विवाद से पहले जिम में आते थे 150 लोग, अब सिर्फ 15 क्लाइंट...उत्तराखंड के मोहम्मद दीपक का छलका दर्द

उत्तराखंड के कोटद्वार में जिम मालिक दीपक कुमार ने 26 जनवरी को 70 वर्षीय मुस्लिम दुकानदार की भीड़ से रक्षा की और खुद को 'मोहम्मद दीपक' बताया. वीडियो वायरल होने पर राहुल गांधी ने 'नायक' कहा, लेकिन स्थानीय बहिष्कार से जिम के सदस्य 150 से घटकर 15 रह गए. परिवार मां की चाय दुकान पर निर्भर, धमकियां मिलीं.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

देहरादूनः उत्तराखंड के कोटद्वार में एक जिम मालिक दीपक कुमार अब आर्थिक बहिष्कार की मार झेल रहे हैं. 26 जनवरी को उन्होंने एक 70 वर्षीय मुस्लिम दुकानदार वकील अहमद (या मोहम्मद शोएब) की भीड़ से रक्षा की थी. भीड़ ने दुकान के नाम 'बाबा स्कूल ड्रेस' पर आपत्ति जताई थी और 'बाबा' शब्द हटाने की मांग की. दीपक ने हस्तक्षेप किया और जब भीड़ ने उनका नाम पूछा, तो उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि मेरा नाम मोहम्मद दीपक है.

वीडियो वायरल

यह घटना बद्रीनाथ रोड पर हुई. भीड़ ने दावा किया कि 'बाबा' नाम से सिद्धबली बाबा मंदिर के साथ भ्रम होता है. स्थानीयों ने बताया कि इलाके में कई दुकानें 'बाबा' इस्तेमाल करती हैं, लेकिन सिर्फ इस दुकानदार को निशाना बनाया गया. वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैला, जहां दीपक को बहादुरी के लिए सराहा गया. राहुल गांधी ने उन्हें भारत का नायक कहा. सीपीआई(एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने कोटद्वार जाकर जिम में सदस्यता ली और समर्थन जताया.

बहिष्कार की मार

लेकिन स्थानीय स्तर पर नकारात्मक असर पड़ा. दीपक के हल्क जिम में पहले 150 सदस्य थे, अब सिर्फ 15 बचे हैं. जिम किराए पर है, हर महीने 40,000 रुपये किराया और 16,000 रुपये गृह ऋण की किस्त. परिवार अब दीपक की 70 वर्षीय मां की चाय की दुकान पर निर्भर है. दीपक कहते हैं कि लोग अच्छे काम की तारीफ नहीं करते, ईमानदारी की कीमत चुकानी पड़ती है. कई परिवार अब बच्चों को जिम भेजने से डरते हैं.

राजनीतिक बयानबाजी

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विपक्ष पर 'तुष्टीकरण' का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस उन लोगों का समर्थन करती है जो 'पवित्र हिंदू नामों' से पहले 'मोहम्मद' लगाते हैं. धामी ने इसे तुष्टीकरण की राजनीति बताया.

धमकियां और कानूनी कार्रवाई

दीपक को ऑनलाइन ट्रोलिंग, धमकियां मिलीं. एक व्यक्ति ने उनकी हत्या के लिए 2 लाख रुपये का इनाम घोषित किया. पुलिस ने तीन एफआईआर दर्ज कीं एक दीपक के खिलाफ भी. दीपक कहते हैं कि वे इंसानियत के लिए खड़े हुए, धर्म के नाम पर नहीं. दुकानदार ने भी उनका शुक्रिया अदा किया और कहा कि दीपक ने उन्हें पिता की तरह बचाया.

यह घटना उत्तराखंड में बढ़ते सांप्रदायिक तनाव को दिखाती है. दीपक जैसे लोग जो इंसानियत के लिए आवाज उठाते हैं, उन्हें आर्थिक और सामाजिक नुकसान झेलना पड़ता है. सोशल मीडिया पर समर्थन मिला, लेकिन स्थानीय बहिष्कार ने उनकी जिंदगी मुश्किल कर दी. दीपक उम्मीद करते हैं कि लोग एकता और न्याय के लिए खड़े होंगे.

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