़ते वित्तीय अपराधों को देखते हुए इस अभियान में साइबर सुरक्षा पर विशेष जोर दिया जा रहा है. लोगों को सलाह दी गई है कि वे केवाईसी अपडेट करने के नाम पर आने वाले फर्जी कॉल्स, संदेशों और संदिग्ध लिंक से हमेशा सतर्क रहें. ऐसे अनधिकृत माध्यमों से जानकारी साझा करने पर ग्राहकों को भारी आर्थिक चपत लग सकती है. आरबीआई यह सुनिश्चित करना चाहता है कि प्रत्येक नागरिक इन खतरों को पहचाने और लेनदेन के लिए केवल बैंक के आधिकारिक माध्यमों का ही उपयोग करे.

मनी म्यूल्स बनने के प्रति कड़ी चेतावनी

अभियान के अंतिम चरण में लोगों को 'मनी म्यूल्स' बनने के गंभीर परिणामों के प्रति जागरूक किया जा रहा है. अक्सर अपराधी निर्दोष लोगों को प्रलोभन देकर उनके बैंक खातों का उपयोग अवैध धन के लेन-देन के लिए करते हैं. ऐसी गतिविधियों में शामिल होने से व्यक्ति गंभीर कानूनी मुश्किलों में फंस सकता है. आरबीआई और बैंकों के साझा प्रयासों का लक्ष्य एक ऐसा सुरक्षित वित्तीय परिवेश तैयार करना है जहां ग्राहक जागरूक हों. पूरे वर्ष चलने वाली ये गतिविधियां बैंकिंग सिस्टम में भरोसा बढ़ाएंगी.

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