नरावणे की किताब पर बड़ा खुलासा! प्री-ऑर्डर मतलब पब्लिश नहीं... पेंगुइन ने दिया ऐसा जवाब
'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' पुष्तक को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है.प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने 24 घंटे के अंदर दूसरी बार सफाई दी है. उन्होंने साफ तौर से बुक पब्लिश का प्रोसेस समझाया है.

नई दिल्ली: पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की आत्मकथा 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है. राजनीतिक हंगामा, पुलिस जांच और सोशल मीडिया पर कथित लीक के बीच प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने 24 घंटे के अंदर दूसरी बार सफाई दी है.
कंपनी ने साफ कहा है कि पुस्तक अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है और प्री-ऑर्डर उपलब्ध होने का मतलब यह नहीं कि वह बाजार में बिक्री के लिए तैयार है.
विवाद की शुरुआत
यह मामला तब गरमा जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने संसद में दावा किया कि उन्हें जनरल नरवणे की अप्रकाशित पुस्तक मिली है. उन्होंने इसे दिखाया और कहा कि किताब में गलवान विवाद जैसे संवेदनशील मुद्दों का जिक्र है.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पहले कहा था कि ऐसी कोई किताब मौजूद नहीं है. राहुल गांधी ने पेंगुइन के पहले बयान पर सवाल उठाए और पुराने सोशल मीडिया पोस्ट का हवाला दिया. इससे लोकसभा में हंगामा हुआ और कई सांसदों को निलंबित किया गया.
पेंगुइन का दूसरा स्पष्टीकरण
पेंगुइन ने नए बयान में विस्तार से समझाया कि किताब की तीन अलग-अलग अवस्थाएं होती हैं. पहली- किताब की घोषणा, जिसमें सिर्फ बताया जाता है कि किताब आएगी. दूसरी- प्री-ऑर्डर, जो पाठकों को पहले से ऑर्डर करने की सुविधा देता है, लेकिन किताब अभी छपी नहीं होती. तीसरी- प्रकाशित किताब, जो तभी मानी जाती है जब वह दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खरीदने के लिए उपलब्ध हो.
कंपनी ने दोहराया कि 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' अभी प्रकाशित नहीं हुई है. कोई प्रिंट या डिजिटल कॉपी आधिकारिक रूप से जारी नहीं की गई. प्री-ऑर्डर और प्रकाशित स्थिति को एक नहीं माना जा सकता.
Statement from the Publisher. pic.twitter.com/WqLaptY7o7
— Penguin India (@PenguinIndia) February 10, 2026
पुलिस ने दर्ज की एफआईआर
दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया और कुछ वेबसाइटों पर किताब की पीडीएफ या प्री-प्रिंट कॉपी के प्रसार को लेकर एफआईआर दर्ज की है. पुलिस का कहना है कि पुस्तक को रक्षा मंत्रालय से जरूरी मंजूरी नहीं मिली थी.
जांच में पता चला कि कुछ प्लेटफॉर्म पर कवर ऐसे दिखाया जा रहा है जैसे किताब बिक्री के लिए तैयार हो. स्पेशल सेल इस बात की जांच कर रही है कि लीक कैसे हुआ और कौन जिम्मेदार है. पेंगुइन ने कहा है कि उनके पास ही प्रकाशन के एकमात्र अधिकार हैं और वे कॉपीराइट उल्लंघन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे.
जनरल नरवणे ने तोड़ी चुप्पी
जनरल नरवणे ने भी चुप्पी तोड़ी और पेंगुइन के बयान को साझा किया. उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति यही है कि किताब प्रकाशित नहीं हुई है. विवाद के बीच यह स्पष्ट हो रहा है कि किताब के संवेदनशील हिस्से लीक होने से राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल उठ रहा है. पेंगुइन का बार-बार स्पष्टीकरण दिखाता है कि वे स्थिति को साफ रखना चाहते हैं. अब जांच के नतीजे बताएंगे कि आगे क्या होता है.


