डीपफेक वीडियो को लेकर सरकार हुई सख्त, सोशल मीडिया कंपनियों को 3 घंटे के भीतर हटाने होंगे कंटेंट

भारत सरकार ने डीपफेक और एआई से बने कंटेंट पर सख्त कदम उठाया है. उन्होंने सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को आपत्तिजनक या भ्रामक डीपफेक कंटेंट को जल्द से जल्द हटाने का आदेश दिया है.

Sonee Srivastav

नई दिल्ली: भारत सरकार ने डीपफेक और एआई से बनी सामग्री के दुरुपयोग को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए हैं. अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को आपत्तिजनक या भ्रामक डीपफेक कंटेंट को बहुत कम समय में हटाना होगा. नए नियमों से ऑनलाइन दुनिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और लोगों को गुमराह करने वाली सामग्री पर रोक लगेगी. 

नए नियमों की मुख्य बातें

सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी नियमों में बदलाव किए हैं, जिनमें एआई या कंप्यूटर से बनी सामग्री को 'सिंथेटिक जेनरेटेड इंफॉर्मेशन' कहा गया है. इसमें डीपफेक वीडियो, फोटो या ऑडियो शामिल हैं जो असली जैसी दिखती है.

प्लेटफॉर्म्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी सामग्री पर साफ-साफ लेबल लगा हो. लेबल इतना बड़ा होना चाहिए कि वह वीडियो या इमेज के कम से कम 10% हिस्से पर दिखे. ऑडियो में शुरुआती 10% समय तक लेबल सुनाई देना जरूरी है.

उपयोगकर्ताओं को भी बताना होगा कि उन्होंने जो कंटेंट अपलोड किया है, वह एआई से बनाया या बदला गया है या नहीं. प्लेटफॉर्म्स को यूजर की घोषणा की जांच के लिए टूल्स लगाने होंगे. अगर कोई डीपफेक कंटेंट गैरकानूनी, हानिकारक या भ्रामक है, तो उसे जल्दी हटाना होगा. कुछ मामलों में 3 घंटे के अंदर कार्रवाई अनिवार्य है, ताकि नुकसान कम हो सके.

क्यों लिया गया सख्त फैसला?

डीपफेक का गलत इस्तेमाल बढ़ रहा है. इससे लोगों की छवि खराब होती है, फेक न्यूज फैलती है, चुनाव प्रभावित होते हैं और महिलाओं के खिलाफ गलत सामग्री बनाई जाती है. सरकार का कहना है कि इन नियमों से ऐसी सामग्री का दुरुपयोग रुकेगा. प्लेटफॉर्म्स अगर नियम नहीं मानेंगे तो उन्हें कानूनी सुरक्षा (सेक्शन 79) नहीं मिलेगी और जुर्माना या अन्य सजा हो सकती है.

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर असर 

फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स, यूट्यूब जैसी कंपनियों को अब ज्यादा जिम्मेदारी लेनी होगी. उन्हें ऑटोमैटिक टूल्स से कंटेंट चेक करना होगा और लेबल लगाना होगा. इससे फेक कंटेंट फैलना मुश्किल हो जाएगा. हालांकि कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि इससे अभिव्यक्ति की आजादी पर असर पड़ सकता है, लेकिन सरकार का मकसद सिर्फ हानिकारक सामग्री रोकना है.

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