ईरान में फंसे भारतीयों का दूसरा बैच भारत लौटा, छात्रों ने सुनाई युद्ध के बीच बिताए खौफनाक दिनों की कहानी
युद्धग्रस्त ईरान में फंसे भारतीय छात्रों को लेकर दूसरी निकासी उड़ान देर रात नई दिल्ली पहुंची. बमबारी और डर के माहौल के बीच कई दिन गुजारने के बाद लौटे छात्रों ने अपने दर्दनाक अनुभव साझा किए.

नई दिल्ली: युद्धग्रस्त ईरान में फंसे भारतीय छात्रों को लेकर दूसरी वापसी उड़ान सोमवार देर रात नई दिल्ली पहुंच गई. आर्मेनिया की राजधानी येरेवन से दुबई में ठहराव के बाद यह उड़ान दर्जनों भारतीयों को लेकर इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरी. संघर्ष के कारण बंद हवाई मार्गों और बदलती परिस्थितियों के बीच यह वापसी यात्रा कई चरणों में पूरी की गई.
ईरान में लगातार हो रही बमबारी और असुरक्षा के माहौल के बीच छात्रों ने कई दिन भय के साये में बिताए. कई छात्रों ने बताया कि वे लगभग दो सप्ताह तक तहखानों में छिपकर रहे और बेहद मुश्किल हालात में अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करते रहे. भारत लौटने के बाद भी उनके लिए यह अनुभव किसी डरावने सपने से कम नहीं है.
कश्मीर लौटने की उम्मीद में छात्र
इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचे 23 वर्षीय छात्र लबीब कादरी ने कहा, "जब तक में कश्मीर में अपने परिवार से नहीं मिल लेता, तब तक मुझे घर लौटने जैसा महसूस नहीं होगा."
लबीब कादरी ईरान के उर्मिया विश्वविद्यालय से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि भारत लौटने से पहले उन्होंने पांच दिन लगातार यात्रा में बिताए और लगभग दो सप्ताह तक युद्ध के डर के बीच जीवन बिताया.
दुबई में देरी से और बढ़ी चिंता
छात्रों को लेकर आने वाली उड़ान को दुबई में भी परेशानी का सामना करना पड़ा. दुबई नागरिक उड्डयन प्राधिकरण द्वारा अस्थायी रूप से उड़ान संचालन निलंबित किए जाने के कारण येरेवन से दुबई के पहले चरण के बाद विमान को करीब 12 घंटे की देरी का सामना करना पड़ा.
छात्रों का यह समूह ईरान के अलग-अलग विश्वविद्यालयों से बसों के जरिए ईरान-आर्मेनिया सीमा तक पहुंचा. वहां से उन्होंने आर्मेनिया में प्रवेश किया और फिर येरेवन से दुबई के लिए उड़ान भरी. इसके बाद उन्होंने दिल्ली के लिए कनेक्टिंग फ्लाइट ली, क्योंकि 28 फरवरी से जारी युद्ध के बाद से ईरानी हवाई क्षेत्र बंद है.
बमबारी के बीच गुजरे भयावह दिन
अपने अनुभव साझा करते हुए लबीब कादरी ने कहा, "जब हम ईरान में थे, तब लगातार बमबारी हो रही थी. सीमा पार करते ही हमें लगा कि हम सुरक्षित हैं. दुबई में अपनी यात्रा के आखिरी पड़ाव पर पहुँचते ही हवाई अड्डे पर कई ड्रोन हमले हुए. हम पहले ईरान में और फिर दुबई में फँस गए. इसलिए मुझे अभी भी यकीन नहीं हो रहा कि हम भारत पहुँच गए हैं."
उन्होंने आगे बताया, "हम पूरी तरह से लॉकडाउन में थे और लगातार इस डर में जी रहे थे कि अगला बम हमारे हॉस्टल पर गिर सकता है."
दो हफ्ते तहखाने में छिपकर बिताए दिन
लबीब कादरी ने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद अधिकांश विदेशी छात्र अपने-अपने देशों लौट चुके थे.
"इराक, तुर्की और पाकिस्तान के सभी छात्र जा चुके थे. हम लगभग 45 भारतीय छात्र ही बचे थे. हम करीब दो सप्ताह तक तहखाने में रहे और मुश्किल से ही बाहर निकले. अगर हमें कोई बहुत जरूरी खरीदारी करनी होती थी, तो हम समूहों में बाहर जाते थे."
तेहरान से सुरक्षित स्थान पर किया गया स्थानांतरण
श्रीनगर की रहने वाली एक अन्य छात्रा, जो तेहरान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज से एमबीबीएस कर रही हैं, ने भी अपने अनुभव साझा किए. उन्होंने कहा कि शुरुआत में भारतीय दूतावास द्वारा उन्हें एक अपेक्षाकृत सुरक्षित स्थान पर स्थित होटल में शिफ्ट किया गया था.
"यह बेहद भयावह था. भारतीय दूतावास ने हमें तेहरान से एक अपेक्षाकृत सुरक्षित स्थान पर स्थित होटल में स्थानांतरित कर दिया. हम वहां होटल में 3-4 दिन रहे, लेकिन फिर युद्ध और अधिक आक्रामक होने लगा."
परिजनों के लिए चिंता भरे पल
दिल्ली एयरपोर्ट के टर्मिनल-3 के बाहर कई अभिभावक अपने बच्चों के लौटने का इंतजार कर रहे थे. रिहाना खान, जिनकी बेटी अधफर खान एमबीबीएस के चौथे वर्ष की छात्रा हैं, लगातार अपनी बेटी के संपर्क में रहने की कोशिश कर रही थीं.
उन्होंने कहा, "युद्ध शुरू होने से ठीक 3-4 दिन पहले, उसने हमसे कुछ पैसे भेजने को कहा था और बाद में हमें खुशी हुई कि हमने ऐसा किया, क्योंकि युद्ध शुरू होते ही हमें उसके बारे में कुछ भी पता नहीं चल पा रहा था."
उन्होंने आगे बताया, "हममें से कई माता-पिता लगातार उसके संपर्क में थे. जब हमने उसकी फ्लाइट बुक की और वह दुबई पहुंची, तो हमें राहत मिली, लेकिन फिर फ्लाइट में देरी हो गई, जिससे हम फिर से चिंतित हो गए."
दूसरी निकासी उड़ान दिल्ली पहुंची
दिल्ली हवाई अड्डे पर फंसे भारतीयों को लेकर पहुंचने वाली यह दूसरी उड़ान है. इससे पहले रविवार सुबह लगभग 80 लोगों को लेकर पहली निकासी उड़ान भी दिल्ली पहुंची थी, जिसमें छात्र और तीर्थयात्री शामिल थे.
हालांकि दुबई में उड़ान संचालन अस्थायी रूप से निलंबित होने के कारण उड़ानों के कार्यक्रम में बदलाव करना पड़ा और यात्रियों को अतिरिक्त इंतजार करना पड़ा.
दुबई नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने 16 मार्च को X पर पोस्ट करते हुए कहा,"सभी यात्रियों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एहतियाती उपाय के तौर पर डीसीएए ने दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उड़ानों को अस्थायी रूप से निलंबित करने की घोषणा की है."


