लालच देकर बच्ची को कमरे में बुलाया, गैंगरेप के बाद उतार दिया मौत के घाट...अब कोर्ट ने 3 मजदूरों को सुनाई फांसी की सजा

कर्नाटक हाईकोर्ट ने मंगलुरु में सात साल की मासूम बच्ची के साथ हुए क्रूर गैंगरेप और हत्या के मामले में तीन दोषियों को दी गई मौत की सजा को बरकरार रखा है. कोर्ट ने इसे सबसे दुर्लभ मामलों में से एक बताया और कहा कि यह क्रूरता समाज की अंतरात्मा को झकझोर देने वाली है.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

बेंगलुरु : कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक बेहद दिल दहला देने वाले मामले में सख्त फैसला सुनाया है. फरवरी 2026 में न्यायमूर्ति एचपी संदेश और वेंकटेश नायक टी की खंडपीठ ने मंगलुरु के विशेष पोक्सो अदालत द्वारा तीन मजदूरों को सुनाई गई फांसी की सजा को सही ठहराया. यह अपराध नवंबर 2021 में हुआ था, जब एक सात साल की बच्ची को लालच देकर कमरे में ले जाकर सामूहिक बलात्कार किया गया और फिर गला दबाकर मार डाला गया. कोर्ट ने इसे क्रूर और अमानवीय करार देते हुए कहा कि ऐसे अपराधों पर लोहे के हाथों से रोकथाम जरूरी है, ताकि समाज में सही संदेश जाए.

टाइल फैक्ट्री में हुई थी घटना 

आपको बता दें कि यह घटना मंगलुरु के बाहरी इलाके में एक टाइल फैक्ट्री में हुई. पीड़िता के माता-पिता प्रवासी मजदूर थे और वही काम करते थे. तीनों दोषी भी उसी फैक्ट्री में काम करते थे. बच्ची मात्र सात साल सात महीने की थी. आरोपियों ने महीनों से योजना बनाई थी. वे उसे मिठाई और कैंडी दिखाकर बहकाकर बिना सीसीटीवी वाले कमरे में ले गए. 

एक-एक कर बच्ची से किया बलात्कार 

जिसके बाद बच्ची को एक-एक करके क्रूर तरीके से बलात्कार किया गया. जब वह चीखने लगी तो मुंह दबाया और गला दबाकर उसकी हत्या कर दी. मौके पर ही बच्ची की मौत हो गई. चारों ने शव को नाले में फेंक दिया और ईंटों से ढक दिया. एक आरोपी मुकदमे के दौरान जमानत पर फरार हो गया. पोक्सो अदालत ने 2024 में तीनों को दोषी ठहराया था.

कोर्ट ने सुनाया कड़ा फैसला

हाईकोर्ट ने कहा कि सबूतों की मजबूत श्रृंखला से दोष साबित हुआ है. फोरेंसिक रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान और मेडिकल सबूतों से पूर्व नियोजन और सामूहिक अपराध साफ दिखता है. कोर्ट ने इसे समाज के खिलाफ अपराध माना और कहा कि कम सजा देने से ऐसे जघन्य अपराध बढ़ेंगे.  दोषियों की उम्र युवा होने को छोड़कर कोई खास दया का आधार नहीं मिला. संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का सम्मान करते हुए सुप्रीम कोर्ट के सिद्धांतों के आधार पर फैसला लिया गया. कोर्ट ने माना कि बच्चों या असहाय महिलाओं के खिलाफ अत्यधिक क्रूर अपराधों में मौत की सजा ही उचित है.

बढ़ते यौन अपराधों पर कड़ी चेतावनी

 यह फैसला बच्चों के खिलाफ बढ़ते यौन अपराधों पर कड़ी चेतावनी है. कोर्ट ने जोर दिया कि ऐसे मामलों में कठोर सजा से समाज में डर पैदा होगा और अपराध रुकेंगे. पीड़िता की मासूमियत और अपराध की बर्बरता को देखते हुए सजा बरकरार रखना जरूरी था.

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