असम विधानसभा चुनाव से पहले जारी हुई फाइनल वोटर लिस्ट, मसौदा सूची से हटाए गए 2.43 लाख नाम
असम के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ( CEO)के कार्यालय के द्वारा एक आधिकारिक प्रेस नोट के माध्यम से यह जानकारी दी गई है कि राज्य में विशेष पुनरीक्षण पुरा हो चुका है और अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित कर दी गई है. इस डेटा के मुताबिक अंतिम सूची में 2.43 लाख वोटर बाहर हो गए हैं.

नई दिल्ली : असम में चुनावी बिगुल बजने से पहले निर्वाचन आयोग ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया की सबसे महत्वपूर्ण तैयारी पूरी कर ली है. मंगलवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने राज्य की अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की, जिसने 2026 के विधानसभा चुनावों का रास्ता साफ कर दिया है. विशेष पुनरीक्षण अभियान के बाद सामने आई इस सूची में कई चौंकाने वाले बदलाव देखे गए हैं. सूची के शुद्धिकरण के दौरान बड़ी संख्या में संदिग्ध नामों को हटाया गया है ताकि आने वाले चुनावों में निष्पक्षता और पवित्रता बनी रहे.
मतदाता संख्या में बड़ी कटौती
आपको बता दें कि अंतिम सूची के आंकड़ों ने सबको हैरान कर दिया है. ड्राफ्ट सूची की तुलना में मतदाताओं की संख्या में 2.43 लाख से ज्यादा की कमी आई है. इससे पहले भी पुनरीक्षण के दौरान करीब 10.56 लाख नाम हटाए गए थे. कुल मिलाकर देखें तो इस पूरे अभियान के दौरान लगभग 13 लाख नाम वोटर लिस्ट से बाहर हुए हैं. अब राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या 2.49 करोड़ रह गई है. यह कटौती मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से की गई है.
लैंगिक समानता का शानदार उदाहरण
दरअसल, असम की नई मतदाता सूची में एक सुखद तस्वीर सामने आई है. राज्य में पुरुष और महिला मतदाताओं के बीच की खाई अब लगभग खत्म हो गई है. कुल 2.49 करोड़ मतदाताओं में से पुरुष 1.248 करोड़ और महिलाएं 1.247 करोड़ के आसपास हैं. इसके अलावा 343 थर्ड जेंडर मतदाता भी अपनी भागीदारी सुनिश्चित करेंगे. यह आंकड़ा दर्शाता है कि असम की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में आधी आबादी की हिस्सेदारी अब पुरुषों के बिल्कुल बराबर खड़ी है जो एक परिपक्व लोकतंत्र का सकारात्मक संकेत है.
घर-घर जाकर हुआ सत्यापन
निर्वाचन विभाग ने इस सूची को अंतिम रूप देने के लिए काफी पसीना बहाया है. 22 नवंबर से 20 दिसंबर 2025 तक पूरे प्रदेश में सघन सत्यापन अभियान चलाया गया. अधिकारियों ने घर-घर जाकर मतदाताओं की पहचान और उनके दस्तावेजों की जांच की. इसी जमीनी वेरिफिकेशन के आधार पर 27 दिसंबर को ड्राफ्ट सूची प्रकाशित की गई थी, जिसमें मतदाताओं की संख्या 2.52 करोड़ बताई गई थी. इस पूरी प्रक्रिया का मकसद केवल कागजी खानापूर्ति नहीं, बल्कि एक बेहद पुख्ता और भरोसेमंद डेटाबेस तैयार करना था.
जनता को मिला शिकायत दर्ज करने का पूरा मौका
ड्राफ्ट सूची आने के बाद आयोग ने जनता को अपनी शिकायतें दर्ज कराने का भरपूर मौका दिया था. मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या किसी सुधार के लिए दावा और आपत्ति विंडो खोली गई थी. मुख्य निर्वाचन अधिकारी के मुताबिक, आयोग की गाइडलाइंस का पालन करते हुए हर आवेदन की बारीकी से जांच की गई. संतुष्ट न होने वाले लोग जिला मजिस्ट्रेट के पास 15 दिनों में अपनी पहली अपील कर सकते हैं. दूसरी अपील का अवसर 30 दिनों के भीतर मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पास होगा.
2026 के महासमर की तैयारी
यह विशेष पुनरीक्षण अभ्यास केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि 2026 के विधानसभा चुनावों की ठोस नींव है. अधिकारियों का कहना है कि अब उनके पास एक साफ और पारदर्शी मतदाता डेटाबेस मौजूद है. इसी सूची के आधार पर राज्य का अगला राजनीतिक भविष्य तय होगा. निर्वाचन आयोग का लक्ष्य एक ऐसा चुनाव आयोजित करना है जिसमें हर वास्तविक नागरिक के मत का मूल्य सुरक्षित रहे. अब राजनीतिक दलों की निगाहें भी इस नई सूची और उसके बाद बनने वाली रणनीतियों पर टिक गई हैं.


