2 महीने बाद जागी बांग्लादेश सरकार, दीपूचंद्र दास के परिवार को दी 29 लाख टका की आर्थिक मदद

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने मयमनसिंह में 18 दिसंबर 2025 को भीड़ द्वारा जिंदा जलाकर मार डाले गए हिंदू युवक दीपू चंद्र दास के परिवार को 25 लाख टका की मदद दी. राशि से पक्का घर बनेगा. सरकार ने घटना की निंदा की, जांच तेज, परिवार को लंबी सहायता का वादा.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

नई दिल्लीः बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने एक दर्दनाक घटना के बाद पीड़ित परिवार को बड़ा सहारा दिया है. पिछले साल दिसंबर में मयमनसिंह जिले में भीड़ द्वारा निर्मम तरीके से मार डाले गए दीपू चंद्र दास के परिवार के लिए 25 लाख टका की आर्थिक मदद की घोषणा की गई है. यह राशि परिवार के लिए एक स्थायी घर बनाने में इस्तेमाल होगी. घटना चुनाव से महज दो दिन पहले हुई थी, जिसने पूरे देश में सनसनी फैला दी.

क्रूर हत्या की पूरी कहानी

18 दिसंबर 2025 को मयमनसिंह के भालुका उपजिला के मास्टरबारी इलाके में दीपू चंद्र दास पर भीड़ ने हमला कर दिया. दीपू एक हिंदू गारमेंट फैक्ट्री वर्कर थे, उम्र महज 25-27 साल. आरोप था कि उन्होंने फैक्ट्री में इस्लाम या पैगंबर के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की थी. गुस्साई भीड़ ने उन्हें पहले पीटा, फिर पेड़ से बांधा और जिंदा जला दिया. यह घटना ब्लासफेमी के नाम पर हुई सांप्रदायिक हिंसा का हिस्सा बताई जाती है. दीपू परिवार के इकलौते कमाने वाले थे. उनकी पत्नी और छोटी बेटी (करीब 1.5-3 साल की) अब अकेले हैं.

सरकार का ऐक्शन

मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने घटना की कड़ी निंदा की. शिक्षा सलाहकार सी.आर. अब्रार ने परिवार से मिलकर संवेदना जताई और सरकारी मदद का भरोसा दिलाया. सरकार ने कहा कि दीपू की मौत "घिनौना अपराध" थी और ऐसी हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है. परिवार के पुनर्वास के लिए लंबे समय तक आर्थिक सहायता का वादा किया गया. अब 25 लाख टका (करीब 17-18 लाख रुपये) की राशि से परिवार को पक्का घर बनाने में मदद मिलेगी. यह कदम परिवार की भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है.

आरोपियों की गिरफ्तारी

हत्या के बाद रैपिड एक्शन बटालियन (RAB) ने कई लोगों को गिरफ्तार किया. अंतरिम सरकार ने पारदर्शी जांच का वादा किया. यह घटना 2025 में बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की बढ़ती घटनाओं का हिस्सा है. भारत में भी इस पर विरोध प्रदर्शन हुए और पश्चिम बंगाल के नेता सुवेंदु अधिकारी ने परिवार को मदद देने की बात कही. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई गई, जिसमें अमेरिका और ब्रिटेन के सांसदों ने जांच की मांग की.

परिवार के लिए उम्मीद की किरण

दीपू की मौत ने परिवार को तोड़ दिया, लेकिन सरकार की इस मदद से उन्हें नई शुरुआत मिल सकती है. अंतरिम सरकार का यह फैसला दिखाता है कि वह अल्पसंख्यक सुरक्षा और न्याय को गंभीरता से ले रही है. हालांकि, कई लोग पूछ रहे हैं कि क्या ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए और मजबूत कदम उठाए जाएंगे. बांग्लादेश में राजनीतिक बदलाव के बाद हिंसा की ऐसी घटनाएं चिंता का विषय बनी हुई हैं, लेकिन परिवार को मिली यह सहायता कम से कम एक सकारात्मक कदम है.

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