बंधुआ श्रम उन्मूलन दिवस पर श्रम मंत्री का संकल्प, बाल मजदूरी खत्म करने का आह्वान
बंधुआ श्रम उन्मूलन दिवस पर श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने बाल और बंधुआ मजदूरी को खत्म करने के लिए संवेदनशील प्रशासन व प्रभावी कार्ययोजना पर जोर दिया.

बंधुआ श्रम उन्मूलन दिवस के अवसर पर श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि आज यह संकल्प लेने का समय है कि यदि आने वाले वर्ष में हम गर्व के साथ यह कह सकें कि राज्य में बाल श्रम या बंधुआ मजदूरी का एक भी मामला सामने नहीं आया, तो वह एक बड़ी उपलब्धि होगी. उन्होंने कहा कि किसी भी नीति या कार्ययोजना से पहले यह आत्ममंथन जरूरी है कि समाज और प्रशासन की संवेदनशीलता का स्तर क्या है.
बंधुआ श्रम पर क्या बोले मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल?
उन्होंने कहा कि यह तय करना होगा कि किन हालात में कोई व्यक्ति बंधुआ श्रम का शिकार होता है, तभी प्रभावी समाधान संभव है. श्रम मंत्री कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (मिंटो हॉल) में ‘बंधुआ प्रथा उन्मूलन’ और ‘नई चार श्रम संहिताओं’ पर आधारित कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे. इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उन्होंने राज्य स्तरीय एक्शन प्लान का विमोचन भी किया.
प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि बच्चे सबसे अधिक आसानी से इन परिस्थितियों की चपेट में आ जाते हैं. जब कोई परिवार रोज़गार की तलाश में एक स्थान से दूसरे स्थान पर प्रवास करता है तो बच्चों की पढ़ाई बाधित हो जाती है. पढ़ाई छूटने के बाद वे किसी न किसी काम में लग जाते हैं, जो आगे चलकर बाल श्रम का रूप ले लेता है. उन्होंने इसे बाल श्रम की बड़ी वजह बताया.
मंत्री ने जोर देकर कहा कि इन समस्याओं से निपटने के लिए एक संवेदनशील और सक्रिय प्रशासनिक तंत्र का निर्माण बेहद आवश्यक है. यदि व्यवस्था मानवीय दृष्टिकोण से काम करेगी, तभी पीड़ितों तक वास्तविक मदद पहुंचाई जा सकेगी.
खतरनाक व अति-खतरनाक कारखानों की श्रेणियों में सुधार की आवश्यकता
उन्होंने खतरनाक और अति-खतरनाक कारखानों की श्रेणियों में सुधार की आवश्यकता पर भी बात रखी. उनका कहना था कि बाल श्रम को केवल काम के आधार पर नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और समग्र कल्याण के नजरिए से परिभाषित किया जाना चाहिए. साथ ही, चार नई श्रम संहिताओं के दीर्घकालिक लाभों की भी जानकारी दी. उन्होंने यह भी कहा कि कई बार बच्चे अपने ही परिवार की दुकान या व्यवसाय में मदद करते हैं. ऐसे मामलों में बाल श्रम को समझने के लिए नए दृष्टिकोण की जरूरत है.
कार्यशाला में बाल संरक्षण विशेषज्ञ और मध्य प्रदेश में यूनिसेफ प्रमुख विलियम हैनलोन ने बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 से जुड़ी कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की. श्रम सचिव रघुराज राजेन्द्रन ने कार्यक्रम की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला, जबकि श्रमायुक्त तन्वी हुड्डा ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत की.
कार्यक्रम के दौरान राज्य एक्शन प्लान, बंधुआ श्रम (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 के 50 वर्षों की उपलब्धियों और चुनौतियों, साथ ही नई चार श्रम संहिताओं वेतन, सामाजिक सुरक्षा और औद्योगिक संबंध संहिता पर प्रेजेंटेशन के माध्यम से विचार-विमर्श किया गया. अंत में परिचर्चा आयोजित हुई.
श्रम स्टार रेटिंग प्रमाण पत्र किए गए प्रदान
इस मौके पर श्रमिकों के कल्याण, सुरक्षा और श्रम कानूनों के बेहतर अनुपालन के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रतिष्ठानों बीपीसीएल बीना रिफाइनरी, आईनॉक्स एयर प्रोडक्ट्स गोविंदपुरा और एचईजी लिमिटेड भोपाल को श्रम मंत्री द्वारा श्रम स्टार रेटिंग प्रमाण पत्र प्रदान किए गए.


