समंदर में अमेरिका-ईरान की टकराहट तेज, भारत के बंदरगाह में पहुंचा ईरानी जहाज, कूटनीति और रणनीति का नया खेल शुरू
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के बीच भारत अचानक एक अहम रणनीतिक बिंदु बन गया है। कोच्चि में ईरानी युद्धपोत की शरण ने नई कूटनीतिक चर्चा शुरू कर दी है।

हिंद महासागर इन दिनों वैश्विक रणनीतिक तनाव का नया केंद्र बनता दिख रहा है। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच टकराव लगातार तेज हो रहा है। इसी माहौल में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। ईरान के एक नौसैनिक जहाज को भारत के कोच्चि बंदरगाह में आपात डॉकिंग की अनुमति दी गई। जहाज में तकनीकी खराबी बताई गई थी। ईरान ने भारत से मदद मांगी और भारत ने मानवीय आधार पर उसे शरण दे दी।
क्या भारत बना रणनीतिक पड़ाव?
सूत्रों के मुताबिक यह जहाज IRIS लवन था। इसे 1 मार्च को कोच्चि में इमरजेंसी डॉकिंग की अनुमति मिली। जहाज पर मौजूद 183 क्रू मेंबर्स को भी सुरक्षित ठहराया गया। भारतीय नौसेना की सुविधाओं में उनके रहने और तकनीकी जांच की व्यवस्था की गई। ऐसे समय में जब क्षेत्र में सैन्य तनाव बढ़ रहा है, भारत का बंदरगाह एक सुरक्षित पड़ाव के रूप में सामने आया है।
क्या हमले से पहले हुआ यह घटनाक्रम?
दिलचस्प बात यह है कि यह घटना एक बड़े हमले से कुछ दिन पहले हुई। ईरान का दूसरा युद्धपोत IRIS डेना हिंद महासागर में हमले का शिकार हो गया। रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी सबमरीन ने उस पर टॉरपीडो दागे। यह हमला श्रीलंका के पास अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में हुआ बताया जा रहा है। इस घटना ने पूरे क्षेत्र का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
क्या डूब गया ईरानी युद्धपोत?
हमले के बाद IRIS डेना को भारी नुकसान पहुंचा। जहाज ने डिस्ट्रेस कॉल भी भेजी थी। लेकिन बचाव दल के पहुंचने से पहले ही वह समुद्र में डूब गया। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक इस हादसे में कम से कम 87 ईरानी नाविकों की मौत हो गई। यह घटना हिंद महासागर में सैन्य तनाव की गंभीरता को दिखाती है।
क्या भारत में अभ्यास से लौट रहा था?
बताया गया कि IRIS डेना हाल ही में भारत में हुए मिलान मल्टीलेटरल नेवल एक्सरसाइज में शामिल हुआ था। यह अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास कई देशों की भागीदारी से आयोजित हुआ था। अभ्यास खत्म होने के बाद जहाज अपने देश लौट रहा था। इसी दौरान वह हमले का शिकार हो गया।
क्या कोच्चि में चल रही जांच?
दूसरी ओर IRIS लवन अभी कोच्चि में मौजूद है। भारतीय तकनीकी विशेषज्ञ उसके सिस्टम की जांच कर रहे हैं। जहाज को सुरक्षित डॉक में रखा गया है। विशेषज्ञ यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि तकनीकी खराबी किस कारण से आई। क्रू मेंबर्स को भी अस्थायी रूप से नौसैनिक सुविधाओं में ठहराया गया है।
क्या भारत की कूटनीति की परीक्षा?
इस पूरे घटनाक्रम ने भारत की विदेश नीति पर नई चर्चा शुरू कर दी है। भारत एक तरफ अमेरिका का रणनीतिक साझेदार है। दूसरी ओर ईरान के साथ भी उसके महत्वपूर्ण संबंध हैं। ऐसे में भारत को दोनों के बीच संतुलन बनाकर चलना पड़ता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि हिंद महासागर में बढ़ता तनाव आने वाले समय में भारत की कूटनीतिक भूमिका को और अहम बना सकता है।


