नरवणे की किताब को लेकर राहुल गांधी ने कहा- 'पूर्व सेना प्रमुख झूठ नहीं बोल रहे'

राहुल गांधी ने पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल मनोज नरवणे की किताब को लेकर एक बार फिर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि अब यह जनता और मीडिया को तय करना है कि सच क्या है क्या पेंगुइन की बात सही मानी जाए या फिर जनरल नरवणे के दावे को.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल मनोज नरवणे की किताब को लेकर एक बार फिर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है. राहुल गांधी ने कहा कि इस पूरे मामले में दो अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि, 'या तो जनरल नरवणे पर विश्वास किया जाए या फिर पेंगुइन पर. साफ है कि मैं जनरल नरवणे की बात पर ही भरोसा करूंगा.'

किताब के प्रकाशित और बिक्री की उपलब्धता का जिक्र 

राहुल गांधी ने मीडिया के सामने जनरल नरवणे का एक पुराना सोशल मीडिया पोस्ट भी दिखाया. उन्होंने बताया कि इस पोस्ट में जनरल नरवणे ने खुद लिखा था कि उनकी किताब उपलब्ध है और उसे खरीदने के लिए लिंक को फॉलो किया जा सकता है. राहुल गांधी के मुताबिक, यह पोस्ट साल 2023 का है. इसमें किताब के प्रकाशित होने और बिक्री के लिए उपलब्ध होने की बात कही गई थी.

कांग्रेस सांसद ने कहा कि मौजूदा विवाद में वह यह नहीं मानते कि कोई जानबूझकर झूठ बोल रहा है. उनके अनुसार, पेंगुइन पब्लिशिंग का कहना है कि किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई है, जबकि दूसरी ओर किताब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अमेज़न पर उपलब्ध बताई जा रही है. राहुल गांधी ने इस विरोधाभास की ओर इशारा करते हुए कहा कि जब जनरल नरवणे जैसे वरिष्ठ सैन्य अधिकारी यह कह चुके हैं कि किताब उपलब्ध है तो वह उनकी बात पर अधिक भरोसा करेंगे, क्योंकि वे देश के आर्मी चीफ रह चुके हैं और उनकी विश्वसनीयता पर सवाल नहीं उठाया जा सकता.

राहुल गांधी ने क्या कहा?

राहुल गांधी ने आगे कहा कि जनरल नरवणे ने अपनी किताब में एक ऐसा बयान दिया है, जो भारत सरकार और प्रधानमंत्री के पक्ष में नहीं जाता. इसी वजह से यह पूरा विवाद खड़ा हुआ है. उन्होंने कहा कि अब यह जनता और मीडिया को तय करना है कि सच क्या है क्या पेंगुइन की बात सही मानी जाए या फिर जनरल नरवणे के दावे को.

बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने एक पोस्टर की ओर इशारा करते हुए यह भी कहा कि अमेरिका के साथ जो ट्रेड डील हुई है, वह इसी बड़े घटनाक्रम का हिस्सा है. उन्होंने कहा कि इन तमाम मुद्दों को अलग-अलग करके देखने के बजाय समग्र रूप से समझने की जरूरत है. उनके मुताबिक, जनरल नरवणे की किताब, अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और अन्य चर्चित मामलों पर जो बहस चल रही है, उसके पीछे असली मुद्दों को समझना ज्यादा अहम है.

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