हिंदू युवक बना 'मोहम्मद', कोटद्वार में ऐसे टला बड़ा सांप्रदायिक बवाल ....जानें क्या है पूरा मामला

उत्तराखंड का कोटद्वार शहर में हाल की एक घटना ने पूरे देश का ध्यान खींचा है. यह घटना किसी बड़े आंदोलन या राजनीतिक विरोध से जुड़ी नहीं थी, बल्कि एक दुकान के नाम को लेकर हुए विवाद से जुड़ी थी, जो कुछ ही घंटों में एक बड़े संघर्ष में बदल सकता था.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

कोटद्वार: उत्तराखंड का कोटद्वार शहर अब तक शांति, आपसी सौहार्द और सांप्रदायिक सौहार्द के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन हाल ही में यहां हुई एक घटना ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. मामला किसी बड़े आंदोलन या राजनीतिक प्रदर्शन का नहीं था, बल्कि एक दुकान के नाम को लेकर उपजे तनाव का था, जो कुछ ही घंटों में बड़े टकराव का रूप ले सकता था.

इसी तनावपूर्ण माहौल में एक हिंदू युवक दीपक कुमार ने ऐसा कदम उठाया, जिसने हालात को और बिगड़ने से रोकने में अहम भूमिका निभाई. उन्होंने खुद को "मोहम्मद दीपक" बताकर जो कहा, वह अब सोशल मीडिया से लेकर सियासी बहस तक का विषय बन चुका है. यह कहानी उसी पल की है, जब गुस्सा, भीड़ और अपमान के बीच एक फैसले ने पूरे घटनाक्रम की दिशा बदल दी.

कैसे बिगड़ा कोटद्वार का माहौल?

दीपक कुमार बताते हैं कि उस दिन देहरादून से करीब डेढ़ से दो सौ लोगों का एक समूह कोटद्वार पहुंचा. अचानक माहौल बदल गया. नारेबाजी शुरू हुई, गालियां दी जाने लगीं और हालात तेजी से तनावपूर्ण होते चले गए.

वे कहते हैं,"मेरे साथ चार-पांच लड़के थे, सामने संख्या बहुत ज्यादा थी. तीन-चार घंटे तक लगातार गाली-गलौज होती रही. मां-बहन की गालियां दी गईं, मेरी फैमिली तक को नहीं छोड़ा गया."

दीपक के मुताबिक, उस समय स्थिति इतनी नाजुक थी कि किसी भी छोटी सी चिंगारी से बड़ा बवाल खड़ा हो सकता था.

दुकान के नाम से शुरू हुआ पूरा विवाद

पूरा विवाद "बाबा स्कूल ड्रेस एंड मैचिंग सेंटर" नाम की दुकान को लेकर शुरू हुआ. दुकान के मालिक वकील अहमद, जिनकी उम्र करीब 70 साल है, उनसे जबरन दुकान का नाम बदलने का दबाव बनाया जा रहा था.

दीपक कहते हैं,"उनकी उम्र देखिए. करीब सत्तर साल के आदमी से इस तरह की बदतमीजी हो रही थी. न कोई सरकारी कागज, न कोई नोटिस-बस दबाव कि दुकान का नाम बदल लो." उनका कहना है कि इस तरह किसी बुजुर्ग को अपमानित होते देखना उन्हें गलत लगा.

गलत सामने हो तो चुप रहना भी गलती है

दीपक मानते हैं कि आज के समय में लोग अक्सर दूसरों के झगड़े से दूरी बना लेते हैं, लेकिन उस दिन उनसे चुप नहीं रहा गया.
वे कहते हैं,''गलत जब आंखों के सामने हो रहा हो, तो चुप रहना भी एक तरह की गलती होती है."
उन्होंने भीड़ से सवाल किया कि अगर नाम बदलवाना है, तो उसका सरकारी आदेश कहां है? बिना किसी दस्तावेज के किसी को मजबूर कैसे किया जा सकता है?

जब पूछा गया नाम, तब लिया बड़ा फैसला

बहस तेज हो चुकी थी और हालात लगातार बिगड़ रहे थे. इसी दौरान दीपक से उनका नाम पूछा गया. यही वह पल था, जिसने पूरी कहानी को नया मोड़ दे दिया.दीपक बताते हैं,"मैंने उस वक्त कहा मेरा नाम मोहम्मद दीपक है."

यह सुनते ही वहां मौजूद कई लोग चौंक गए और कुछ सेकंड के लिए माहौल थम सा गया.

न धर्म बदला, न पहचान छुपाई

दीपक साफ करते हैं कि उन्होंने न तो अपना धर्म बदला और न ही अपनी असली पहचान छुपाई.
वे कहते हैं,"मेरा असली नाम दीपक कुमार है और मैं हिंदू हूं. लेकिन उस वक्त मुझे लगा कि सामने वाले सिर्फ एक ही कौम को टारगेट कर रहे हैं. मैंने सोचा, अगर खुद को उसी पहचान से जोड़ दूं, तो शायद उन्हें एहसास हो कि वे क्या कर रहे हैं."

उनके मुताबिक, यह किसी को डराने या उकसाने की कोशिश नहीं थी, बल्कि हालात को संभालने का एक तरीका था.

मैं हिंदू हूं, लेकिन पहले हिंदुस्तानी

दीपक कहते हैं,"मैं हिंदू हूं और मुझे अपने धर्म पर गर्व है, लेकिन उससे पहले मैं हिंदुस्तानी हूं."
उनका कहना है कि इस देश में हिंदू, मुसलमान, सिख और ईसाई सभी रहते हैं और अगर हम एक-दूसरे को ही दुश्मन मान लेंगे, तो देश कैसे चलेगा.

टकराव टला, लेकिन खतरा बना रहा

दीपक मानते हैं कि हालात पूरी तरह शांत नहीं हुए, लेकिन टकराव उस स्तर तक नहीं पहुंचा, जहां जान-माल का नुकसान हो सकता था.वे कहते हैं,"अगर उस वक्त और उकसावा होता, तो कुछ भी हो सकता था. मैंने बस कोशिश की कि माहौल और न बिगड़े."

सोशल मीडिया पर शुरू हुआ 'दूसरा दौर'

घटना के बाद मामला सोशल मीडिया तक पहुंच गया. कोई दीपक को कांग्रेस समर्थक बता रहा था, तो कोई उन्हें मुस्लिम संगठनों से जोड़ने लगा.इस पर दीपक कहते हैं,"लोग अपनी सुविधा के हिसाब से कहानी बना रहे हैं. मेरा किसी राजनीतिक दल या संगठन से कोई लेना-देना नहीं है."

FIR, जांच और सवाल

इस पूरे मामले में दीपक के खिलाफ भी FIR दर्ज हुई है. वे सवाल उठाते हैं,"हमने कौन सा गुनाह किया? हमने तो एक बुजुर्ग की मदद की और गलत का विरोध किया."

पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और अज्ञात लोगों के खिलाफ कार्रवाई पर भी विचार किया जा रहा है.

आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ा

विवाद का असर दीपक की रोज़ी-रोटी पर भी पड़ा है. उनका जिम कई दिनों से बंद है, जो किराए की जगह पर चलता है.वे बताते हैं,"हर महीने करीब 50 हजार रुपये किराया जाता है. तीन-चार दिन में ही बड़ा नुकसान हो गया." घर में मां, पत्नी और पांच साल की बेटी हैं. मां छोटी सी चाय की दुकान चलाती हैं. दीपक कहते हैं,"अपने बारे में तो आदमी झेल लेता है, लेकिन परिवार के लिए डर लगता है."

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