हम किसी एक स्रोत पर निर्भर नहीं...रूस से तेल आयात घटाने पर विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने क्या कहा?

विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा कि भारत ऊर्जा सुरक्षा के लिए कई स्रोतों से तेल आयात जारी रखेगा और विविधता बनाए रखेगा. अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के तहत ट्रम्प के दबाव के बावजूद राष्ट्रीय हित सर्वोपरि रहेगा. रूस से आयात घटकर 25% से कम हुआ, अमेरिका से बढ़ा. विपक्ष सरकार पर हमला कर रहा है.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

नई दिल्लीः नई दिल्ली में विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने सोमवार को स्पष्ट किया कि भारत ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए कई स्रोतों से तेल आयात करेगा और जरूरत पड़ने पर स्रोतों में विविधता लाएगा. यह बयान अमेरिका के साथ चल रहे व्यापार समझौते के तहत रूसी कच्चे तेल की खरीद पर उठ रहे विवाद के बीच आया है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को एक कार्यकारी आदेश जारी किया, जिसमें भारतीय निर्यात पर 25% का दंडात्मक टैरिफ हटाने की शर्त रखी गई कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर दे. ट्रंप ने कहा कि भारत ने रूसी तेल आयात बंद करने की प्रतिबद्धता जताई है और अमेरिका से ऊर्जा उत्पाद खरीदेगा. आदेश में चेतावनी दी गई कि अगर भारत दोबारा रूसी तेल खरीदता है, तो टैरिफ फिर से लगाया जा सकता है.

राष्ट्रीय हित सर्वोपरि

मिसरी ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा, “हमारा दृष्टिकोण आपूर्ति के कई स्रोत बनाए रखना और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए विविधता लाना है. जितने ज्यादा स्रोत, उतनी ज्यादा सुरक्षा.” उन्होंने जोर दिया कि सभी खरीद निर्णय राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखकर लिए जाएंगे. व्यावसायिक फैसले उपलब्धता, उचित मूल्य, विश्वसनीय आपूर्ति, जोखिम, लागत, रसद और कंपनियों की जिम्मेदारी पर आधारित होंगे.

विदेश सचिव ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ताओं में से एक है और वैश्विक बाजार में स्थिरता लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की प्राथमिकता उपभोक्ताओं को पर्याप्त ऊर्जा उचित मूल्य पर, विश्वसनीय और सुरक्षित आपूर्ति के जरिए उपलब्ध कराना है.

रूस से आयात में कमी

मिसरी ने बताया कि भारत दर्जनों देशों से कच्चा तेल आयात करता है और किसी एक स्रोत पर निर्भर नहीं है. बाजार की स्थिति के अनुसार स्रोतों का मिश्रण बदलना स्वाभाविक है. हाल के महीनों में रूस से तेल आयात घटकर 25% से कम रह गया है, जबकि अमेरिका से ऊर्जा आयात में 31% की बढ़ोतरी हुई है. दिसंबर 2025 में रूसी तेल खरीद 38 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई.

यूक्रेन युद्ध के बाद का बदलाव

2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच भारत ने रियायती रूसी तेल की खरीद बढ़ाई थी. रूसी तेल का हिस्सा 1% से बढ़कर 35-40% तक पहुंच गया था. भारत ने शुरू में अमेरिका और यूरोपीय दबाव का सामना किया, लेकिन कहा कि यह वैश्विक बाजार स्थिर करने का हिस्सा था. ट्रंप प्रशासन ने पिछले साल फिर दबाव बढ़ाया और भारत पर रूस की 'युद्ध मशीन' को फंड करने का आरोप लगाया.

विपक्ष का सरकार पर हमला

यह मुद्दा विपक्ष के लिए सरकार पर हमला करने का हथियार बन गया है. विदेश मंत्रालय ने हमेशा ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता बताई, जबकि वाणिज्य मंत्रालय व्यापार समझौते संभाल रहा है. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि वाणिज्य मंत्रालय डील देख रहा है, वहीं वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने विदेश मंत्रालय को रूस तेल पर बोलने को कहा.

मिसरी ने वैश्विक अनिश्चितताओं का जिक्र करते हुए कहा कि भारत और अन्य देशों का साझा हित स्थिर ऊर्जा कीमतों और सुरक्षित आपूर्ति में है. भारत की ऊर्जा का 85% आयात होता है, इसलिए मुद्रास्फीति और उपभोक्ता हितों की रक्षा सबसे बड़ा लक्ष्य है.
 

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