पेपर लीक कांड से देशभर में हड़कंप, NEET को लेकर सीएम हेमंत सोरेन ने सरकार से मांगा जवाब
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने देश के विभिन्न हिस्सों में हो रही पेपर लीक की घटनाओं पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार और अन्य राज्यों की व्यवस्था पर तीखा निशाना साधा है.

झारखंड: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने देश के विभिन्न हिस्सों में हो रही पेपर लीक की घटनाओं पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार और अन्य राज्यों की व्यवस्था पर तीखा निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि एक तरफ जहां नीट जैसी बड़ी परीक्षाओं और अन्य राज्यों में पेपर लीक के कारण युवाओं का भविष्य अधर में लटका है और नियुक्तियां बाधित हो रही हैं, वहीं झारखंड में पारदर्शी तरीके से सरकारी नौकरियों का दौर अनवरत जारी है.
सीएम हेमंत सोरेन नियुक्ति पत्र सौंपे
मुख्यमंत्री सोमवार को रांची स्थित झारखंड मंत्रालय में नवनियुक्त इंटर एवं स्नातक प्रशिक्षित सहायक आचार्यों तथा आंगनबाड़ी पर्यवेक्षिकाओं के लिए आयोजित 'नियुक्ति पत्र वितरण समारोह' को संबोधित कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने कुल 333 सफल अभ्यर्थियों को अपने हाथों से नियुक्ति पत्र सौंपे. इन नवनियुक्त कर्मियों में कक्षा 1 से 5 के लिए 160 सहायक आचार्य, कक्षा 6 से 8 के लिए 156 आचार्य और 17 आंगनबाड़ी पर्यवेक्षिकाएं शामिल हैं.
दशकों से लटकी नियुक्तियों को किया पूरा
समारोह को संबोधित करते हुए सीएम सोरेन ने कहा, देशभर के युवा आज पेपर लीक और परीक्षाओं में हो रही धांधली से पूरी तरह त्रस्त हैं. झारखंड में भी कुछ लोगों ने पेपर लीक के नाम पर ठगी का प्रयास किया, लेकिन हमारी सरकार ने उस सिंडिकेट का पर्दाफाश किया. हमने न केवल व्यवस्था को सुधारा, बल्कि दशकों से लटकी हुई नियुक्तियों को रिकॉर्ड समय में पूरा किया है.
युवाओं को दी गई नौकरियां
उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि अकेले शिक्षा विभाग में पिछले चार महीनों के भीतर 9,000 से अधिक युवाओं को नौकरियां दी गई हैं. राज्य सरकार ने पिछले दो वर्षों में 16,000 से अधिक और कुल मिलाकर अपने कार्यकाल में दो लाख से अधिक लोगों को सरकारी, अनुबंध व निजी क्षेत्रों में रोजगार से जोड़ा है.
बदलाव के वाहक बनें शिक्षक
मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त शिक्षकों से अपील की कि वे इसे महज एक आजीविका का साधन न समझें, बल्कि समाज में बदलाव के वाहक बनें. उन्होंने सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में जाने से कतराने वाले शिक्षकों को नसीहत देते हुए कहा कि ऐसी सोच से राज्य का समग्र विकास संभव नहीं है. बच्चे कच्ची मिट्टी की तरह होते हैं, उन्हें तराश कर झारखंड का भविष्य संवारने की जिम्मेदारी अब शिक्षकों के कंधों पर है.


