संसद में दूसरे दिन भी हंगामा, राहुल गांधी की स्पीच के दौरान चेयर पर उछाले गए कागज

लोकसभा में राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख नरवणे की अप्रकाशित किताब 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' के हवाले से 2020 चीन तनाव पर सवाल उठाए. सत्ता पक्ष ने विरोध किया, स्पीकर ने नियम 349 से रोका, भारी हंगामा हुआ और सदन स्थगित हो गया.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

नई दिल्लीः लोकसभा में जारी बजट सत्र के दौरान पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा को लेकर तीखा विवाद छिड़ गया है. यह किताब 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' के नाम से जानी जाती है, जिसमें 2020 के भारत-चीन सीमा विवाद और गलवान घाटी घटना पर कुछ संवेदनशील विवरण बताए गए हैं. विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सदन में इस किताब के कुछ अंशों (एक मैगजीन आर्टिकल के हवाले से) का जिक्र किया, जिससे सरकार पक्ष भड़क उठा और सदन में भारी हंगामा हो गया.

सदन में हंगामा

सत्र की शुरुआत में ही प्रश्नकाल के दौरान विपक्षी सांसद वेल में उतर आए. सपा, टीएमसी और कांग्रेस के सदस्यों ने जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी, जिसके कारण प्रश्नकाल बिल्कुल नहीं चल सका. सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी. हंगामा बढ़ता देख अध्यक्ष ने सदन को बार-बार शांत करने की कोशिश की, लेकिन माहौल बिगड़ता ही गया.

राहुल गांधी ने जब बोलना शुरू किया तो उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा उठाया. उन्होंने पूर्व सेना प्रमुख की किताब का हवाला देते हुए कहा कि यह चीन के साथ पूर्वी लद्दाख में हुई घटनाओं से जुड़ा है. राहुल ने आरोप लगाया कि भारतीय सैनिकों की कुर्बानी के बावजूद सरकार ने स्थिति को सही से नहीं संभाला. उन्होंने किताब के एक हिस्से का जिक्र किया, जिसमें कथित तौर पर चीनी टैंकों की घुसपैठ और भारतीय सेना की तैयारियों का वर्णन है.

अध्यक्ष का हस्तक्षेप 

जैसे ही राहुल ने किताब के अंश पढ़ने शुरू किए, सत्ता पक्ष के मंत्री किरेन रिजिजू, राजनाथ सिंह और अमित शाह खड़े हो गए. उन्होंने आपत्ति जताई कि अप्रकाशित किताब के हवाले से सदन को गुमराह किया जा रहा है. अध्यक्ष कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी (या ओम बिरला, जैसा कि कुछ रिपोर्ट्स में) ने संसद के नियम 349 का हवाला देते हुए राहुल को रोका. इस नियम के तहत अप्रकाशित सामग्री या किताबों के उद्धरण पर रोक है, खासकर जब वे सदन की कार्यवाही से सीधे जुड़े न हों.

राहुल ने विरोध जताते हुए कहा कि मुझे बोलने क्यों नहीं दिया जा रहा? मैं विपक्ष का नेता हूं. यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है. लेकिन अध्यक्ष ने एक-एक करके अन्य सांसदों के नाम पुकारे और बहस को आगे बढ़ाने की कोशिश की. विपक्षी सदस्यों ने राहुल का समर्थन करते हुए कागज उछाले और नारेबाजी की.

अध्यक्ष की फटकार

हंगामे के बीच किसी सदस्य ने अध्यक्ष को 'यार' कहकर संबोधित किया, जिस पर अध्यक्ष ने सख्त फटकार लगाई. उन्होंने कहा कि यह संसद है, यहां ऐसी भाषा शोभा नहीं देती. यह घटना सदन के मर्यादित माहौल को और बिगाड़ने वाली साबित हुई.

विवाद का मूल

यह पूरा विवाद इसलिए गहरा गया क्योंकि किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई है और रक्षा मंत्रालय से मंजूरी लंबित है. विपक्ष का कहना है कि सरकार किताब छिपा रही है क्योंकि इसमें मोदी सरकार की चीन नीति पर सवाल उठाए गए हैं. सत्ता पक्ष इसे सदन की गरिमा के खिलाफ बताता है.

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