यह स्टेटस है...पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल नरवणे ने पेंगुइन का बयान शेयर कर अप्रकाशित किताब पर तोड़ी चुप्पी

पूर्व सेना प्रमुख नरवणे की अप्रकाशित किताब 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' पर विवाद तेज. पेंगुइन ने कहा—किताब अभी प्रकाशित नहीं, कोई कॉपी सार्वजनिक नहीं. राहुल गांधी ने सदन में हवाला देकर सरकार पर हमला बोला. प्रकाशक ने कॉपीराइट उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी. पुलिस ने एफआईआर दर्ज की.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

नई दिल्लीः पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' को लेकर मचा विवाद अब और गहरा गया है. प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने सोमवार को स्पष्ट बयान जारी कर कहा कि किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई है और न ही कोई प्रिंट या डिजिटल कॉपी सार्वजनिक की गई है. कंपनी ने चेतावनी दी कि सर्कुलेशन में कोई भी संस्करण कॉपीराइट उल्लंघन माना जाएगा और कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

विवाद की शुरुआत

विवाद तब भड़का जब लोकसभा में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बजट सत्र के दौरान इस किताब का जिक्र किया. उन्होंने कुछ हिस्सों का हवाला देकर सरकार पर आरोप लगाए, जिससे सदन में हंगामा मच गया. राहुल गांधी ने दावा किया कि किताब में कुछ असुविधाजनक बातें हैं, जो सरकार और प्रधानमंत्री के लिए परेशानी का सबब बनी हैं. उन्होंने कहा कि या तो नरवणे झूठ बोल रहे हैं या पेंगुइन, लेकिन पूर्व सेना प्रमुख पर उन्हें ज्यादा भरोसा है.

राहुल ने यह भी कहा कि किताब अमेजन पर उपलब्ध है और नरवणे ने 2023 में खुद ट्वीट कर बताया था कि किताब 'अभी उपलब्ध' है. हालांकि, पेंगुइन ने मंगलवार को दूसरा बयान जारी कर स्पष्ट किया कि घोषित किताब, प्री-ऑर्डर और प्रकाशित किताब अलग-अलग चीजें हैं. किताब तभी प्रकाशित मानी जाती है, जब वह रिटेल चैनलों पर खरीदने के लिए उपलब्ध हो.

पेंगुइन का आधिकारिक बयान

पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने कहा, "हमारे पास 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' के एकमात्र प्रकाशन अधिकार हैं. किताब अभी प्रकाशन के चरण में नहीं पहुंची है. प्रिंट या डिजिटल रूप में कोई कॉपी प्रकाशित, वितरित, बेची या सार्वजनिक नहीं की गई है." कंपनी ने कहा कि मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पर सर्कुलेट हो रही कोई भी कॉपी गैरकानूनी है और वे कानूनी कदम उठाएंगे.

किताब कहां पहुंची?

विवाद बढ़ने के साथ सवाल उठ रहे हैं कि अगर किताब प्रकाशित नहीं हुई, तो राहुल गांधी के पास हार्डबाउंड कॉपी कैसे आई? कुछ रिपोर्ट्स में दावा है कि किताब की कुछ प्रति बुकस्टोर्स में पहुंच गई थीं, लेकिन पेंगुइन ने इसे खारिज किया. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने सोशल मीडिया पर मैन्युस्क्रिप्ट के प्रसार को लेकर एफआईआर दर्ज की है. पुलिस इसे कॉपीराइट उल्लंघन और संवेदनशील जानकारी लीक मान रही है. किताब को रक्षा मंत्रालय से मंजूरी नहीं मिली थी.

राजनीतिक रंग

यह मामला लोकसभा में हंगामे का कारण बना. विपक्ष सरकार पर दबाव बना रहा है कि किताब में क्या लिखा है, जबकि सरकार का कहना है कि किताब का कोई वजूद नहीं. नरवणे ने कहा कि उनकी जिम्मेदारी किताब लिखने तक थी, मंजूरी प्रकाशक की थी.
 

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